कनाडा में पंजाबी युवक का रिकार्ड खंगाला तो निकला गैंगस्टर: रैश ड्राइविंग करने पर पुलिस ने रोका, तलाशी लेने पर मिली गन व ड्रग्स; ‘फॉर ब्रदर्स’ गैंग से कनेक्शन – Ludhiana News
कनाडा के एडमॉन्टन शहर में पुलिस ने जब तेज और खतरनाक तरीके से जा रही एक कार को रोका। कार की तलाशी ली तो उसमें गए गन व भारी मात्रा में ड्रग मिला और उसे गिरफ्तार कर लिया। सफलदीप सिंह व उसके दो दोस्तों संदीप सिंह व दिव्यांशु समेत गिरफ्तार किया। ये दोनों भी सफलदीप सिंह के साथ कार में सवार थे। आरोपियों को कोर्ट से जमानत मिली। उसके बाद पुलिस ने सफलदीप सिंह का रिकार्ड खंगाला तो वो वह पंजाबी मूल का गैंगस्टर निकला जो कि पहले से वांटेड था। पुलिस ने सफलदीप सिंह को फिर से गिरफ्तार लिया है। सफलदीप सिंह के लिंक कनाडा में सक्रिय फॉर ब्रदर्स गैंग से हैं। पूछताछ में पता चला है कि वह भारतीय मूल खासकर पंजाबी मूल के कारोबारियों को डराकर उनसे पैसे वसूलता है। पंजाब से कनाडा में गैंगस्टर बनने और पकड़े जाने तक की कहानी, जानिए.. पढ़ाई के बहाने कनाडा पहुंचा, गैंगस्टर बन गया: कनाड़ा पुलिस के अनुसार सफलदीप सिंह और उसके साथी पढ़ाई करने और अच्छा भविष्य बनाने के सपने लेकर पंजाब से कनाडा गए थे। लेकिन वहां जाकर कम समय में अमीर बनने और ऐश-आराम की जिंदगी जीने की चाहत में उन्होंने गलत रास्ता चुन लिया। सफलदीप वहां के बड़े आपराधिक नेटवर्क ‘फॉर ब्रदर्स’ गैंग के लोगों से जुड़ गया और धीरे-धीरे उनके लिए काम करने लगा। भारतीय कारोबारियों से रंगदारी मांगना: गैंग में शामिल होने के बाद सफलदीप को कनाडा और अमेरिका में रह रहे अमीर भारतीय और पंजाबी बिजनेसमैन, बिल्डर्स और दुकानदारों को डराने-धमकाने का काम मिला। यह गैंग कारोबारियों के घरों और दुकानों पर गोलियां चलवाता था और फिर व्हाट्सएप पर कॉल या मैसेज करके लाखों डॉलर्स की रंगदारी मांगता था। मर्डर की प्लानिंग: कनाडा के ओंटारियो इलाके में रंगदारी न देने पर सफलदीप और उसके गैंग ने एक बड़े कारोबारी के मर्डर की पूरी प्लानिंग कर ली थी। ओंटारियो पुलिस को जब इसकी खबर लगी, तो उन्होंने सफलदीप के खिलाफ केस दर्ज किया। पुलिस से बचने के लिए सफलदीप वहां से भाग निकला और छिप गया, जिसके बाद पूरे कनाडा की पुलिस को उसे पकड़ने का अलर्ट जारी किया गया। गाड़ियों का अवैध धंधा शुरू किया: ओंटारियो से भागकर सफलदीप ने एडमॉन्टन शहर में अपना नया ठिकाना बनाया। यहां वह अपनी पहचान छिपाकर रहने लगा और साथ ही चोरी की गाड़ियों का धंधा शुरू कर दिया। इस धंधे में वे चोरी की लग्जरी गाड़ियों के इंजन और चेसिस नंबर बदलकर उन्हें नया नंबर दे देते थे और फिर इन गाड़ियों का इस्तेमाल रंगदारी और अपराध के कामों में करते थे। रैश ड्राइविंग ने फंसाया: 4 मई, 2026 को सफ़लदीप अपने दो साथियों संदीप सिंह और दिव्यांशु के साथ एक कार में जा रहा था। एडमॉन्टन की सड़क पर वे बहुत तेज और लापरवाही से गाड़ी चला रहे थे। वहां गश्त कर रही पुलिस की नजर उन पर पड़ी। पुलिस ने सिर्फ ट्रैफिक नियम तोड़ने के शक में कार को रुकवाया, लेकिन जब तलाशी ली तो कार के अंदर से ड्रग्स और एक भरी हुई अवैध गन बरामद हुई। जमानत मिलने के बाद दोबारा गिरफ्तारी: पहली बार पकड़े जाने के बाद तीनों को आर्म्स एक्ट और ड्रग्स के केस में जेल भेजा गया, लेकिन कोर्ट से उन्हें अस्थायी जमानत मिल गई। हालांकि, पुलिस की खुफिया टीम लगातार सफलदीप पर नजर रखे हुए थी। पुलिस ने मई और जून के महीने में उसके घर पर दो बार छापेमारी की, जहां से चोरी की गाड़ियों के नंबर बदलने के पुख्ता सबूत मिले। अब पुलिस ने उसे दोबारा गिरफ्तार कर लिया। जब पुलिस रिकॉर्ड खंगाला गया, तो पता चला कि यह वही मोस्ट वांटेड सफलदीप है जिसकी तलाश दूसरी जगह की पुलिस को भी थी। अब उसे ओंटारियो पुलिस के हवाले कर दिया गया है। कनाडा पुलिस ने बिछाया गैंगस्टरों को पकड़ने के लिए जाल एडमॉन्टन पुलिस स्टाफ सार्जेंट एरिक स्टीवर्ट का कहना है कि हम काफी समय से कनाडा में चल रहे इस रंगदारी गैंग और इसके नेटवर्क की जांच कर रहे हैं। हमने अलग-अलग राज्यों की पुलिस के साथ मिलकर एक ऐसा सिस्टम बनाया है जिससे अपराधियों की जानकारी तुरंत एक-दूसरे को मिल सके। इस मामले में बॉर्डर एजेंसी और पील पुलिस की मदद से हम देश के दूसरे कोने में छिपे इस खतरनाक अपराधी को पकड़ने में कामयाब रहे। पील पुलिस के डिप्टी चीफ निक मिलिनोविच का कहना है कि रंगदारी और डराने-धमकाने की घटनाओं ने हमारे पंजाबी और भारतीय समुदाय के परिवारों और बिजनेस करने वाले लोगों में एक डर का माहौल बना दिया था। ऐसे गैंग्स को खत्म करने के लिए पुलिस का मिलकर काम करना बहुत जरूरी है। सफलदीप की गिरफ्तारी यह दिखाती है कि जब पुलिस टीमें मिलकर काम करती हैं, तो अपराधियों का बचना मुश्किल होता है। हम समाज को डराने वालों को बिल्कुल नहीं बख्शेंगे।
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