आधार कार्ड का इस्तेमाल सिर्फ पहचान के लिए हो: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज; याचिका में दावा- अभी पता और जन्मतिथि का सबूत माना जा रहा
सुप्रीम कोर्ट आज आधार कार्ड के इस्तेमाल को लेकर दाखिल की गई जनहित याचिका पर सुनवाई करेगा। याचिका में कहा गया है कि आधार कार्ड का इस्तेमाल पहचान पत्र से आगे बढ़कर नागरिकता, निवास और जन्म तारीख के प्रमाण के रूप में किया जा रहा है, जबकि कानून इसकी अनुमति नहीं देता। अश्विनी कुमार उपाध्याय की तरफ से दायर याचिका नागरिकता और पहचान का भ्रम में मांग की गई है कि इसके इस्तेमाल को सिर्फ पहचान की पुष्टि तक सीमित करने के निर्देश दिए जाएं। चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस वी मोहना की बेंच सुनवाई कर सकती है। याचिकाकर्ता के 2 तर्क कानून और नियमों का उल्लंघन याचिका में कहा गया है कि नए मतदाता पंजीकरण (फॉर्म-6) में आधार कार्ड को जन्मतिथि और पते के प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जा रहा है, जबकि कानून इसकी अनुमति नहीं देता। याचिकाकर्ता के अनुसार यह आधार अधिनियम 2016, जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और संविधान के समानता के अधिकार से जुड़े प्रावधानों के विपरीत है। साथ ही, यूआईडीएआई भी स्पष्ट कर चुका है कि आधार केवल पहचान स्थापित करने का दस्तावेज है, न कि नागरिकता, जन्मतिथि या स्थायी निवास का प्रमाण। वोटर लिस्ट में फर्जी नाम जुड़ने की आशंका याचिका में दावा किया गया है कि आधार आधारित सत्यापन प्रक्रिया की कमजोरियों का फायदा उठाकर अवैध प्रवासी या घुसपैठिए अन्य सरकारी दस्तावेज हासिल कर सकते हैं और फिर मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज करा सकते हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि मौजूदा जांच व्यवस्था पर्याप्त मजबूत नहीं है, जिससे चुनावी डेटा की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है। इसलिए चुनावी रिकॉर्ड की निगरानी और सुरक्षा के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीशों व साइबर विशेषज्ञों वाली एक स्वतंत्र उच्चस्तरीय समिति गठित करने की मांग की गई है।
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