पंजाब में कम वोटिंग, नेताओं की बढ़ी टेंशन: 2021 के मुकाबले 9.59% घटी; दलबदली बड़ी वजह, जीतने वाला सत्ताधारी पार्टी में चला जाता – Ludhiana News
पंजाब में लोकल बॉडीज इलेक्शन में वोटिंग के फाइनल आंकड़े सामने आ गए। पिछले लोकल बॉडीज इलेक्शन के मुकाबले इस बार 9.59% मतदान कम हुआ। अर्बन व सेमी-अर्बन एरिया में मतदान कम होने से सभी राजनीतिक दलों के नेता टेंशन में आ गए। पिछले निकाय चुनावों में जहां 73.53% प्रतिशत वोटिंग हुई थी, वहीं इस बार 63.94% वोटिंग हुई। खासकर बड़े शहरों और नगर निगम क्षेत्रों में इस बार मतदान का ग्राफ काफी नीचे रहा। पॉलिटिकल एक्सपर्ट पवनदीप शर्मा इसके पीछे सबसे बड़ा कारण 2024 निकाय चुनाव में हुए दलबदल को मान रहे हैं। पंजाब में कुल 12 नगर निगम, 76 नगर परिषद व 21 नगर पंचायतें हैं। नगर निगम, नगर काउंसिल व नगर पंचायत की 75 से 80 सीटें अर्बन व सेमी-अर्बन क्षेत्रों की हैं। एक्सपर्ट का मानना है कि इसीलिए सभी राजनीतिक दलों ने इल चुनावों में पूरी ताकत झोंक दी। वोटिंग से जुड़े 2 बड़े ट्रेंड जानिए:- 1. बड़े शहरों का मोहभंग, कुल मतदान में 9.59% की भारी गिरावट
साल 2021 और 2026 के निकाय चुनावों की तुलना करें, तो इस बार वोटर्स का मिला-जुला उत्साह देखने को मिला है। साल 2021 के पंजाब निकाय चुनाव में कड़ाके की ठंड और किसान आंदोलन के साए के बीच रिकॉर्डतोड़ 73.53% मतदान हुआ था। उस समय बठिंडा, पठानकोट और अमृतसर जैसे अधिकांश निगम क्षेत्रों में मतदान 70% से अधिक रहा था।
इसके उलट, साल 2026 के इन चुनावों में कुल 63.94% मतदान ही दर्ज किया गया है। इस तरह पिछले चुनाव की तुलना में इस बार वोटिंग प्रतिशत में करीब 9.59% की भारी गिरावट दर्ज की गई है। खासकर बड़े शहरों और नगर निगम क्षेत्रों में इस बार मतदान का ग्राफ काफी नीचे रहा, जिसने राजनीतिक पंडितों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। 2. छोटे कस्बों में दिखा दम, नगर निगम क्षेत्रों में सबसे कम वोटिंग
चुनाव आयोग के अंतिम आंकड़ों के अनुसार, बड़े शहरों की तुलना में छोटे कस्बों और गांवों से सटी नगर पंचायतों में लोगों ने भारी उत्साह के साथ लोकतंत्र के इस उत्सव में भाग लिया। नगर पंचायतों में सबसे अधिक 76.18% मतदान दर्ज किया गया, जहां कुल 1,41,643 मतदाताओं में से 1,07,903 लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। वहीं, सबसे खराब स्थिति 8 नगर निगम क्षेत्रों की रही, जहां सबसे कम 59.91% मतदान हुआ। यहां 10 लाख 71 हजार 403 रजिस्टर्ड मतदाताओं में से महज 6 लाख 41 हजार 930 वोटर ही पोलिंग बूथों तक पहुंचे। अगर नगर कौंसिलों की बात करें तो यहां मतदान प्रतिशत 65.06% रहा। संख्या के लिहाज से यहां सबसे अधिक मतदाता थे, जहां कुल 22 लाख 87 हजार 637 मतदाताओं में से 14 लाख 88 हजार 408 लोगों ने वोट डाले। अब जानिए, वोटिंग को लेकर एक्सपर्ट ने क्या कहा:- डॉ. औलख बोले- इमेज को लेकर टकराव हुआ
पॉलिटिकल एक्सपर्ट डॉ किरपाल सिंह औलख का कहना है कि पंजाब में अलग-अलग जगह से राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों में टकराव की बातें सामने आई हैं। इससे साफ है कि ये चुनाव जमीनी स्तर पर राजनीतिक दलों के बीच यह साख की लड़ाई बन चुकी थी। विपक्ष जमीन पर अपनी खोई हुई पकड़ वापस पाने के लिए पूरी ताकत झोंक रहा था, तो वहीं सत्ताधारी दल अपने शहरी गढ़ों को बचाने के लिए आक्रामक रुख अपनाए हुए था। उधर, भारतीय जनता पार्टी शहरी पार्टी का टैग छुड़ाने की कोशिश में दिखी। पवनदीप शर्मा ने 3 वजहें बताईं.. क्या इसे 2027 का ‘सेमीफाइनल’ कहा जा सकता है?
एक्सपर्ट पवनदीप शर्मा का कहना है कि इसे पूरी तरह से 2027 का सेमीफाइनल नहीं कहा जा सकता, क्योंकि स्थानीय निकाय चुनाव के मुद्दे गली, नाली, सफाई, स्ट्रीट लाइट होते हैं और विधानसभा चुनाव के मुद्दे मुख्यमंत्री का चेहरा, कानून-व्यवस्था, राष्ट्रीय नीतियां होते हैं जो कि इससे बिल्कुल अलग होते हैं। उनका कहना है कि इतना जरूर है कि यह चुनाव पंजाब विधानसभा की लगभग 65 से 70 सीटों को प्रभावित करते हैं। इन चुनावों में जो पार्टी जीतेगी उसके कार्यकर्ताओं व नेताओं में विधानसभा चुनाव में उत्साह के साथ काम करेंगे।
Source link

