लुधियाना में मजदूरी मांगने गए मजदूरों को सरपंच ने पीटा: लोहे की रॉड से पैर तोड़ा,AAP सरपंच बोला ये राजनीतिक साजिश,शराबी खुद गिरकर हुए घायल – Ludhiana News

लुधियाना में मजदूरी मांगने गए मजदूरों को सरपंच ने पीटा:  लोहे की रॉड से पैर तोड़ा,AAP सरपंच बोला ये राजनीतिक साजिश,शराबी खुद गिरकर हुए घायल – Ludhiana News




लुधियाना के गांव हुसैनपुरा में सफाई कर्मियों (मजदूरों) और मौजूदा आम आदमी पार्टी (AAP) के सरपंच मनमोहन सिंह के बीच विवाद ने हिंसक रूप ले लिया है। एक तरफ जहां सिविल अस्पताल के बेड पर दर्द से कराहते मजदूर लोहे की रॉड से पीटकर टांग तोड़ने का आरोप लगा रहे हैं, वहीं सरपंच ने इसे विरोधियों की रची हुई एक गंदी राजनीतिक साजिश करार दिया है। मजदूरों का दर्द- पैसे मांगे तो रॉड से पीटकर टांग तोड़ दी सिविल अस्पताल में भर्ती घायल जुगविंदर सिंह और उनके भाई परमजीत सिंह ने आरोप लगाए हैं ,वे पिछले काफी समय से सरपंच के कहने पर गांव की नालियों, पार्कों और प्लॉटों की सफाई कर रहे थे। पीड़ितों का दावा है कि रात करीब 8:30 बजे वे अपनी मेहनत की गाढ़ी कमाई (बकाया मजदूरी) मांगने सरपंच मनमोहन सिंह के घर गए थे। आरोप है कि सरपंच ने उन्हें बाहर से अंदर बुलाया और बिना कोई बात सुने लोहे की रॉड से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। जुगविंदर को इतनी बुरी तरह पीटा गया कि उसके पैर की हड्डी टूट गई। मुंह बंद रखने के लिए 5 हजार का ऑफर: पीड़ित परिवार का आरोप है कि अगली ही सुबह मामले को रफा-दफा करने के लिए सरपंच ने एक पंचायत सदस्य (प्रधान) को अस्पताल भेजा। उसने इलाज के नाम पर 5,000 रुपये देने की पेशकश की और मामले को खत्म करने का दबाव बनाया। पीड़ितों ने पैसे ठुकरा दिए हैं और पुलिस प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है। सरपंच का पलटवार-ये शराबी और चोर हैं, मेरी छवि खराब करने का प्रयास दूसरी तरफ विवादों के घेरे में आए AAP सरपंच मनमोहन सिंह ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे एक बड़ा सियासी ड्रामा बताया है। सरपंच ने अपने बचाव में 4 बड़े खुलासे किए: * शराबी और चोर होने का आरोप: सरपंच का दावा है कि आरोप लगाने वाले चारों व्यक्ति (जग्गू, पम्मा, सुच्चा और मिट्ठू) आदतन शराबी हैं। इनका मुख्य काम गांव में शराब पीकर हंगामा करना और पंचायत का लोहे का सामान चुराकर कबाड़ में बेचना है।
* हादसे को दिया हमले का नाम: सरपंच के मुताबिक, गांव में 70 साल बाद सीवरेज डालने का ऐतिहासिक काम चल रहा है, जिसके कारण बारिश से सड़कों पर कीचड़ था। रात के समय ये लोग शराब के नशे में धुत होकर वहां से गुजर रहे थे और संतुलन बिगड़ने पर कीचड़ में गिरकर खुद ही घायल हो गए।
* चुनाव ड्यूटी में भी किया था बवाल: सरपंच ने बताया कि घटना वाले दिन गांव के स्कूल में वोटिंग/BLO का काम चल रहा था। वहां भी इन लोगों ने शराब के नशे में गालियां दीं, जिसके बाद सरपंच ने खुद उन्हें वहां से खदेड़ा था।
* विरोधियों की बौखलाहट: सरपंच का स्पष्ट कहना है कि गांव में हो रहे विकास कार्यों (सीवरेज) से विरोधी पार्टियां घबरा गई हैं। यह मारपीट के झूठे आरोप केवल विकास को रोकने और सरपंच की छवि खराब करने के लिए रची गई एक चाल है। मेडिकल रिपोर्ट खोलेगी राज इस हाई-प्रोफाइल विवाद में दोनों पक्षों के अपने-अपने दावों ने मामले को पूरी तरह से उलझा दिया है। जहां पीड़ित न्याय के लिए पुलिस से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, वहीं सरपंच इसे पूरी तरह से एक राजनीतिक स्टंट बता रहे हैं। अब पुलिस जांच और मेडिकल रिपोर्ट ही यह साफ कर पाएगी कि आखिर उस रात का असली सच क्या है क्या वाकई रॉड से हमला हुआ था, या यह सिर्फ नशे में गिरने से लगी चोट है जिसे सियासी रंग दिया जा रहा है?



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