12 हजार आबादी वाले नौरू में फुटबॉल को बढ़ावा: दुनिया का एकमात्र देश, जिसने अब तक नहीं खेला इंटरनेशनल टूर्नामेंट; इंग्लैंड कोच ने की शुरूआत
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यारेन12 मिनट पहले
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दुनिया के नक्शे पर छोटा दिखने वाला देश खेल के जरिए नई पहचान बनाने की कोशिश कर रहा है। नौरू 2028 में माइक्रोनेशियन गेम्स की मेजबानी करेगा, जिसमें फुटबॉल भी शामिल है।- प्रतीकात्मक फोटो
वर्ल्ड कप के दौरान दुनिया में फुटबॉल का जुनून हर जगह दिखाई देता है। लेकिन प्रशांत महासागर के बीच बसे 21 वर्ग किलोमीटर के छोटे से देश नौरू में विश्व कप खत्म होते ही फुटबॉल भी जैसे खत्म हो जाता है। इस देश में फुटबॉल सिर्फ टीवी तक सीमित है। करीब 12 हजार आबादी वाले नौरू ने अब तक एक भी अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल मैच नहीं खेला।
पूरे देश में फुटबॉल खेलने के लिए सिर्फ एक सख्त रेत का मैदान है। बच्चे लियोनेल मेसी और क्रिस्टियानो रोनाल्डो की जर्सी पहनते हैं, लेकिन अगर कोई फुटबॉल खेलने की बात करे तो अक्सर उसका मजाक बना दिया जाता है। यहां ऑस्ट्रेलियन रूल्स फुटबॉल सबसे लोकप्रिय है।
हालांकि, तस्वीर धीरे-धीरे बदलने लगी है। ब्रिटेन के पूर्व फुटबॉलर चार्ली पॉमरॉय और उनके साथ जुड़े कुछ वॉलंटियर्स नौरू में फुटबॉल की नई शुरुआत करने में जुटे हैं। उनका सपना फुटबॉल की ऐसी संस्कृति तैयार करना है, जो आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचे।
इस रास्ते की सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ खिलाड़ी नहीं, बल्कि हालात हैं। कभी दुनिया का सबसे अमीर देश माना जाने वाला नौरू फास्फेट खनन पर टिका था। लगातार खनन से द्वीप का बड़ा हिस्सा बंजर और रहने लायक नहीं बचा। खेती लगभग खत्म हो गई। देश को अपने 90% से ज्यादा खाद्य पदार्थ आयात करने पड़ते हैं। इसका असर लोगों की सेहत पर भी पड़ा। यहां करीब 69% आबादी मोटापे की शिकार है।
ऐसे में फुटबॉल सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि बेहतर जीवन की उम्मीद बनकर सामने आया है। वॉलंटियर्स ने 4 से 14 साल के दो हजार बच्चों तक फुटबॉल पहुंचाने का अभियान शुरू किया है। चर्च और स्कूलों की मदद से बच्चों को गेंदें बांटी जा रही हैं। स्थानीय कोच तैयार किए जा रहे हैं, ताकि यह पहल कुछ महीनों की नहीं, बल्कि लंबे समय तक चल सके।
‘मिनी ओलिंपिक’ की मेजबानी भी करेगा नाउरू
नौरू 2028 में माइक्रोनेशियन गेम्स की मेजबानी करेगा, जिसमें फुटबॉल भी शामिल है। इसलिए देश के लिए यह बदलाव और भी अहम हो जाता है। दुनिया के नक्शे पर छोटा दिखने वाला देश खेल के जरिए नई पहचान बनाने की कोशिश कर रहा है। माइक्रोनेशियन गेम्स, जिन्हें ‘माइक्रो गेम्स’ कहा जाता है, प्रशांत महासागर के माइक्रोनेशिया क्षेत्र के देशों के बीच 4 साल में होने वाला इंटरनेशनल मल्टी-स्पोर्ट्स टूर्नामेंट है। इसे इस क्षेत्र का ‘मिनी-ओलिंपिक’ भी माना जाता है।


