पंजाब के स्टूडेंट्स को इनोवेटिव बनाएगा ‘रफ्तार’: 425 स्कूलों में होगी AI और रोबोटिक्स की पढ़ाई, तैयार होगा इनोवेशन इकोसिस्टम – Ludhiana News

पंजाब के स्टूडेंट्स को इनोवेटिव बनाएगा ‘रफ्तार’:  425 स्कूलों में होगी AI और रोबोटिक्स की पढ़ाई, तैयार होगा इनोवेशन इकोसिस्टम – Ludhiana News




पंजाब के गवर्नमेंट स्कूलों में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स को इनोवेटिव बनाने के लिए “मिशन रफ्तार” (रोबोटिक्स एंड एआई फ्रेमवर्क फॉर टीचर्स एडवांसमेंट एंड एकेडेमिया रेडीनेस) शुरू किया जा रहा है। पंजाब के 425 स्कूलों में इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया जा रहा है। इसमें राज्य में चल रहे 356 पीएम श्री स्कूल और 69 सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल शामिल हैं। इस प्रोजेक्ट के तहत स्टूडेंट्स को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), रोबोटिक्स, फिजिकल कंप्यूटिंग और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) की पढ़ाई करवाई जाएगी। एजुकेशन डिपार्टमेंट ने स्कूलों की सूची संबंधित जिला शिक्षा अधिकारियों को भेज दी है। डीजीएसई अरविंदर कुमार एमके ने मिशन रफ्तार को लागू करने के लिए आवश्यक दिशा निर्देश स्कूल प्रिंसिपल्स व टीचर्स को जारी कर दिए हैं। मिशन रफ्तार क्या है, सिलसिलेवार जानिए जानिए… स्टूडेंट्स को मिशन रफ्तार से होंगे ये फायदे, जानिए… स्कूलों को मिलेगी एआई किट्स इस मिशन को जमीन पर उतारने के लिए प्रैक्टिकल पर सबसे ज्यादा जोर रहेगा। इसके लिए पंजाब सरकार बहुत जल्द सभी 425 स्कूलों को एक विशेष बजट (फंड) भेजने वाली है। इस पैसे का इस्तेमाल स्कूल अपने स्तर पर ‘एआई और रोबोटिक्स किट्स’ खरीदने के लिए करेंगे। सरकारी आदेश में साफ कहा गया है कि स्कूल के प्रिंसिपल्स को जैसे ही पैसा मिले, वे बिना देरी किए अच्छी क्वालिटी की किट्स खरीदकर स्कूल में लगवाएं, ताकि स्टूडेंट्स का प्रैक्टिकल काम समय पर शुरू हो सके। टीचर्स और अफसरों की जिम्मेदारी तय मिशन को समय पर पूरा करने और इसके अच्छे नतीजे (रिजल्ट-ओरिएंटेड) हासिल करने के लिए शिक्षा विभाग ने कड़े नियम बनाए है। हर जिले के जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) इस पूरे काम के जिम्मेदार होंगे। वे अपने जिले में से एक बेहतरीन कंप्यूटर टीचर को जिला नोडल अधिकारी (डीएनओ) बनाएंगे, जो सीधे राज्य के हेड ऑफिस को अपनी रिपोर्ट देगा। इस मिशन को पूरी गंभीरता से चलाने के लिए सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। नए आदेश के मुताबिक, इन 425 स्कूलों में तैनात कंप्यूटर टीचर्स को चुनाव या अन्य किसी भी गैर-शैक्षणिक काम्में नहीं लगाया जाएगा, ताकि वे अपना पूरा समय सिर्फ स्टूडेंट्स को नई तकनीक सिखाने में लगा सकें। हर महीने जिले और राज्य के स्तर पर इस काम की जांच की जाएगी कि कितने स्टूडेंट्स ने भाग लिया, उन्होंने क्या नया बनाया और स्कूलों के क्लब कितने एक्टिव रहे।



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