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महाराष्ट्र के नासिक स्थित TCS ऑफिस से जुड़ा धर्मांतरण और योन उत्पीड़ने का मामला गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। कोर्ट में याचिका दायर कर केंद्र और राज्य सरकारों को सख्त कदम उठाने के निर्देश देने की मांग की गई है।
सुप्रीम कोर्ट में धर्म परिवर्तन से जुड़ा एक स्वतः संज्ञान मामला पहले से लंबित है। नासिक के TCS मामले को लेकर उसी केस में नई अर्जी दाखिल की गई है।
याचिका वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय ने दायर की है। याचिका में कहा कि यह सिर्फ धर्मांतरण का मामला नहीं, बल्कि देश के खिलाफ सुनियोजित खेल है। उन्होंने कहा कि धोखे से कराया गया धर्मांतरण देश की संप्रभुता, धर्मनिरपेक्षता और स्वतंत्रता के लिए खतरा है। किसी संगठन के जरिए जबरन या धोखे से कराए गए धर्मांतरण को आतंकी कृत्य की कैटेगरी में रखा जाना चाहिए।
याचिका में तीन बड़े आरोप लगाए…
- जबरदस्ती या धोखे से धर्म बदलवाना देश के लिए एक गंभीर खतरा है। जब यह काम किसी बड़े संगठित और दबाव बनाकर चलाए जा रहे अभियान के तहत होता है तो इसे आंतकवादी कृत्य माना जाना चाहिए।
- यह जबरन या धोखे से धर्म बदलवाना कोई अकेली धांर्मिक घटना नहीं है, बल्कि एक सुनियोजित षड्यंत्र है। इस षड्यंत्र को अक्सर विदेसी ताकतें पैसा देती हैं। इसका मकसद देश के धार्मिक जनसंख्या संतुलन को बदलना है जिससे भारत की एकता, अखंडता और सुरक्षा को खतरा पैदा हो।
- धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार किसी को धोखे, दबाव, लालच या जबरदस्ती से धर्म परिवर्तन कराने की अनुमति नहीं देता। संविधान के अनुच्छेद 25 का हवाला देते हुए कहा गया है कि यह अधिकार सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य जैसी शर्तों के अधीन है।
कोर्ट से दो मांग की गई…
- केंद्र सरकार और सभी राज्य सरकारों को सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए जाएं ताकि धोखे या जबरदस्ती से होने वाले धर्म परिवर्तन पर रोक लगाई जा सके।
- केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश दिया जाए कि धर्म परिवर्तन के मामलों को सुनने के लिए अलग से स्पेशल कोर्ट यानी विशेष अदालतें बनाई जाएं।
अदालत ने 2023 में इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणि से सहायता मांगी थी। कोर्ट ने तब कहा था कि धर्म परिवर्तन का मुद्दा गंभीर है और इसे राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए। यह याचिका उसी लंबित मामले के तहत दाखिल की गई है, जिसमें देशभर में धोखाधड़ी से होने वाले धर्म परिवर्तन को रोकने के लिए सख्त कदमों की मांग की गई है।
कंपनी ने कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम दिया
कंपनी ने कर्मचारियों की सुरक्षा और सुविधा को देखते हुए नासिक ऑफिस के स्टाफ को घर से काम करने को कहा। सूत्रों के मुताबिक यह कदम मौजूदा हालात को देखते हुए उठाया गया है। जांच के दौरान पुलिस को करीब 78 संदिग्ध कॉल रिकॉर्ड, ईमेल और चैट मिले हैं। कुछ वित्तीय लेनदेन के संकेत भी सामने आए हैं।
इस केस में अब तक 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपी नई जॉइन करने वाली कर्मचारियों की निजी जानकारी के आधार पर ‘टारगेट’ चुनते थे। खासकर आर्थिक रूप से कमजोर और पारिवारिक समस्याओं से जूझ रहे कर्मचारियों को निशाना बनाया जाता था।

गिरफ्तार आरोपियों को पुलिस ने 9 अप्रैल को नासिक कोर्ट में पेश किया।
वित्तीय लेन-देन की जांच में सहयोग नहीं कर रही
पीड़ित लड़कियों ने जब आरोपियों के खिलाफ शिकायत की तो अश्विनी ने शिकायत को जानबूझकर नजरअंदाज किया। उलटा उसने पीड़ित को ही फटकार लगाई। सोमवार को तीन दिन की हिरासत समाप्त होने के बाद उसे अदालत में पेश किया गया। वह वित्तीय लेन-देन की जांच में पुलिस का बिल्कुल भी सहयोग नहीं कर रही है। इसलिए उसकी पांच दिन की हिरासत मांगी गई थी। हालांकि, अदालत ने उसे दो दिनों के लिए हिरासत में भेज दिया।
जांच में यह भी सामने आया है कि प्रशिक्षण के दौरान हिंदू देवी-देवताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी की जाती थी। जब पीड़ित परेशान होते थे, तब HR मैनेजर उनसे संपर्क कर भरोसा जीतती थी और धीरे-धीरे उनके रहन-सहन में बदलाव के लिए दबाव बनाया जाता था।
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महाराष्ट्र के नासिक स्थित TCS कंपनी ऑफिस में धर्म परिवर्तन, यौन शोषण केस की पुलिस जांच में सामने आया है कि एक संगठित नेटवर्क नए कर्मचारियों को निशाना बनाता था। इस केस में अब तक 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपी नई जॉइन करने वाली कर्मचारियों की निजी जानकारी के आधार पर ‘टारगेट’ चुनते थे। पूरी खबर पढ़ें…









