बठिंडा सेंटर यूनिवर्सिटी में बॉटनी हेड पर छात्रा के आरोप: बोली- गलत नियत से कर रहे प्रताड़ित, विवि की सफाई- मामले जांच कराई गई – Bathinda News

बठिंडा सेंटर यूनिवर्सिटी में बॉटनी हेड पर छात्रा के आरोप:  बोली- गलत नियत से कर रहे प्रताड़ित, विवि की सफाई- मामले जांच कराई गई – Bathinda News




बठिंडा स्थिति सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ पंजाब में एक पीएचडी छात्रा द्वारा अपने गाइड और बॉटनी विभाग के प्रमुख पर गंभीर आरोप लगाने का मामला सामने आया है। हरियाणा की रहने वाली पीड़ित छात्रा का आरोप है कि उसके गाइड पिछले काफी समय से गलत इरादों के साथ उसका मानसिक और प्रशासनिक उत्पीड़न कर रहे हैं। छात्रा ने मीडिया के सामने अपने मोबाइल में रिकॉर्ड की गई कुछ बातचीत भी सार्वजनिक की, जिसके बारे में उसका दावा है कि ये ऑडियो रिकॉर्डिंग आरोपी प्रोफेसर की मंशा को साफ उजागर करती हैं। उधर छात्रा के आरोपों को लेकर विवि प्रशासन ने जवाब दिया। उनका कहना था कि नियमों के तहत कार्रवाई हुई है। ICC जांच में यौन उत्पीड़न के आरोप नहीं मिले, हॉस्टल नोटिस पीएचडी प्रगति और नियमों के आधार पर जारी हुआ। जानिए छात्रा के आरोप के बारे में पीड़ित छात्रा ने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि गाइड ने न केवल यूनिवर्सिटी परिसर में उसे प्रताड़ित किया, बल्कि उसकी छवि खराब करने की भी कोशिश की। छात्रा के अनुसार, आरोपी ने हरियाणा के उस कॉलेज के प्रिंसिपल के माध्यम से उसके गांव में उसके खिलाफ भ्रामक बातें फैलाईं, जहां वह पहले पढ़ाई करती थी। इसके अलावा, आरोपी गाइड ने उसके भाई से संपर्क कर उस पर सेक्स रैकेट में शामिल होने के मनगढ़ंत और झूठे आरोप तक लगाए। छात्रा ने बताया कि उसने इंसाफ के लिए यूनिवर्सिटी प्रशासन से लेकर पंजाब में केंद्र सरकार के मंत्रियों तक को पत्र लिखकर शिकायत सौंपी थी, लेकिन उसे कहीं से राहत नहीं मिली। छात्रा द्वारा दिखाए गए आधिकारिक पत्रों से पंजाब सरकार के प्रशासनिक तंत्र की लाचारी भी उजागर हुई है। शिक्षा विभाग की ओर से भेजे गए एक पत्र में स्पष्ट लिखा गया कि यह मामला केंद्रीय विश्वविद्यालय का होने के कारण उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर है, जिसके चलते वे कार्रवाई करने में असमर्थ हैं। विभागाध्यक्ष ने छात्रा को निर्दोष बताया, पुलिस जांच जारी इस पूरे मामले पर जब बॉटनी विभाग के प्रमुख विनय कुमार से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो पहले उन्होंने फोन कॉल का जवाब नहीं दिया। हालांकि बाद में एक लिखित बयान जारी कर उन्होंने दावा किया कि यूनिवर्सिटी की आंतरिक विभागीय समिति ने छात्रा को इस मामले में निर्दोष करार दे दिया है। दूसरी ओर, बठिंडा पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अपनी जांच और कानूनी पड़ताल जारी रखी है। सेंट्रल यूनिवर्सिटी का जवाब, कहा- नियमों के तहत हुई कार्रवाई मामले की जांच कराई गई: सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ पंजाब (सीयूपीबी) ने शोध छात्रा साक्षी यादव द्वारा लगाए गए मानसिक उत्पीड़न, हॉस्टल से बेदखली और विश्वविद्यालय प्रशासन पर लगाए गए आरोपों को लेकर अपना आधिकारिक पक्ष सार्वजनिक किया है। विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि छात्रा की शिकायत पर नियमानुसार कार्रवाई की गई थी और मामले की जांच आंतरिक शिकायत समिति (ICC) से कराई गई। चरित्र हनन का लगाया था आरोप: विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, वनस्पति विज्ञान विभाग की पीएचडी शोधार्थी साक्षी यादव ने 7 नवंबर 2025 को अपने सुपरवाइजर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. विनय कुमार के खिलाफ मानसिक उत्पीड़न और चरित्र हनन के आरोप लगाते हुए ई-मेल के माध्यम से शिकायत दी थी। शिकायत मिलते ही उसे कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (POSH) अधिनियम के प्रावधानों के तहत जांच के लिए आंतरिक शिकायत समिति (ICC) को भेज दिया गया। लंबे समय से छात्रा अनुपस्थित रही, पीएचडी प्रभावित होने की आशंका: प्रशासन का कहना है कि शिकायत के बाद छात्रा लंबे समय तक विभाग में उपस्थित नहीं हुई, जिससे उसकी पीएचडी प्रभावित होने की आशंका थी। इसी को देखते हुए स्कूल ऑफ बेसिक साइंसेज के डीन ने 11 फरवरी को छात्रा को बुलाकर सुपरवाइजर बदलने, विभाग में लौटने और शोध कार्य जारी रखने की सलाह दी। विश्वविद्यालय की ओर से परीक्षा नियंत्रक कार्यालय ने भी इस संबंध में एडवाइजरी जारी की, लेकिन छात्रा ने उस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। नियमों के तहत हुई कार्रवाई: विश्वविद्यालय के अनुसार, हॉस्टल खाली करने का नोटिस किसी शिकायत के कारण नहीं बल्कि हॉस्टल नियमों के तहत जारी किया गया। नियमों के अनुसार यदि किसी शोधार्थी की तीन माह तक शैक्षणिक प्रगति संतोषजनक नहीं रहती तो उसे हॉस्टल खाली करने का नोटिस दिया जा सकता है। हालांकि छात्रा की ओर से दिए गए अभ्यावेदनों के बाद इस नोटिस पर अस्थायी रोक भी लगा दी गई थी। प्रशासन ने बताया कि 4 मई को हॉस्टल अवकाश संबंधी विषय पर छात्रा से अंतिम बार बातचीत हुई थी, जिसके बाद से उसने विभाग में रिपोर्ट नहीं किया। ICC ने क्या कहा- जांच हैरमेंट के सुबूत नहीं मिले विश्वविद्यालय की आंतरिक शिकायत समिति (ICC) की पीठासीन अधिकारी के अनुसार समिति ने शिकायत, संबंधित पक्षों के बयान और उपलब्ध दस्तावेजों की विस्तृत जांच की। जांच के बाद समिति इस निष्कर्ष पर पहुंची कि शिकायत में यौन उत्पीड़न या यौन आशय (Sexual Intent) का कोई प्रमाण नहीं मिला। इसलिए यह मामला POSH अधिनियम और यूजीसी के संबंधित दिशा-निर्देशों के दायरे में नहीं पाया गया। इसी आधार पर समिति ने मामले को बंद कर दिया। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि उसने पूरे मामले में सभी प्रक्रियाओं का पालन किया है और प्रत्येक कार्रवाई विश्वविद्यालय के नियमों एवं निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप की गई है।



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