वेबसाइट का दावा- पुलिस ने रामपाल को फंसाया था: सतलोक आश्रम ने पहली बार जारी की सफाई; करौंथा और बरवाला कांड के बारे में लिखा – Hisar News
नवंबर 2014 में रामपाल की गिरफ्तारी के समय हुई हिंसा के बाद काफी संख्या में समर्थक-अनुयायी आश्रम के बाहर जुट गए थे। इनसेट में रामपाल की फाइल फोटो।
हरियाणा के हिसार की सेंट्रल जेल से 11 साल, 4 महीने और 24 दिन जेल में काटने के बाद जमानत पर बाहर आए सतलोक आश्रम के प्रमुख रामपाल महाराज के संगठन ने हत्या और देशद्रोह के आरोपों पर अपनी बड़ी सफाई दी है।
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आश्रम ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर एक आर्टिकल जारी किया है। आश्रम का दावा है कि रामपाल पर लगे हत्या के आरोप सीधे तौर पर मर्डर के नहीं, बल्कि पूरी उस समय के हालातों और परिस्थितियों के कारण हुई घटना है।
सतलोक आश्रम की आधिकारिक वेबसाइट satlokashram.org के अनुसार, इन दोनों ही मामलों में संत रामपाल महाराज की न तो कोई प्रत्यक्ष भूमिका थी और न ही परोक्ष। यह पूरी तरह से पुलिस की सख्त कार्रवाई और परिस्थितियों के कारण हुई मौतें थीं, जिनमें हत्या की कोई साजिश या नीयत शामिल नहीं थी। फिलहाल ये मामले अदालत के विचाराधीन हैं।
रामपाल की वेबसाइट पर प्रकाशित आर्टिकल, जिसमें खुद को बेकसूर बताया गया है।
आइए जानते हैं किन दो मामलों में आश्रम ने सफाई दी…
- रोहतक करौंथा कांड: आश्रम का दावा है कि साल 2006 में आर्य समाजियों ने सतलोक आश्रम पर हमला कर दिया था। अनुयायी आश्रम के अंदर फंसे हुए थे और हमलावरों ने आश्रम को घेर रखा था। मौके पर मौजूद पुलिस ने पीड़ितों के बजाय हमलावरों को संरक्षण दिया। आश्रम का दावा है कि इस हिंसक झड़प के दौरान आश्रम के बाहर मुख्य सड़क पर सोनू नामक के एक हमलावर की गोली लगने से मौत हो गई थी। आश्रम का कहना है कि फोरेंसिक जांच में यह साबित हो चुका है कि वह गोली आश्रम के किसी हथियार से नहीं चली थी। इसके बावजूद पुलिस ने इस मौत का जिम्मा संत रामपाल पर डाल दिया।
- 2014 बरवाला कांड: आश्रम का दावा है कि साल 2014 में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने अवमानना के एक मामले में संत रामपाल को तलब किया था। तबीयत खराब होने के कारण वे कोर्ट नहीं जा सके। इसके बाद कोर्ट ने पुलिस को उन्हें किसी भी हाल में पेश करने के आदेश दिए। आश्रम के मुताबिक, अनुयायी अस्वस्थ संत रामपाल को जबरन ले जाने के खिलाफ थे। कोर्ट के आदेश का पालन कराने के लिए पुलिस ने आश्रम पर बल प्रयोग किया। इस कार्रवाई के कारण भगदड़ और अव्यवस्था में 5 महिला अनुयायियों और एक बच्चे की मौत हो गई। पुलिस ने जिम्मेदारी लेने के बजाय इन 6 मौतों का ठीकरा भी संत रामपाल के सिर फोड़ दिया।

जानिए, 19 नवंबर 2014 में क्या हुआ, रामपाल कैसे बाहर आया
हाईकोर्ट में पेश नहीं हुए रामपाल: नवंबर 2014 में जब पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के अवमानना आदेश पर रामपाल कोर्ट में पेश नहीं हुए, तो 19 नवंबर 2014 को पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने हिसार के बरवाला स्थित सतलोक आश्रम पहुंची थी। यहां पुलिस और रामपाल समर्थकों के बीच भारी टकराव हुआ। इस हिंसक झड़प और गतिरोध के दौरान महिलाओं और बच्चों समेत 6 लोगों की मौत हो गई थी, जिसके बाद रामपाल को गिरफ्तार किया गया। साल 2018 में हिसार कोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
वकील ने उम्र और लंबी कैद का हवाला दिया: कोर्ट में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील ने दलील दी कि रामपाल 11 साल से ज्यादा का समय जेल में काट चुके हैं। उनकी उम्र करीब 78 साल हो चुकी है और सेहत ठीक नहीं रहती। इस केस में 900 से ज्यादा आरोपी हैं, जिनमें से ज्यादातर को जमानत मिल चुकी है। कुल 425 गवाहों में से अब तक सिर्फ 58 की ही गवाही हो पाई है, जिससे ट्रायल जल्द पूरा होने की कोई उम्मीद नहीं है। मानवीय आधार पर उन्हें जमानत मिलनी चाहिए।
हाईकोर्ट का फैसला और कड़ी शर्तें: हाईकोर्ट ने बचाव पक्ष की दलील को सही माना कि ट्रायल बेहद धीमी गति से चल रहा है और मुख्य आरोपी लंबे समय से जेल में बंद है। अदालत ने नियमित जमानत तो मंजूर कर ली, लेकिन साथ ही कड़ी शर्तें भी लागू की हैं। रामपाल भविष्य में किसी भी तरह की भीड़ इकट्ठा नहीं करेंगे। वे ऐसी किसी भी गतिविधि या समागम में शामिल नहीं होंगे, जिससे कानून-व्यवस्था पर असर पड़े। अगर किसी भी शर्त का उल्लंघन पाया गया, तो राज्य सरकार तुरंत जमानत रद्द कराने के लिए कोर्ट आ सकती है।
नवंबर 2014 में रामपाल की गिरफ्तारी के समय की PHOTOS

रामपाल की गिरफ्तारी के समय हुई हिंसा की फाइल फोटो।

नवंबर 2014 की ये तस्वीर रामपाल की गिरफ्तारी के समय की है।

ये तस्वीर 10 अप्रैल 2026 की है, जब हिसार जेल से रामपाल बाहर आया। गेट पर खड़े पुलिसकर्मी ने हाथ जोड़ कर नमस्कार किया।

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