हजूर साहिब बोर्ड बनाने पर हरसिमरत BJP पर हमलावर: महाराष्ट्र के CM को पत्र लिखा; कहा-धार्मिक स्थलों पर अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं – Bathinda News

हजूर साहिब बोर्ड बनाने पर हरसिमरत BJP पर हमलावर:  महाराष्ट्र के CM को पत्र लिखा; कहा-धार्मिक स्थलों पर अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं – Bathinda News




बठिंडा से सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखा है। उन्होंने तख्त सचखंड श्री हजूर अबचलनगर साहिब बोर्ड की स्वायत्तता बनाए रखने की अपील की है। यह अपील महाराष्ट्र मंत्रिमंडल द्वारा सात दशक पुराने ‘नांदेड़ सिख गुरुद्वारा सचखंड श्री हजूर अबचलनगर साहिब अधिनियम, 1956’ को निरस्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी देने के बाद की गई है। बादल ने अपने पत्र में बताया कि 1956 का यह अधिनियम सिख समुदाय को गुरु गोबिंद सिंह जी से जुड़े इस पवित्र धार्मिक स्थल के प्रबंधन में पूर्ण स्वायत्तता प्रदान करता था। इसके स्थान पर, महाराष्ट्र सरकार आगामी विधानसभा सत्र में ‘तख्त सचखंड श्री हजूर अबचलनगर साहिब गुरुद्वारा अधिनियम’ नामक नया कानून लाने का प्रस्ताव रख रही है। सांसद बादल ने आशंका जताई है कि नए कानून के तहत बोर्ड में सरकारी नामांकित सदस्यों की संख्या बढ़ाकर और चुनाव, प्रबंधन व उप-नियमों में बदलाव करके बोर्ड के मूल चरित्र को बदलने का प्रयास किया जा रहा है। सिख संस्थाओं से कोई पूर्व परामर्श नहीं किया उन्होंने कहा कि राज्य द्वारा नियुक्त समिति की सिफारिशों पर सिख समुदाय, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) या हजूरी सचखंड दीवान की भावनाओं को ध्यान में रखे बिना व्यापक बदलाव किए जा रहे हैं। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि सिख संस्थाओं से कोई पूर्व परामर्श नहीं किया गया है। इससे समुदाय में यह धारणा बन रही है कि बोर्ड की स्वायत्तता समाप्त करने का प्रयास किया जा रहा है। फरवरी 2024 में किया था संशोधन बादल ने याद दिलाया कि फरवरी 2024 में भी महाराष्ट्र सरकार ने अधिनियम में संशोधन कर बोर्ड के 17 में से 12 सदस्यों को सीधे सरकार द्वारा नामांकित करने का प्रावधान किया था। तब SGPC का प्रतिनिधित्व घटा दिया गया था और चीफ खालसा दीवान व हजूरी सचखंड दीवान को समाप्त कर दिया गया था। SGPC और स्थानीय सिख संगठनों के भारी विरोध के बाद उस संशोधन को वापस ले लिया गया था। हालांकि, अब सरकार नए अधिनियम के माध्यम से समान बदलाव लाना चाहती है।



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