इन्वेस्ट पंजाब योजना फ्लॉप: अमृतसर में नई यूनिट्स लगाने से कतरा रहे कारोबारी – Amritsar News

इन्वेस्ट पंजाब योजना फ्लॉप: अमृतसर में नई यूनिट्स लगाने से कतरा रहे कारोबारी – Amritsar News




गुरमीत लूथरा | अमृतसर आप सरकार की इन्वेस्ट पंजाब योजना के तहत मिलने वाली सब्सिडी योजना आकर्षक न होने के कारण कारोबारी नई टेक्सटाइल प्रोसेसिंग यूनिट्स लगाने में रुचि नहीं ले रहे हैं। व्यापार विरोधी नीतियों का ही नतीजा है कि जिले में पिछले 25 वर्षों में कुल 133 यूनिट्स में से अब केवल 18 प्रोसेसिंग यूनिट ही शेष बची हैं। सरकार ने इस योजना के तहत मशीनों पर 70 प्रतिशत सब्सिडी देने का प्रावधान तो किया है, लेकिन यह रकम एकमुश्त मिलने के बजाय 10 साल की किश्तों में दी जा रही है। जो 18 यूनिट्स अभी चल रही हैं, वे भी शूटिंग-शर्टिंग की स्पिनिंग या डाइंग के बजाय केवल वूलन आधारित ड्रेस मटेरियल का काम कर रही हैं। नीतियों के कारण 115 स्पिनिंग मिल्स बंद हो चुकी हैं। टेक्सटाइल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के प्रधान दीपक खन्ना और महासचिव राजीव खन्ना ने मुख्यमंत्री भगवंत मान से इनसेंटिव स्कीम में बदलाव की मांग की है। उन्होंने कहा कि सरकार टेक्सटाइल प्रोसेसर्स यूनिट्स में पानी की निकासी के लिए इस्तेमाल होने वाले अंडरग्राउंड वाटर पर लगाए गए एक्सट्रैक्ट चार्जेस को हरियाणा की तर्ज पर आधा करे। एसोसिएशन ने बताया कि पंजाब सरकार जहां 18 रुपए क्यूबिक मीटर प्रतिदिन चार्ज वसूलती है, वहीं हरियाणा में यह दर सिर्फ 8 रुपए है। इसी तरह 75 हजार क्यूबिक मीटर पानी के इस्तेमाल पर पंजाब में 22 रुपए और हरियाणा में केवल 10 रुपए चार्ज है। इसके अलावा एसोसिएशन ने इंडस्ट्रियल पार्क व सोलर प्लांट के लिए जगह देने, वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाने और रेन हार्वेस्टिंग सिस्टम को अनिवार्य करने की मांग की है। साल 1999 में केंद्र सरकार द्वारा प्रति यूनिट 2.50 लाख रुपए मासिक फिक्स एक्साइज ड्यूटी लगाने से सीमांत क्षेत्र अमृतसर का टेक्सटाइल उद्योग बंद होने के कगार पर पहुंच गया था। हालांकि, 2001 में केंद्र ने इस आदेश को वापस लेकर दोबारा प्रति मीटर कपड़े पर ड्यूटी तय की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और 133 यूनिट्स की करीब 80 हजार लेबर पलायन कर चुकी थी। इसी नीति के कारण साल 1956 से वेरका बाईपास पर स्थापित जिले की सबसे पुरानी एसपी स्पिनिंग मिल भी साल 2000 में बंद हो गई। इस ऐतिहासिक मिल को स्वर्गीय मनोहर लाल खन्ना, अरुण खन्ना, विनोद खन्ना और दीपक खन्ना मिलकर चलाते थे, जिसके बंद होने से 400 से अधिक मजदूर बेरोजगार होकर यूपी-बिहार लौट गए थे।



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