पठानकोट अदालत में वकीलों की हड़ताल खत्म: बार एसोसिएशन ने ‘फुल हाउस’ बैठक में लिया फैसला, SSP से मिला गहन जांच का भरोसा – Pathankot News
एडवोकेट ज्योति पाल भीम पर दर्ज किए गए मामले के नाराज होकर शुरू की गई बार एसोसिएशन पठानकोट की हड़ताल पोस्टपोन हो गई है। पठानकोट बार एसोसिएशन ने सोमवार को ‘फुल हाउस’ बैठक का आयोजन किया, जिसमें बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं ने भाग लिया। इस दौरान हड़ताल को फिल्हाल पोस्टपोन करने का निर्णय लिया गया। जिसके बाद वकीलों के एक प्रतिनिधिमंडल की ओर से एसएसपी पठानकोट दलजिंदर सिंह ढिल्लों से मुलाकात की गई। इस दौरान बार एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने उक्त केस के बारे में जानकारी दी और मामले की गहन जांच की मांग की। एडवोकेट ज्योति पाल भीम ने कहा कि उन्हें एसएसपी से आश्वासन मिला है कि मामले की जांच कर तह तक जाया जाएगा। जिसके बाद हड़ताल को फिल्हाल के लिए टाल दिया गया है। प्रतिनिधियों ने एसएसपी पर पूरा भरोसा जताया
बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए बार एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने एसएसपी पर पूरा भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि एसएसपी एक अनुभवी और समझदार अधिकारी हैं, और उन्हें उम्मीद है कि वह वकीलों की बात को गंभीरता से सुनकर उचित कार्रवाई करेंगे।
प्रतिनिधियों ने कहा कि किसी भी आपराधिक मामले में केवल अदालत में पैरवी करने, जमानत का विरोध करने या उसकी पैरवी करने वाले अधिवक्ताओं के नाम अनावश्यक रूप से एफआईआर या पुलिस मामलों में शामिल न किए जाएं। उनका तर्क है कि अधिवक्ता अपने पेशेवर दायित्वों का निर्वहन करते हैं, और केवल अदालत में पक्ष रखने के आधार पर उनके खिलाफ कार्रवाई उचित नहीं है।
सामान्य तौर पर जारी रहेगा कोर्ट का काम
बार एसोसिएशन ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल अदालतों का कार्य सामान्य रूप से जारी रहेगा और किसी प्रकार का कार्य बहिष्कार नहीं किया जाएगा। एसोसिएशन की अगली बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें प्रशासन के रुख और वार्ता के परिणामों के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी। अधिवक्ताओं ने उम्मीद जताई कि प्रशासन इस मुद्दे पर सकारात्मक पहल करेगा और समस्या का शीघ्र समाधान होगा।
स्वतंत्र ढंग से अपना काम नहीं कर सकेंगे वकील
एडवोकेट ज्योति पाल भीम ने कहा कि पुलिस की यह कार्रवाई बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। जिस केस में उन्हें फंसाने की कोशिश की जा रही है। उसमें एक युवक ने आत्महत्या की है। उक्त युवक पर किसी महिला से अश्लील हरकतें करने का आरोप था। उसे अदालत ने जमानत नहीं दी तो उसने आत्महत्या कर ली और उलटा पीड़ित पक्ष के साथ उन पर भी प्रताड़ित करने के झूठे आरोप लगा दिए। वहीं, पुलिस ने मामले की तह तक जाने की बताए उनपर मामला दर्ज कर दिया। ज्योतिपाल ने कहा कि जब अपराधियों के खिलाफ केस लड़ने पर वकीलों को ही संगीन केसों में फंसा दिया जाएगा, तो कोई भी वकील स्वतंत्र ढंग से अपना काम नहीं कर सकेगा। उन्होंने मांग की कि पुलिस इस मामले में दोबारा से निष्पक्ष जांच करे और दर्ज केस को तुरंत वापस लिया जाए।
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