जगराओं में राइस मिल में सरकारी गेहूं भिगोने का मामला: विधायक सरबजीत कौर पहुंचीं मौके पर; जांच के लिए पहुंची FCI टीम – Jagraon News
जगराओं-मोगा रोड पर स्थित जीटीबी राइस मिल में सरकारी गेहूं की बोरियों पर पानी डालकर वजन बढ़ाने के कथित मामले ने तूल पकड़ लिया है। मंगलवार देर रात विधायक सरबजीत कौर मानूके और मार्केट कमेटी हठूर के चेयरमैन करमजीत सिंह कम्मी की छापेमारी के बाद यह मामला पंजाब सरकार के उच्च अधिकारियों तक पहुंच गया है। विधायक सरबजीत कौर मानूके ने इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी पंजाब के खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री लाल चंद कटारूचक्क को दी है। उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। छापेमारी के दौरान आरोप लगाए गए कि राइस मिल परिसर में रखी करीब 1.19 लाख सरकारी गेहूं की बोरियों पर समर्सिबल पंप और पाइपों का उपयोग करके पानी डाला जा रहा था। विधायक ने मौके पर पहुंचकर कथित तौर पर इस प्रक्रिया को रुकवाया और पुलिस प्रशासन से कार्रवाई की मांग की। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए बुधवार को जगराओं रेलवे स्टेशन पहुंची विशेष मालगाड़ी में वेयरहाउस एजेंसी का गेहूं लोड नहीं किया गया। सूत्रों के अनुसार, पहले मार्कफेड और वेयरहाउस एजेंसी का गेहूं भेजने की योजना थी, लेकिन विवाद के बाद वेयरहाउस के गोदाम से गेहूं उठाने का निर्णय टाल दिया गया। इसके बजाय, पनसप के गोदाम से गेहूं की बोरियां विशेष रेलगाड़ी में लोड कर रवाना की गईं। भारतीय खाद्य निगम की टीम भी पहुंची भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) की एक विशेष टीम भी मौके पर पहुंची। क्वालिटी मैनेजर के नेतृत्व में टीम ने वेयरहाउस में रखे गेहूं के तीन से चार नमूने लिए और जांच शुरू कर दी है। एफसीआई के जिला प्रबंधक दुष्यंत कुमार ने बताया कि शेलर में रखा गया गेहूं केंद्रीय पूल का हिस्सा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक गेहूं गोदाम या शेलर में रहता है, उसकी देखरेख और सुरक्षा की जिम्मेदारी संबंधित वेयरहाउस एजेंसी की होती है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में सैंपल फेल होते हैं या यह साबित होता है कि गेहूं को पानी डालकर भिगोया गया है, तो एफसीआई ऐसे गेहूं को स्वीकार नहीं करेगी। देर शाम विधायक सरबजीत कौर मानूके ने कहा कि इस पूरे प्रकरण में ऊपर से लेकर नीचे तक जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करवाई जाएगी। मानवाधिकार संगठन ने भी उठाई आवाज इस बीच लुधियाना निवासी मानवाधिकार कार्यकर्ता रविंद्र शर्मा ने भी मामले को गंभीर बताते हुए पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया, मुख्यमंत्री भगवंत मान, लुधियाना के डिप्टी कमिश्नर हिमांशु जैन तथा खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को लिखित शिकायत भेजी है। रविंद्र शर्मा का कहना है कि यदि सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत गरीबों को वितरित किए जाने वाले गेहूं की गुणवत्ता से पानी डालकर खिलवाड़ किया गया है, तो यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि गरीबों के अधिकारों का भी हनन है। उन्होंने दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग की है। अब सभी की निगाहें एफसीआई की जांच रिपोर्ट और सरकार द्वारा की जाने वाली आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
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