हाईकोर्ट बोला-गर्भावस्था में नौकरी से हटाना गलत: साइंस टीचर को बहाल करने के निर्देश; मजबूरी में मेडिकल कारणों से छुट्टी मांगी – Chandigarh News

हाईकोर्ट बोला-गर्भावस्था में नौकरी से हटाना गलत:  साइंस टीचर को बहाल करने के निर्देश; मजबूरी में मेडिकल कारणों से छुट्टी मांगी – Chandigarh News




पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने गर्भावस्था के दौरान मेडिकल कारणों से छुट्टी लेने पर नौकरी से हटाई गई संविदा टीजीटी (साइंस) टीचर को बड़ी राहत दी है। अदालत ने हरियाणा सरकार को आदेश दिया है कि 4 सप्ताह के भीतर शिक्षिका को नया नियुक्ति पत्र जारी किया जाए और उसके बाद 2 सप्ताह के भीतर उन्हें दोबारा नौकरी पर जॉइन कराया जाए। महिला टीचर हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के एक स्कूल में तैनात हैं। यह अंतरिम आदेश जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने महिला शिक्षिका की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। शिक्षिका ने 16 मार्च, 2026 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत उनकी संविदा नियुक्ति समाप्त कर दी गई थी। हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले की सुनवाई 28 जनवरी 2027 को होगी। याचिका में ये रखी मांग याचिका में शिक्षिका ने अपनी सेवाएं बहाल करने, संविदा अवधि बढ़ाने, मातृत्व अवकाश का वेतन, मेडिकल बोनस, अन्य वित्तीय लाभ, ब्याज और मानसिक व शारीरिक परेशानी के लिए मुआवजा देने की मांग की है। याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर वकील विकास चतरथ ने अदालत को बताया कि शिक्षिका की नियुक्ति 16 मार्च 2024 को हरियाणा कौशल रोजगार निगम (एचकेआरएनएल) के माध्यम से सरकारी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, चांदपुर में टीजीटी (साइंस) के पद पर हुई थी। डॉक्टरों ने 9 महीने बेड रेस्ट की सलाह दी याचिका के अनुसार नौकरी के दौरान शिक्षिका को गर्भावस्था से जुड़ी मेडिकल दिक्कतें हुईं। डॉक्टरों ने उन्हें 9 महीने तक पूरी तरह बेड रेस्ट की सलाह दी थी। इसके बाद उन्होंने 9 अक्टूबर 2025 को मेडिकल अवकाश के लिए आवेदन किया, लेकिन इस पर कोई फैसला लेने के बजाय 16 मार्च 2026 को उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं। बाद में 15 अप्रैल 2026 को उन्होंने एक बच्चे को जन्म दिया। अन्य संविदा टीजीटी शिक्षकों की सेवा अवधि बढ़ाई अदालत को यह भी बताया गया कि उसी पद पर कार्यरत अन्य संविदा टीजीटी शिक्षकों की सेवाओं की अवधि बढ़ा दी गई थी, जबकि केवल याचिकाकर्ता को नौकरी से हटा दिया गया। शिक्षिका ने अदालत से कहा कि वह उस अवधि का वेतन नहीं चाहतीं, जब वह ड्यूटी पर नहीं थीं। अब वह पूरी तरह स्वस्थ हैं और दोबारा सेवा देने के लिए तैयार हैं। याचिकाकर्ता ने यह भी दलील दी कि नियमित कर्मचारियों को मातृत्व अवकाश का लाभ मिलता है और उनके मेडिकल रिकॉर्ड भी यह साबित करते हैं कि उन्होंने वास्तविक मेडिकल कारणों से छुट्टी मांगी थी। मजबूरी में मेडिकल कारणों से छुट्टी मांगी हाईकोर्ट ने कहा कि पहली नजर में यह साफ है कि शिक्षिका ने मजबूरी में मेडिकल कारणों से छुट्टी मांगी थी और बाद में उन्होंने बच्चे को जन्म दिया। अदालत ने यह भी कहा कि दूसरे संविदा टीजीटी शिक्षकों की नौकरी बढ़ा दी गई, लेकिन सिर्फ मेडिकल छुट्टी लेने वाली शिक्षिका की सेवा खत्म कर दी गई।



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