मां बगलामुखी धाम के महंत को बदनाम करने का मामला: 2 पार्षदों समेत 14 नामजद,150 अज्ञात पर FIR;CP दफ्तर के बाहर दिया था धरना – Ludhiana News

मां बगलामुखी धाम के महंत को बदनाम करने का मामला:  2 पार्षदों समेत 14 नामजद,150 अज्ञात पर FIR;CP दफ्तर के बाहर दिया था धरना – Ludhiana News




लुधियाना पुलिस ने दो मौजूदा पार्षदों (गौरवजीत सिंह गोरा और शिवा मल्होत्रा और पार्षद सिम्मू सहित 14 नामजद और करीब 125 से 150 अज्ञात लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस ने धारा BNS 299, 248(1), 352, 351(2), 61(2) के तहत मामला दर्ज किया है।
यह कार्रवाई मां बगलामुखी धाम ट्रस्ट (सिंगला एन्क्लेव, पखोवाल रोड) के अधिकृत प्रतिनिधि तरुण चौधरी की शिकायत पर पुलिस कमिश्नर के आदेश के बाद की गई है। 9 जून को दिया था आरोपियों ने पुलिस कमिश्नर कार्यालय के बाहर धरना दरअसल, आरोपियों ने 9 जून 2026 को फिरोजपुर रोड स्थित पुलिस कमिश्नर कार्यालय के बाहर भारी भीड़ जुटाकर धरना दिया था और सोशल मीडिया व न्यूज चैनलों पर महंत के खिलाफ अमर्यादित और भ्रामक टिप्पणियां की थीं। आरोपियों ने महंत पर एक कारोबारी विवाद में 3 करोड़ रुपये की फिरौती मांगने और सोने का कड़ा रिश्वत में लेने के गंभीर आरोप लगाए थे। पुलिस की उच्च स्तरीय जांच (एडीसीपी वैभव सहगल और एसीपी हरशप्रीत सिंह) में ये आरोप पूरी तरह निराधार और धार्मिक छवि को ठेस पहुंचाने वाले पाए गए, जिसके बाद थाना डिवीजन नंबर 5 में देर रात एफआईआर दर्ज की गई। सिलसिलेवार ढंग से समझें पूरा मामला:
1. विवाद की असली वजह: रेडीमेड कपड़ा कारोबार का पुराना केसः
पुलिस जांच के अनुसार, सारा विवाद प्रतीक टंडन और साहिल मल्होत्रा के परिवार के बीच कपड़ों के लेन-देन से जुड़ा है। प्रतीक टंडन ने साहिल मल्होत्रा, मीनाक्षी मल्होत्रा और प्रदुमन मल्होत्रा के खिलाफ थाना दरेसी में धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया था। इस केस के सिलसिले में जब आरोपियों को थाने लाया गया, तो वहां प्रतीक टंडन के साथ आरोपी पक्ष का झगड़ा हो गया, जिसके बाद दरेसी थाने में एक और एफआईआर दर्ज हुई। 2. महंत पर क्यों निकाला गया गुस्सा?
शिकायतकर्ता प्रतीक टंडन मां बगलामुखी धाम मंदिर में सेवा करता है। आरोपी पक्ष को यह गलतफहमी और शक था कि मंदिर के ट्रस्ट और महंत प्रवीण चौधरी इस कानूनी लड़ाई में प्रतीक टंडन की मदद कर रहे हैं। उन्हें लगा कि महंत के कहने पर ही पुलिस ने उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की और उन्हें गिरफ्तार किया। इसी रंजिश में आरोपियों ने महंत को निशाना बनाने की साजिश रची। 3. सीपी दफ्तर के बाहर प्रदर्शन और 3 करोड़ का ‘सूटकेस ड्रामा’
इसी रंजिश के तहत 9 जून 2026 को आरोपी जितेंद्र गोरैयां, पार्षद गोरा, आशा भोला, लवीन तांगड़ी और अन्य आरोपियों ने 150 लोगों की गैर-कानूनी भीड़ जुटाई। इन्होंने फिरोजपुर रोड पर पुलिस कमिश्नर दफ्तर के बाहर चक्का जाम कर धरना दिया और लाउडस्पीकर पर महंत के खिलाफ ‘मुर्दाबाद’ के नारे लगाए। आरोपी जितेंद्र गोरियन ने सरेआम दावा किया कि वह 6 सूटकेस में 50-50 लाख रुपये (कुल 3 करोड़) नकद लेकर आया है, जो महंत ने केस रफा-दफा करने के लिए मांगे थे। इसके अलावा महंत पर 12 तोले का सोने का कड़ा लेने का भी झूठा आरोप लगाया गया। 4. सोशल मीडिया पर छवि खराब करने की साजिश
आरोपियों ने इस पूरे धरने और आरोपों का वीडियो सोशल मीडिया और स्थानीय न्यूज चैनलों पर जानबूझकर प्रसारित करवाया। इसका असर यह हुआ कि देश-वीडियो में बैठे मां बगलामुखी धाम के लाखों श्रद्धालुओं और फॉलोअर्स की धार्मिक भावनाएं आहत हुईं। लोगों ने महंत को फोन और मैसेज कर सच पूछना शुरू कर दिया, जिससे ट्रस्ट की सामाजिक और धार्मिक प्रतिष्ठा को भारी नुकसान पहुंचा। 5. पुलिस की जांच और अंतिम कार्रवाई
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस कमिश्नर लुधियाना ने एडीसीपी (स्थानीय) वैभव सहगल और एसीपी (डिटेक्टिव-1) हरशप्रीत सिंह की एक संयुक्त जांच टीम बनाई। दोनों पक्षों को सुनने, गवाहों के बयान दर्ज करने और पेनड्राइव में सौंपे गए वीडियो सबूतों को बारीकी से जांचने के बाद पुलिस ने पाया कि आरोपियों ने जानबूझकर ब्लैकमेल करने, पैसे ऐंठने और धार्मिक छवि खराब करने के लिए यह झूठा सूटकेस ड्रामा रचा था। पुलिस कमिश्नर की अंतिम मंजूरी के बाद थाना डिवीजन नंबर 5 लुधियाना में देर रात मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।



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