बिना क्लियरेंस गलाडा ने लगाया 21 करोड़ का टेंडर; 6 माह में 500 मीटर ही बनी सड़क – Ludhiana News
लोहारा रोड से मालेरकोटला रोड को जोड़ने वाले महत्वाकांक्षी मिसिंग लिंक-3 प्रोजेक्ट का काम ग्रेटर लुधियाना एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (गलाडा) के अधिकारियों की घोर लापरवाही के कारण बीच में लटक गया है। गलाडा ने पिछले 10 साल की लंबी तैयारी के बाद दिसंबर 2025 में इस प्रोजेक्ट का डिजाइन तैयार कर कबीर इंफ्रा कंपनी को 23 करोड़ रुपए का टेंडर जारी किया था। हैरानी की बात यह है कि अफसरों को इस रूट पर आ रही रुकावटों की पूरी जानकारी थी, लेकिन इसके बावजूद बिना जमीन क्लियर कराए ठेकेदार को काम सौंप दिया गया। नतीजा यह है कि वर्तमान में निर्माण कार्य की गति बेहद धीमी है। कभी कर्मचारी काम करने आते हैं, तो कभी हफ्तों गायब रहते हैं। इसी के चलते 1650 मीटर लंबे इस प्रोजेक्ट में से महज 500 मीटर सड़क का निर्माण पूरा हो पाया है, जबकि प्रोजेक्ट पूरा होने की डेडलाइन दिसंबर 2026 है, लेकिन बीते 6 महीने में तो 30 फीसदी के करीब ही काम हो पाया है। अब एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं अधिकारी डेढ़ किलोमीटर क्षेत्र जहां दो बड़ी रुकावटें: लोहारा की ओर सड़क के प्रस्तावित नक्शे के बीच में 3 से 4 पक्के व्यावसायिक/आवासीय भवन आ रहे हैं। मलेरकोटला रोड की ओर यहां पंचायत जमीन पर करीब 50 घर बने हुए हैं। इन परिवारों का दावा है, वे देश के विभाजन (1947) के समय से यहीं पर बसे हुए हैं। गलाडा ने इन रूकावटों को दूर किए बिना ही यहां प्रोजेक्ट शुरू करने का काम अलॉट कर दिया। अगर 1650 मीटर की सड़क पूरे शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को बदल सकती है। इस मिसिंग लिंक के चालू होते ही गिल रोड से मलेरकोटला जाने वाला सारा भारी और सामान्य ट्रैफिक इस नए बाईपास रूट पर शिफ्ट हो जाएगा। इससे गिल नहर और उसके आसपास लगने वाले भीषण ट्रैफिक जाम से शहरवासियों को हमेशा के लिए निजात मिल जाएगी। 10 साल की तैयारी के बाद भी दिसंबर की डेडलाइन फेल होना तय इलाका निवासी बोले-पीछे नहीं हटेंगे: हमें मौजूदा सरपंच या किसी अधिकारी ने कोई नई जगह नहीं दी है। हम साल 1947 से यानी अपनी तीन पीढ़ियों से यहीं रह रहे हैं। हम अपना घर-बार छोड़कर कहीं नहीं जाएंगे। सरकार को अगर सड़क बनानी है तो पहले हमें रहने के लिए पक्के मकान बनाकर दे, वरना हम पीछे नहीं हटेंगे।
Source link

