हाई कोर्ट के जस्टिस महाबीर सिंधु का निधन: मेदांता अस्पताल में ली अंतिम सांस; आज शाम को पैतृक गांव में होगा अंतिम संस्कार – Chandigarh News
पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट के सिटिंग जज जस्टिस महाबीर सिंह सिंधु का रविवार सुबह निधन हो गया। वह 59 वर्ष के थे और पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। हाई कोर्ट प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार उन्होंने गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल में सुबह 2 बजकर 50 मिनट पर अंतिम सांस ली। जस्टिस सिंधु के निधन की खबर से न्यायिक जगत और वकीलों में शोक की लहर दौड़ गई है। उनका अंतिम संस्कार आज (रविवार) शाम 5 बजे उनके पैतृक गांव मसूदपुर जिला हांसी हरियाणा में किया जाएगा। हांसी के गांव से हाई कोर्ट के जज बनने तक का सफर जस्टिस महाबीर सिंह सिंधु का जन्म 4 अप्रैल 1967 को हरियाणा के हांसी के गांव मसूदपुर में हुआ था। वह अपने परिवार में प्रथम पीढ़ी के अधिवक्ता (फर्स्ट जनरेशन लॉयर) थे। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव के सरकारी हाई स्कूल से प्राप्त की। इसके बाद वर्ष 1992 में पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ से एलएलबी की डिग्री हासिल की। इसी वर्ष उन्होंने बार काउंसिल में अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण कराया और पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में दीवानी, आपराधिक और संवैधानिक मामलों की प्रैक्टिस शुरू की। कई सरकारों में निभाई अहम जिम्मेदारियां
जस्टिस महाबीर सिंह सिंधु का कानूनी और प्रशासनिक करियर बेहद समृद्ध रहा। उन्होंने अपने लंबे पेशेवर जीवन में कई महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दीं। 1999: अतिरिक्त केंद्रीय सरकारी स्थायी अधिवक्ता नियुक्त हुए। 2000: केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के अतिरिक्त सरकारी वकील (Additional Government Pleader) बने। 2004 से 2008: हरियाणा सरकार के उप महाधिवक्ता (Deputy Advocate General) के रूप में कार्य किया। 2008 से 2009: पंजाब सरकार के अतिरिक्त महाधिवक्ता (Additional Advocate General) रहे। 2009 से 2013: दोबारा हरियाणा सरकार के अतिरिक्त महाधिवक्ता के रूप में जिम्मेदारी संभाली। 2017 में बने हाई कोर्ट के जज, 2018 में हुए स्थायी नियुक्त अपने लंबे कानूनी अनुभव और उत्कृष्ट कार्यशैली के आधार पर 10 जुलाई 2017 को उन्हें पंजाब एवं हरियाणा हाई Court का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। इसके बाद 3 दिसंबर 2018 को उन्होंने स्थायी न्यायाधीश के रूप में शपथ ग्रहण की। अपने न्यायिक कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण संवैधानिक, आपराधिक और जनहित से जुड़े मामलों में अहम फैसले सुनाए। वह न्यायिक दायित्वों के अलावा दिव्यांगजन अधिकारों और रेड क्रॉस जैसी सामाजिक एवं कानूनी समितियों से भी जुड़े रहे।
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