साइकिल से 12 दिन में अमरनाथ यात्रा पूरी की: पठानकोट के अश्वनी शर्मा का स्वागत, 50 की उम्र में 800 किलोमीटर का सफर – Pathankot News
मन में बाबा बर्फानी के प्रति अटूट श्रद्धा और कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो कोई भी राह मुश्किल नहीं होती। इस बात को सच कर दिखाया है पठानकोट के मोहल्ला जंदरिया निवासी अश्वनी शर्मा ‘टोनी’ ने। उन्होंने दृढ़ इच्छाशक्ति, शारीरिक क्षमता और धार्मिक आस्था के बल पर साइकिल से महज 12 दिनों में पवित्र अमरनाथ यात्रा सफलतापूर्वक पूरी की। शहर लौटने पर अश्वनी शर्मा का लोगों ने उत्साह के साथ स्वागत किया। उन्होंने बताया कि पवित्र गुफा में बाबा बर्फानी के दर्शन कर उन्होंने माथा टेका और देशवासियों की सुख-समृद्धि, आपसी भाईचारे, शांति और खुशहाली की कामना की। अश्वनी ने 1 जुलाई को पठानकोट से अपनी यात्रा शुरू की थी और 13 जुलाई को वापस शहर लौटे। चुनौतियों से भरा सफर: कठिन पहाड़ी रास्तों और मौसम को दी मात अपनी इस अलौकिक और साहसिक यात्रा के अनुभवों को साझा करते हुए अश्वनी शर्मा ने बताया कि यह सफर आसान नहीं था। कठिन भौगोलिक परिस्थितियां: मैदानी इलाकों से लेकर कश्मीर के ऊंचे, संकरे और पथरीले रास्तों पर साइकिल चलाना एक बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य था। मौसम का मिजाज: यात्रा के दौरान कई जगह बदलते मौसम, हाड़ कंपाने वाली ठंड और तेज हवाओं ने उनकी परीक्षा ली। लंबी दूरी का संकल्प: बिना रुके, प्रतिदिन एक निश्चित दूरी तय करना और लगातार चढ़ाई वाले रास्तों पर पैडल मारना शारीरिक और मानसिक दोनों स्तरों पर थका देने वाला था, लेकिन बाबा बर्फानी की कृपा से वे आगे बढ़ते रहे।प्रार्थना भी की। शहर में हुआ भव्य स्वागत जैसे ही अश्वनी शर्मा ‘टोनी’ अपनी यात्रा पूरी कर पठानकोट पहुंचे, उनके स्वागत में जनसैलाब उमड़ पड़ा। मोहल्ला जंदरिया और पूरे पठानकोट में उनके स्वागत के लिए विशेष तैयारियां की गई थीं। उनके आगमन पर परिवारजनों, करीबी मित्रों, सामाजिक संगठनों और शुभचिंतकों ने उन्हें फूलों के हार पहनाए, मिठाई बांटी और गर्मजोशी से अभिनंदन किया। स्थानीय निवासियों का कहना है कि अश्वनी ने 52 साल की उम्र और सीमित संसाधनों में साइकिल से अमरनाथ जैसी दुर्गम यात्रा पूरी कर पूरे पठानकोट जिले का नाम रोशन किया है। उनका यह साहस क्षेत्र के अन्य लोगों और युवाओं के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा यह सिर्फ धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि संकल्प की परीक्षा थी अश्वनी शर्मा ‘टोनी’ ने कहा कि उनके लिए यह यात्रा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं थी, बल्कि आत्मविश्वास, अनुशासन और दृढ़ संकल्प की परीक्षा भी थी। उन्होंने इस यात्रा के माध्यम से समाज, खासकर युवा पीढ़ी को संदेश दिया कि नशे और स्क्रीन एडिक्शन से दूर रहकर स्वस्थ जीवनशैली अपनानी चाहिए। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए साइकिलिंग जैसे विकल्पों को बढ़ावा देना जरूरी है। फिटनेस को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए, क्योंकि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क और मजबूत इच्छाशक्ति का विकास होता है।
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