हॉकी इंडिया की नई केसरिया जर्सी पर विवाद: खिलाड़ियों से सलाह लेने के दावे को टीम मेंबर ने नकारा, दिग्गजों ने जताई नाराजगी
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5 मिनट पहले
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अगले महीने होने वाले वर्ल्ड कप टूर्नामेंट के लिए हॉकी इंडिया ने पारंपरिक नीली जर्सी की जगह केसरिया रंग की किट अपनाने का फैसला किया है। इस फैसले के बाद से ही विवाद शुरू हो गया है। कई हॉकी दिग्गजों ने इस बदलाव पर अपनी नाराजगी जाहिर की है। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी है।
खिलाड़ियों से सलाह के दावे पर सवाल
हॉकी इंडिया ने अपने बचाव में कहा है कि यह फैसला खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ से सलाह लेने के बाद लिया गया है। साथ ही, यह बदलाव तकनीकी कारणों से किया गया है। हालांकि, एक रिपोर्ट में एक अज्ञात खिलाड़ी और हॉकी इंडिया के एक अधिकारी के हवाले से दावा किया गया है कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई थी।
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय टीम के एक सदस्य ने जर्सी का रंग बदलने के दावे को गलत बताया है। खिलाड़ी ने कहा कि उनसे न तो पूछा गया और न ही कोई सलाह ली गई। वहीं, हॉकी इंडिया की कार्यकारी समिति के एक सदस्य ने भी कहा कि उन्हें इस बदलाव की जानकारी नहीं थी और वे ऐसी किसी आधिकारिक बैठक का हिस्सा नहीं थे, जहां इस पर चर्चा हुई हो।

दिग्गजों ने उठाए सवाल
1980 ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय टीम के कप्तान वासुदेवन भास्करन ने सवाल उठाया कि क्या हॉकी इंडिया ने यह फैसला लेने से पहले सरकार से सलाह ली थी। भास्करन ने कहा कि उन्हें यह जर्सी देखकर कोई प्रेरणा नहीं मिल रही है। उन्होंने कहा कि 1928 से भारतीय खिलाड़ी नीली जर्सी पहनते आए हैं, तो अचानक यह बदलाव क्यों किया गया। उन्होंने कहा कि अगर यह फैसला हॉकी इंडिया का है, तो उन्हें पहले पूर्व और वर्तमान खिलाड़ियों से सलाह लेनी चाहिए थी।
हॉकी इंडिया ने दी सफाई
गुरुवार को बढ़ते विरोध के बीच हॉकी इंडिया ने एक बयान जारी कर इस बदलाव के पीछे का तर्क समझाया। हॉकी इंडिया ने कहा कि जर्सी का रंग बदलने का फैसला सपोर्ट स्टाफ और खिलाड़ियों की सिफारिशों और उनके साथ विस्तृत चर्चा के बाद लिया गया है।
हॉकी इंडिया ने स्पष्ट किया कि इसका मुख्य कारण तकनीकी है। उन्होंने बताया कि नीली जर्सी अंतरराष्ट्रीय हॉकी पिचों के नीले रंग के साथ मिल जाती थी, जो अब मानक बन चुका है। इस दृश्य समानता के कारण मैदान पर खिलाड़ियों को स्पष्टता और विजिबिलिटी में परेशानी हो रही थी।


