NEET केस- फास्ट ट्रैक कोर्ट में पहले दिन सुनवाई टली: CBI की तरफ से कोई वकील नहीं पहुंचा; आरोपियों की जमानत पर 3 अगस्त को सुनवाई
नई दिल्ली2 मिनट पहले
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नीट पेपर लीक मामले में राउज एवेन्यू की स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट में सोमवार को पहले ही दिन सुनवाई टल गई। सुनवाई के दौरान CBI की ओर से कोई सरकारी वकील मौजूद नहीं था।
इसके बाद कोर्ट ने डायरेक्टर ऑफ प्रोसिक्यूशन को CBI का पक्ष रखने के लिए सरकारी वकील नियुक्त करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने आरोपी दिनेश बिवाल और विकास बिवाल की जमानत याचिका पर सुनवाई 3 अगस्त तक टाल दी। आरोपियों की ओर से वकील एपी सिंह पेश हुए थे।
यह पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024 के तहत बनी स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट में इस मामले की पहली सुनवाई थी। अब NEET पेपर लीक से जुड़े सभी मामलों की सुनवाई इसी कोर्ट में होगी।
पीएम मोदी ने 23 जुलाई को पेपर लीक मामले को लेकर अपने पहले सोशल मीडिया पोस्ट में फास्ट ट्रैक कोर्ट्स बनाने की घोषणा की थी। 23 जुलाई और 26 जुलाई को पीएम ने सोशल मीडिया पर दो वीडियो मैसेज जारी किए थे। दोनों में उन्होंने कहा था कि दोषियों पर कार्रवाई के लिए हमने फास्ट ट्रैक कोर्ट बना दिए हैं।

पीएम ने नीट पेपर लीक मामले पर 23 जुलाई को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपना पहला पोस्ट किया था।
CBI ने अब तक 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया
नीट पेपर लीक मामले में CBI ने अब तक 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। सभी आरोपी 6 अगस्त तक न्यायिक हिरासत में हैं। इस मामले में 12 मई को एक सरकारी अधिकारी की शिकायत पर BNS, प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट और परीक्षा में अनुचित साधनों के इस्तेमाल से जुड़ी धाराओं में FIR दर्ज की गई थी।
एजेंसी के मुताबिक, पेपर लीक का नेटवर्क शुभम खैरनार, यश यादव, मांगीलाल बिंवाल, विकास बिंवाल और दिनेश बिंवाल तक फैला था। जांच में मांगीलाल के मोबाइल फोन से लीक हुआ पेपर बरामद होने का दावा किया गया है। आरोप है कि मांगीलाल ने अपने बेटे विकास के लिए NEET का प्रश्नपत्र खरीदने के मकसद से शुभम खैरनार से संपर्क किया था।
CBI ने बताया कैसे एक आरोपी से दूसरे तक पहुंचा पेपर
- मांगीलाल के बेटे विकास ने बताया कि यश यादव से उसकी पहचान राजस्थान के सीकर में कोचिंग के दौरान हुई थी। उसी से ₹10 लाख में पेपर का सौदा किया था।
- पेपर सबसे पहले शुभम खैरनार ने यश यादव को दिया। इसके बाद यश ने मांगीलाल को, मांगीलाल ने विकास को और विकास ने दिनेश बिवाल तक प्रश्नपत्र पहुंचाया।
- एजेंसी का यह भी आरोप है कि मांगीलाल ने अन्य अभ्यर्थियों को भी ₹12 लाख लेकर पेपर बेचा था।
- इससे पहले कोर्ट ने आरोपी यश यादव को 21 जून को नीट री-एग्जाम देने और 22 जून को अपनी बहन की शादी में शामिल होने के लिए न्यायिक हिरासत में जाने की अनुमति दी थी।

पेपर लीक केस के लिए पहली बार फास्ट ट्रैक कोर्ट
देश में अब तक पेपर लीक मामलों की सुनवाई सामान्य अदालतों में होती थी, इसलिए फैसला आने में कई साल लग जाते थे। नीट पेपर लीक विवाद के बाद पहली बार फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाया गया है, ताकि फैसला तेजी से हो सके।
भारत में फास्ट ट्रैक कोर्ट की शुरुआत साल 2000 में हुई थी। इनका गठन 11वें वित्त आयोग की सिफारिश पर किया गया था। आयोग ने देशभर में 1734 फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने के लिए स्पेशल फंड की अनुशंसा की थी।
फास्ट ट्रैक कोर्ट का रिकॉर्ड भी बेहतर रहा है। केंद्र सरकार के अनुसार, रेप और POCSO मामलों के लिए बनी फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 2019 से 2025 तक 3.06 लाख से ज्यादा मामलों का निपटारा किया है।
इन अदालतों में मामलों के निपटारे का रेट 96.28% है, यानी जितने नए मामले आए, लगभग उतने ही मामलों का निपटारा भी हुआ। हालांकि, नए मामले लगातार दर्ज होने के कारण 2025 के अंत तक 2.45 लाख से ज्यादा मामले पेंडिंग थे, जबकि 2024 के अंत में यह संख्या 2.04 लाख थी।



