भाजपा नेता गुरप्रीत भट्टी अब वारिस पंजाब दे में शामिल: चौथी बार बदली पार्टी, तीन बार तीन पार्टियों से लड़ चुके चुनाव, पर जीत नहीं सके – Khanna News

भाजपा नेता गुरप्रीत भट्टी अब वारिस पंजाब दे में शामिल:  चौथी बार बदली पार्टी, तीन बार तीन पार्टियों से लड़ चुके चुनाव, पर जीत नहीं सके – Khanna News




भाजपा से इस्तीफा देने के कुछ दिनों बाद वरिष्ठ नेता गुरप्रीत सिंह भट्टी अकाली दल वारिस पंजाब दे में शामिल हो गए हैं। उन्हें बुधवार को लुधियाना के खन्ना क्षेत्र के भट्टियां स्थित उनके निवास पर आयोजित एक कार्यक्रम में पार्टी में शामिल कराया गया। इस दौरान सांसद अमृतपाल सिंह के पिता तरसेम सिंह, सांसद सरबजीत सिंह खालसा और विधायक मनप्रीत सिंह अयाली मौजूद थे। भट्टी के पार्टी में शामिल होने के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि वे आगामी विधानसभा चुनाव खन्ना या फतेहगढ़ साहिब जैसे पंथक क्षेत्र से लड़ सकते हैं। गुरप्रीत सिंह भट्टी की नई राजनीतिक पारी के साथ ही उनके पिछले चुनावी रिकॉर्ड पर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं। पिछले लगभग दो दशकों से राजनीति में सक्रिय भट्टी अब तक तीन अलग-अलग राजनीतिक दलों के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं, लेकिन उन्हें कभी जीत नहीं मिली। पीपीपी से लेकर भाजपा तक का सफर भट्टी ने वर्ष 2012 में पीपुल्स पार्टी ऑफ पंजाब (पीपीपी) के उम्मीदवार के रूप में खन्ना विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था, जिसमें उन्हें हार मिली। इसके बाद उन्होंने पीपीपी छोड़कर आम आदमी पार्टी (आप) का दामन थामा। वर्ष 2017 में उन्होंने अपना निर्वाचन क्षेत्र बदलकर अमलोह से चुनाव लड़ा, लेकिन वहां भी उन्हें सफलता नहीं मिली।इसके बाद भट्टी भाजपा में शामिल हुए। भाजपा ने उन्हें 2022 के विधानसभा चुनाव में खन्ना से उम्मीदवार बनाया, लेकिन तीसरी बार भी वे जीत हासिल नहीं कर सके।
मैं और मेरा परिवार पक्के अकाली हैं : भट्टी
दूसरी ओर गुरप्रीत सिंह भट्टी ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि वह और उनका परिवार मूल रूप से अकाली विचारधारा से जुड़े रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2010 के आसपास उन्हें शिरोमणि अकाली दल की दिशा बदलती नजर आई थी, जिसके बाद उन्होंने पार्टी छोड़ दी थी। भट्टी के अनुसार बाद के वर्षों में उन्हें कोई ऐसा राजनीतिक मंच नहीं मिला जो पंजाब और पंथ की बात करता हो। उन्होंने कहा कि अकाली दल वारिस पंजाब दे की विचारधारा से प्रभावित होकर ही उन्होंने पार्टी में शामिल होने का फैसला लिया है। भट्टी ने दावा किया कि वह बिना किसी पद, लालच या राजनीतिक समझौते के पार्टी में आए हैं और संगठन को मजबूत करने के लिए पूरी मेहनत करेंगे।



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