पठानकोट के जलालिया दरिया में उफान से सहमे लोग: जलस्तर बढ़ते ही प्रशासन ने बंद किया पठानकोट-बामियाल मार्ग, BSF चौकियों व दर्जनों गांवों का संपर्क प्रभावित – Pathankot News
पठानकोट और जम्मू-कश्मीर में लगातार हो रही बरसात ने सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों की रातों की नींद उड़ा दी है। भारत-पाक सीमा से सटे पठानकोट के अति-संवेदनशील बामियाल सेक्टर में बहने वाला जलालिया दरिया पूरे उफान पर आ गया है। दरिया का पानी विकराल रूप धारण कर खेतों और मुख्य सड़कों पर आ पहुंचा है। खतरे को देखते हुए जिला प्रशासन ने पठानकोट को बामियाल से जोड़ने वाले मुख्य मार्ग को एहतियातन बंद कर दिया है, जिससे सीमावर्ती दर्जनों गांवों का संपर्क शहर से पूरी तरह कट गया है। इस बारिश से जहां दर्जनों सीमावर्ती गावों का शहर से संपर्क टूट गया है, वहीं, सीमा सुरक्षा बल की चौकियों का संपर्क भी प्रभावित हुआ है। फसलों के साथ-साथ ट्यूबवेल, मोटरें और महंगे सोलर सिस्टम डूबने की कगार पर हैं। जिससे किसान भी भारी परेशानी में हैं। लोगों का कहना है कि पिछले साल अगस्त में बाढ़ का प्रकोप झेलना पड़ा था। लेकिन, इस बार जुलाई में ही जलालिया दरिया का रौद्र रूप देख उनकी नींद उड़ गई है। फसलों और मवेशियों पर फिर मंडराया संकट
जलालिया दरिया का पानी अब सीधा खेतों में घुस रहा है, जिससे सैकड़ों एकड़ में खड़ी धान और अन्य फसलें जलमग्न हो गई हैं। किसानों ने आशंका जताई है कि:
घरों में पानी घुसने का डर: जलस्तर यदि ऐसे ही बढ़ता रहा तो दरिया का पानी सीधे रिहायशी मकानों में घुस जाएगा।
लाखों के कृषि उपकरण स्वाहा: पिछले साल बाढ़ में किसानों के ट्यूबवेल, पानी की मोटरें और महंगे सोलर पैनल पूरी तरह तबाह हो गए थे। इस बार भी खेतों में लगे सोलर सिस्टम और मोटरें पानी में डूब चुकी हैं, जिससे उनके फिर से सड़ने या जलने की पूरी संभावना है। 1 साल में 60 फीट की पुली न बनना प्रशासनिक नाकामी पहली बारिश ने सरकार के मानसून पूर्व तैयारियों के तमाम दावों को ध्वस्त कर दिया है। बामियाल को जोड़ने वाले मार्ग पर स्थित 60 फीट की मुख्य पुली, जो पिछले साल बाढ़ के तेज बहाव में पूरी तरह बह गई थी, पूरा एक साल बीत जाने के बाद भी मुकम्मल नहीं हो सकी।
पक्की पुली न बनने के कारण वैकल्पिक रास्ता पहली ही बारिश के पानी में बह गया। स्थानीय निवासियों तरसेम लाल, सरजूद्दीन, आकाश और दिलावर सिंह का कहना है कि सरकारें केवल कागजों में विकास का ढिंढोरा पीट रही हैं, जबकि धरातल पर 60 फीट का एक अदद ढांचा तक खड़ा करने में शासन-प्रशासन नाकाम साबित हुआ है। स्थानीय लोगों का फूटा गुस्सा: दावे विकास के, हकीकत विनाश की दरिया के किनारे खड़े बेबस और आक्रोशित ग्रामीणों ने सरकार व स्थानीय प्रतिनिधियों को आड़े हाथों लिया। सरजूद्दीन और तरसेम ने कहा कि पिछले साल भी इसी समय बाढ़ की तबाही शुरू हुई थी और आज पहली ही बड़ी बारिश ने फिर वही हालात पैदा कर दिए हैं। मंत्री विकास की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, लेकिन असलियत जनता के सामने तैर रही है। महज 60 फीट की एक छोटी सी पुली को बनने में पूरा एक साल बीत गया, फिर भी काम अधूरा पड़ा है। जब सरकार एक साल में 60 फीट की पुली नहीं बना सकी, तो वे किस विकास की बात करते हैं?
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