मानवाधिकार आयोग का बड़ा आदेश: फर्जी नशेड़ी’ मामले में सिविल सर्जन निजी तौर पर तलब – Ludhiana News
पंजाब स्टेट ह्यूमन राइट्स कमीशन (PSHRC) ने आधार कार्ड का गलत इस्तेमाल कर एक बेकसूर व्यक्ति को सरकारी रिकॉर्ड में ‘नशेड़ी’ दिखाने के गंभीर मामले में अब तक का सबसे सख्त रुख अपनाया है। कमीशन ने 15 जून 2026 को एक नया और बड़ा आदेश जारी करते हुए लुधियाना के सिविल सर्जन को अगली सुनवाई पर खुद पेश होने का फरमान सुनाया है। कमीशन का कड़ा रुख: 14 अगस्त को होना होगा हाजिर कमीशन के इस नए आदेश पर देखी जा सकती है ने स्वास्थ्य विभाग के ढीले रवैये की पोल खोल कर रख दी है अधिकारियों ने नहीं दी कोई रिपोर्ट: आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि कमीशन ने इससे पहले 9 जनवरी 2026 और 12 मार्च 2026 को डायरेक्टर (हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर, पंजाब) और सिविल सर्जन (लुधियाना) को एक्शन टेकन रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए थे। लेकिन दोनों में से किसी भी अधिकारी ने अब तक कोई रिपोर्ट जमा नहीं की। अब खुद आना पड़ेगा: विभाग की इस लापरवाही को देखते हुए कमीशन ने लुधियाना के सिविल सर्जन को सख्त आदेश दिया है कि वे अगली सुनवाई की तारीख 14 अगस्त 2026 को पूरी रिपोर्ट के साथ निजी तौर पर (In Person) कमीशन के सामने हाजिर हों।
हाई-लेवल कॉपियां जारी: इस कड़े आदेश की एक-एक कॉपी सिविल सर्जन लुधियाना, डायरेक्टर (हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर, पंजाब) और शिकायतकर्ता तरसेम भारद्वाज को आगे की कार्रवाई के लिए भेज दी गई है। बीजा गांव (खन्ना) के रहने वाले तरसेम भारद्वाज जब अपने असला लाइसेंस के लिए डोप टेस्ट’ करवाने गए तो उन्हें पता चला कि उनके आधार कार्ड का गलत इस्तेमाल करके एक नशा मुक्ति केंद्र ने उनके नाम पर 98 गोलियां जारी कर दीं और उन्हें सरकारी पोर्टल पर नशेड़ी दिखा दिया। इसके बाद पीड़ित ने मानवाधिकार आयोग और डीआईजी लुधियाना रेंज से न्याय की गुहार लगाई थी। अब 15 जून के इस नए अदालती आदेश के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। तरसेम भारद्वाज ने मांग की है कि दोषियों को जेल भेजी जाए, उनका आधार नंबर [Aadhaar Redacted] इस फर्जी पोर्टल से तुरंत डिलीट किया जाए और उनकी साख खराब करने के लिए मुआवजा मिले।
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