मोहाली के बिल्डर पर कोर्ट की कार्रवाई: रीसेल खरीदार को 1.65 लाख रुपये ब्याज समेत लौटाने के आदेश, ईडीसी के नाम से वसूले पैसे – Mohali News
मोहाली जिला कंज्यूमर कोर्ट ने एटीएस एस्टेट्स प्राइवेट लिमिटेड (ATS Estates Pvt. Ltd.) को खरीदार से अतिरिक्त राशि वसूलकर अपने पास रखने का दोषी ठहराया है। आयोग ने बिल्डर को 1,65,943 रुपये 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित लौटाने और मानसिक प्रताड़ना व मुकदमे
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रीसेल में खरीदा था प्लॉट, बाद में खुली गड़बड़ी
शिकायतकर्ता ने 13 अक्टूबर 2021 को डेराबस्सी स्थित एटीएस गोल्फ मीडोज-2 में 350 वर्ग गज का प्लॉट नंबर-57 मूल अलॉटी से खरीदा था। मूल अलॉटी ने एक्सटर्नल डेवलपमेंट चार्ज (ईडीसी) के रूप में 1,250 रुपये प्रति वर्ग गज की दर से कुल 4.37 लाख रुपये बिल्डर को जमा कराए थे।
बाद में जब मकान का नक्शा पास कराने की प्रक्रिया शुरू की, तो नगर परिषद ने उनसे 2.42 लाख रुपये सीधे जमा कराने को कहा। यह राशि बिल्डर ने बाद में वापस कर दी, लेकिन जांच में सामने आया कि नगर परिषद के नियमों के अनुसार ईडीसी केवल 742 रुपये प्रति वर्ग गज बनता था।
बिल्डर ने प्रति वर्ग गज 508 रुपये ज्यादा वसूले
शिकायतकर्ताओं ने हिसाब लगाया तो पाया कि बिल्डर ने मूल अलॉटी से प्रति वर्ग गज 508 रुपये अतिरिक्त वसूले थे। इस तरह कुल 1,65,943 रुपये अतिरिक्त राशि वर्षों तक अपने पास रखी गई। कई बार मांग और कानूनी नोटिस भेजने के बावजूद रकम वापस नहीं की गई, जिसके बाद मामला उपभोक्ता आयोग पहुंचा।
कोर्ट ने बिल्डर की सभी दलीलें खारिज कीं
सुनवाई के दौरान एटीएस की ओर से कहा गया कि शिकायतकर्ता सीधे कंपनी के ग्राहक नहीं हैं क्योंकि उन्होंने प्लॉट रीसेल में खरीदा है। आयोग ने यह दलील खारिज करते हुए कहा कि रजिस्ट्री होने के बाद शिकायतकर्ता मूल अलॉटी के सभी अधिकारों के उत्तराधिकारी बन जाते हैं।
बिल्डर ने यह भी तर्क दिया कि मामला नगर परिषद के शुल्क से जुड़ा है, इसलिए परिषद को पक्षकार बनाया जाना चाहिए था। आयोग ने कहा कि विवाद नगर परिषद द्वारा वसूले गए शुल्क का नहीं, बल्कि बिल्डर द्वारा अतिरिक्त राशि लेकर उसे अपने पास रखने का है, जो सेवा में कमी और अनुचित व्यापारिक व्यवहार की श्रेणी में आता है।
30 दिन में भुगतान नहीं किया तो बढ़ेगा ब्याज
आयोग ने बिल्डर को आदेश दिया कि वह शिकायतकर्ताओं को 1,65,943 रुपये 24 जून 2022 से 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित लौटाए। आदेश की प्रति मिलने के 30 दिनों के भीतर भुगतान करना होगा। निर्धारित अवधि में राशि नहीं लौटाने पर ब्याज दर बढ़ाकर 12 प्रतिशत वार्षिक कर दी जाएगी। इसके अलावा मानसिक प्रताड़ना और मुकदमे के खर्च के लिए 20 हजार रुपये भी अदा करने होंगे।

