नो-फ्लाइंग जोन में अमरनाथ यात्रा, हेलीकॉप्टर सेवा पर रोक: 3 जुलाई से यात्रा का होगा आगाज; पैदल, टट्टू और पालकी ही भक्तों का सहारा – Pathankot News

नो-फ्लाइंग जोन में अमरनाथ यात्रा, हेलीकॉप्टर सेवा पर रोक:  3 जुलाई से यात्रा का होगा आगाज; पैदल, टट्टू और पालकी ही भक्तों का सहारा – Pathankot News




3 जुलाई से शुरू होने वाली अमरनाथ यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं को इस वर्ष हेलीकॉप्टर सेवा की सुविधा नहीं मिलेगी। जम्मू-कश्मीर प्रशासन द्वारा यात्रा मार्गों को ‘नो-फ्लाइंग जोन’ घोषित किए जाने के बाद श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड ने हेलीकॉप्टर सेवाएं बंद करने का फैसला लिया है। अधिकारियों के अनुसार अमरनाथ गुफा तक जाने वाले पहलगाम और बालटाल दोनों मार्गों पर हेलीकॉप्टर संचालन नहीं होगा। श्रद्धालुओं को यात्रा के लिए पैदल मार्ग, घोड़े, पालकी या पिट्ठू सेवाओं का सहारा लेना पड़ेगा। बताया जा रहा है कि प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से यात्रा अवधि के दौरान सभी प्रकार के उड़ान प्लेटफॉर्म, जिनमें हेलीकॉप्टर, ड्रोन, यूएवी और गुब्बारे शामिल हैं, पर रोक लगाने का निर्णय लिया है। यह फैसला सुरक्षा एजेंसियों की सलाह पर लिया गया है। श्राइन बोर्ड ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे अपनी यात्रा की योजना बनाते समय हेलीकॉप्टर सेवा उपलब्ध न होने को ध्यान में रखें और वैकल्पिक साधनों की व्यवस्था करें। गौरतलब है कि पिछले वर्षों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु हेलीकॉप्टर सेवा का उपयोग कर अमरनाथ गुफा तक पहुंचते थे, विशेषकर बुजुर्ग और दिव्यांग यात्री। इस बार सुरक्षा कारणों से यह सुविधा उपलब्ध नहीं होगी, जिससे यात्रियों को पारंपरिक तरीके से यात्रा पूरी करनी होगी। लगातार दूसरे वर्ष लिया गया फैसला
बता दें, सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए प्रशासन ने लगातार दूसरे वर्ष यात्रा मार्गों पर हेलीकॉप्टर संचालन की अनुमति नहीं देने का निर्णय लिया है। इस फैसले ने जहां सुरक्षा एजेंसियों को राहत दी है, वहीं बुजुर्ग, दिव्यांग और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे श्रद्धालुओं में निराशा भी देखी जा रही है। बता दें, अमरनाथ यात्रा देश की सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक यात्राओं में से एक मानी जाती है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु दक्षिण कश्मीर स्थित पवित्र अमरनाथ गुफा के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। पारंपरिक रूप से श्रद्धालु दो प्रमुख मार्गों पहलगाम और बालटाल से यात्रा करते हैं। पिछले वर्षों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु समय और शारीरिक श्रम की बचत के लिए हेलीकॉप्टर सेवा का उपयोग करते रहे हैं। विशेष रूप से बुजुर्गों और अस्वस्थ यात्रियों के लिए यह सेवा सुविधाजनक मानी जाती थी। सुरक्षा बलों की गतिविधियों को प्राथमिकता
