हाईकोर्ट में DA एरियर पर आज आ सकता है फैसला: कर्मचारियों-पेंशनरों की नजर, केंद्र से 18% पीछे पंजाब के कर्मचारी, कर्मचारी संगठन हो रहे लामबंद – Chandigarh News

हाईकोर्ट में DA एरियर पर आज आ सकता है फैसला:  कर्मचारियों-पेंशनरों की नजर, केंद्र से 18% पीछे पंजाब के कर्मचारी, कर्मचारी संगठन हो रहे लामबंद – Chandigarh News




पंजाब के करीब 8 लाख सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के लंबे समय से लंबित महंगाई भत्ता (DA) और वेतन आयोग (पे-कमिशन) के एरियर से जुड़े मामले पर आज पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में सुनवाई होगी। यह मामला पिछले कई दिनों से सूची में शामिल हो रहा था, लेकिन सुनवाई नहीं हो पा रही थी। ऐसे में आज होने वाली सुनवाई पर कर्मचारियों और पेंशनरों की नजरें टिकी हुई हैं। हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने 8 अप्रैल को पंजाब सरकार को 30 जून तक लंबित डीए का भुगतान करने का निर्देश दिया था। इस आदेश को सरकार ने डिवीजन बेंच में चुनौती दी। डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के आदेश पर रोक नहीं लगाई, लेकिन सरकार से सीलबंद लिफाफे में भुगतान की योजना मांगी थी। अब सुनवाई में अदालत यह देखेगी कि सरकार ने बकाया डीए के भुगतान के लिए क्या रोडमैप तैयार किया है। यह भी स्पष्ट होगा कि सरकार किस्तों में भुगतान का प्रस्ताव रखती है या वित्तीय स्थिति का हवाला देकर और समय की मांग करती है। केंद्र से 18% पीछे पंजाब के कर्मचारी फिलहाल पंजाब के कर्मचारियों को 42 प्रतिशत महंगाई भत्ता मिल रहा है, जबकि केंद्र सरकार के कर्मचारियों की तुलना में 18 प्रतिशत डीए अभी भी लंबित है। कर्मचारी संगठन लंबे समय से इस अंतर को समाप्त करने और बकाया राशि जारी करने की मांग कर रहे हैं। कर्मचारी संगठनों की ओर से पेश वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का हवाला दिया है, जिसमें कहा गया था कि महंगाई भत्ता कोई बोनस या अनुग्रह राशि नहीं, बल्कि कर्मचारियों के वेतन का हिस्सा है। इसी आधार पर कर्मचारी बकाया डीए के भुगतान की मांग कर रहे हैं। कर्मचारी संगठन हो रहे लामबंद कर्मचारी संगठनों ने पहले ही सरकार को चेतावनी दी है कि यदि हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलती और भुगतान को लेकर स्पष्ट फैसला नहीं आता, तो 17 जुलाई को पंजाब में महारैली और महाबंद का ऐलान किया जा सकता है। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि यदि कर्मचारियों और पेंशनरों के परिवारों को जोड़ दिया जाए तो यह संख्या करीब 40 लाख लोगों तक पहुंचती है। ऐसे में इस मुद्दे का राजनीतिक असर भी आगामी समय में देखने को मिल सकता है।



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