पत्थरों की चिनाई करने वाले बुजुर्ग की चमकी किस्मत: ₹50 के टिकट ने रातों-रात बनाया ₹15 लाख का मालिक वीडियो देख डालने लगा था लॉटरी – Ludhiana News
पंजाब के लुधियाना में जहां पाई-पाई को मोहताज और कर्ज में डूबे एक बुजुर्ग मजदूर की किस्मत ने ऐसी करवट ली कि वह रातों-रात लखपति बन गया। मूल रूप से राजस्थान के जोधपुर के रहने वाले 61 वर्षीय बुजुर्ग भोजराज जो सालों से लुधियाना में पत्थरों की चिनाई (लेबर) का काम करते थे, उन्होंने मात्र 50 रुपये का निवेश किया था। इस अदने से निवेश ने आज उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा आर्थिक संकट दूर कर दिया है। गांधी ब्रदर्स से खरीदी गई एक लॉटरी टिकट ने उनके सिर से 25 लाख के कर्ज का बोझ हल्का करने का रास्ता साफ कर दिया है। इन 4 पॉइंट्स में समझें मजदूर से लखपति बनने का सफर पहले क्या थे हालात: सिर पर 25 लाख का कर्ज और 7 बच्चों का पेट पालने की जद्दोजहद तंगहाली का दौर: भोजराज का परिवार काफी बड़ा है। उनके कुल 7 बच्चे हैं, जिनमें 5 लड़के और 2 लड़कियां हैं। शादी के लिए लिया लोन: दो बेटियों की शादी करने और घर का खर्च चलाने के लिए भोजराज ने बैंक से भारी लोन ले रखा था। उनके सिर पर कुल 25 लाख रुपये का कर्जा था। नामुमकिन था चुकाना: दिन-रात पत्थरों की घिसाई और चिनाई करके बुजुर्ग भोजराज बस इतना ही कमा पाते थे कि परिवार का पेट पल सके। इस मामूली कमाई से बैंक का भारी कर्ज चुकाना बिल्कुल नामुमकिन लग रहा था, जिसके चलते पूरा परिवार भारी मानसिक तनाव में जी रहा था। कब और कैसे पलटी किस्मत: यूट्यूब वीडियो से जगी आस, 4 जून को खरीदी ₹50 की टिकट सोशल मीडिया से मिला हौसला: भोजराज अक्सर यूट्यूब और सोशल मीडिया पर लोगों के लॉटरी जीतने के वीडियो देखा करते थे। वीडियो देखकर उनके मन में भी एक उम्मीद जागी कि शायद उनकी गरीबी भी दूर हो जाए। 2 महीने की लगातार तपस्या: इसी विश्वास के साथ उन्होंने पिछले दो महीने से लगातार लॉटरी टिकट खरीदना शुरू किया। इससे पहले भी उन्होंने करीब 5 से 7 बार अपनी किस्मत आजमाई, लेकिन हर बार निराशा ही हाथ लगी। आखिरकार बीते 4 जून को उन्होंने लुधियाना के मशहूर गाँधी ब्रदर्स से मात्र 50 रुपये की एक टिकट खरीदी। अगले ही दिन यानी 5 जून की शाम को जब लॉटरी का रिजल्ट आया, तो बंपर प्राइज में भोजराज का नंबर चमक रहा था। ₹50 की टिकट पर सीधे ₹15 लाख का इनाम उनके नाम हो चुका था अब इस बंपर प्राइज का क्या करेंगे भोजराज? लॉटरी की रकम जीतने के बाद भोजराज की आंखों से आंसू छलक पड़े। उन्होंने भावुक होते हुए अपनी आगे की प्लानिंग बताई
मुझ पर कुल 25 लाख रुपये का कर्जा है। दिन-रात मेहनत करके भी ब्याज चुकाना भारी था। अब इस 15 लाख रुपये की बंपर राशि से मैं सबसे पहले बैंक का लोन चुकाऊंगा । मैं अपने परिवार को इस भारी मानसिक तनाव और घुटने टेकने वाले कर्ज से मुक्त कराना चाहता हूं। यह पैसा मेरे लिए किसी भगवान के आशीर्वाद से कम नहीं है, जिसने मेरे बुढ़ापे को सहारा दे दिया। कैसा है परिवार और जोधपुर में कैसे मना जश्न? अभी 3 बच्चे हैं कुंवारे: भोजराज के 4 बच्चों की शादी हो चुकी है, जबकि 3 बच्चे अभी भी कुंवारे हैं, जिनकी जिम्मेदारी अभी बुजुर्ग पिता के कंधों पर है।
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