संगरूर में गंदगी की समस्या पर सड़क पर उतरे लोग: पार्षद सतेंद्र सैनी की अुगआई में कूड़े के ढेर के बीच प्रदर्शन, सभी पार्टियों के खिलाफ नारेबाजी – Sangrur News
संगरूर शहर में कूड़े की गंभीर समस्या और चरमराई सफाई व्यवस्था को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) के ही काउंसलर (पार्षद) सतेंद्र सैनी और उनके साथियों ने मोर्चा खोल दिया है। प्रदर्शनकारियों ने स्थानीय सरकारी अस्पताल के मुख्य द्वार के पास लगे गंदगी के विशाल ढेर के सामने खड़े होकर मौजूदा ‘आप’ सरकार समेत पूर्ववर्ती कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल (शिअद) सरकारों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे पार्षद सतेंद्र सैनी ने तीखे तेवर अपनाते हुए कहा कि संगरूर में जगह-जगह कूड़े के ढेर लग चुके हैं, जिससे उठने वाली भयानक दुर्गंध के कारण राहगीरों और स्थानीय निवासियों का वहां से गुजरना तक दूभर हो गया है। अस्पताल के बाहर गंदगी से बीमारियों का खतरा उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि सरकारी अस्पताल में लोग अपनी बीमारियों का इलाज कराने और स्वास्थ्य लाभ के लिए आते हैं। लेकिन अस्पताल के ठीक बाहर लगे कचरे के इन ढेरों के कारण मरीजों और उनके तीमारदारों को यहां से नई और गंभीर बीमारियां लेकर लौटने का खतरा बना हुआ है। विपक्षी दलों के प्रदर्शन को बताया ‘चुनावी नाटक’ काउंसलर सैनी ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा हाल ही में किए गए उस प्रदर्शन को पूरी तरह से ‘नाटक’ करार दिया, जिसमें उन्होंने कूड़े के ढेर पर स्थानीय विधायक के पोस्टर लगाए थे। सैनी ने याद दिलाया कि जब सूबे में कांग्रेस की सरकार थी, तब मौजूदा विधायक नरिंदर कौर भी इसी तरह कूड़े के ढेर पर पोस्टर लेकर केवल तस्वीरें खिंचवाती थीं और सुर्खियां बटोरती थीं, लेकिन जमीन पर कोई काम नहीं हुआ। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव नजदीक आते देख कांग्रेस, अकाली दल और भाजपा के नेता ‘बरसाती मेंढकों’ की तरह बाहर निकल आए हैं और केवल ओछी राजनीति कर रहे हैं। सैनी के अनुसार, संगरूर में गंदगी की यह स्थिति बेहद पुरानी है, लेकिन जब ये दल सत्ता में थे, तब किसी भी नेता ने जनता की इस समस्या की सुध नहीं ली। साढ़े चार साल बाद भी सफाई कर्मचारियों के वादे अधूरे पार्षद ने शहर की सफाई व्यवस्था ठप होने के पीछे सफाई कर्मचारियों की चल रही हड़ताल का भी जिक्र किया। उन्होंने अपनी ही सरकार को आईना दिखाते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी ने चुनाव से पहले इन कर्मचारियों की सभी जायज मांगों को पूरा करने का वादा किया था। हालांकि, सरकार को सत्ता में आए करीब साढ़े चार साल का लंबा समय बीत चुका है, लेकिन सफाई कर्मचारियों की मांगों को अभी तक पूरा नहीं किया गया है, जिसके कारण आज शहर कचरे के डिपो में तब्दील हो गया है।
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