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यात्रा के दौरान हेलीकॉप्टरों की नियमित आवाजाही से सुरक्षा संचालन प्रभावित हो सकता है। इसके अलावा संवेदनशील इलाकों में हवाई निगरानी और सुरक्षा बलों की गतिविधियों को प्राथमिकता देने के लिए भी हेलीकॉप्टर सेवा को बंद रखने का निर्णय लिया गया है। अधिकारियों के अनुसार यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाया गया है। यात्रा मार्गों, बेस कैंपों और आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की जा रही है। ड्रोन निगरानी, सीसीटीवी नेटवर्क, आधुनिक संचार प्रणाली और खुफिया तंत्र को भी सक्रिय किया गया है। सुरक्षा एजेंसियां किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए व्यापक तैयारी कर रही हैं।
घोड़े या पालकी का लेना पड़ेगा सहारा
हेलीकॉप्टर सेवा बंद होने का सबसे अधिक असर उन श्रद्धालुओं पर पड़ेगा जो कम समय में यात्रा पूरी करना चाहते थे। जिनमें विशेषकर बुजुर्ग और दिव्यांग यात्री शामिल हैं। बालटाल और पहलगाम मार्गों पर पैदल यात्रा कई किलोमीटर लंबी और चुनौतीपूर्ण होती है। हालांकि प्रशासन का कहना है कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए घोड़े, पालकी और अन्य वैकल्पिक व्यवस्थाएं उपलब्ध रहेंगी। चिकित्सा सुविधाओं को भी पहले से अधिक मजबूत बनाया जा रहा है ताकि आपात स्थिति में यात्रियों को तत्काल सहायता मिल सके। पर्यटन और स्थानीय कारोबार से जुड़े लोगों का मानना है कि हेलीकॉप्टर सेवा बंद होने से कुछ आर्थिक प्रभाव भी पड़ सकता है। हेलीकॉप्टर संचालन से जुड़े कर्मचारियों और सेवा प्रदाताओं को नुकसान उठाना पड़ सकता है। वहीं कुछ स्थानीय लोगों का कहना है कि सुरक्षा को देखते हुए यह फैसला आवश्यक है और यात्रा के शांतिपूर्ण संचालन के लिए सभी को सहयोग करना चाहिए। विशाल धार्मिक यात्रा में सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
विशेषज्ञों का मानना है कि अमरनाथ यात्रा जैसी विशाल धार्मिक यात्रा में सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। यदि सुरक्षा एजेंसियां किसी जोखिम की आशंका के आधार पर हेलीकॉप्टर सेवा को स्थगित करने का निर्णय लेती हैं, तो उसका उद्देश्य श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना होता है। ऐसे में यात्रियों को यात्रा की योजना बनाते समय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करना चाहिए। कुल मिलाकर, इस वर्ष भी अमरनाथ यात्रा बिना हेलीकॉप्टर सेवा के आयोजित होने जा रही है। अमरनाथ यात्रा के लिए 2 मुख्य मार्ग उपलब्ध हैं:
पहला ‘बालटाल रूट’ (छोटा लेकिन बेहद कठिन) और दूसरा ‘पहलगाम रूट’ (लंबा लेकिन आसान और पारंपरिक)
बालटाल रूट:
दूरी: लगभग 14 किलोमीटर (एक तरफ की)समय: 1 से 2 दिन (पैदल पूरा करने में)
रूट: बालटाल (बेस कैंप) ➔ डोमेल ➔ बरारीमार्ग ➔ संगम ➔ पवित्र गुफा
खासियत: यह रास्ता काफी खड़ी चढ़ाई वाला है, इसलिए शारीरिक रूप से सबसे फिट यात्रियों के लिए यह उत्तम विकल्प है।
पहलगाम रूट:
दूरी: लगभग 35 से 48 किलोमीटर (एक तरफ की)
समय: 3 से 5 दिन (पैदल पूरा करने में)
रूट: पहलगाम / नुनवान (बेस कैंप) ➔ चंदनवाड़ी (16 किमी) ➔ पिस्सू टॉप ➔ शेषनाग ➔ पंचतरणी ➔ पवित्र गुफा
खासियत: यह रास्ता प्राचीन, लंबा और बहुत सुंदर है। इसमें चढ़ाई धीरे-धीरे होती है, जिससे बुजुर्गों और कम अनुभवी यात्रियों को परेशानी नहीं होती।
यात्रा का प्रमुख माध्यम: श्रद्धालु दोनों रास्तों में पैदल, टट्टू (घोड़े/खच्चर) या पालकी सेवाओं का उपयोग करके आसानी से दर्शन के लिए जा सकते हैं।



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