राम मंदिर में ट्रस्टियों के भतीजे-रिश्तेदार खरीद रहे थे जमीन: 17 गुना तक दिए दाम, निर्माण सामग्री में भी लिया 40% कमीशन – Uttar Pradesh News

राम मंदिर में ट्रस्टियों के भतीजे-रिश्तेदार खरीद रहे थे जमीन:  17 गुना तक दिए दाम, निर्माण सामग्री में भी लिया 40% कमीशन – Uttar Pradesh News


‘अंधा बांटे रेवड़ी, घरे घराना खाय’ कुछ इसी अंदाज में अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के पैसों की बंदरबांट चल रही थी। सूत्रों के मुताबिक, SIT की जांच में सामने आया है कि चढ़ावे की गिनती से लेकर मंदिर के पूरे मैनेजमेंट तक चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा और ग

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SIT को निर्माण और जमीन खरीद मे भी गड़बड़ी मिली है। सर्किल रेट से 17 गुना ज्यादा कीमत पर जमीनें खरीदने और निर्माण सामग्री में 40% कमीशनखोरी की बात भी सामने आई है। उम्मीद है कि सोमवार को SIT अपनी शुरुआती रिपोर्ट सीएम योगी को सौंप सकती है। इससे राम मंदिर ट्रस्ट भंग करके इसे नए सिरे से बनाने के आसार हैं। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…

जमीन खरीद में चंपत राय के भतीजे की अहम भूमिका

चंदन राय मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का भतीजा है। अयोध्या में राम मंदिर बनाने के लिए जब जमीनों की खरीदी शुरू हुई तो यह एक्टिव हो गया। सूत्रों के मुताबिक, चंदन पिछले साल तक राम घाट में किराए के एक मकान में रह रहा था। अब उसने अयोध्या के माझा इलाके में कई बीघा जमीन खरीदी, हरिद्वार में होटल बनवाया है।

मंदिर विस्तार के लिए 107 एकड़ जमीन की जरूरत थी। इसके लिए ट्रस्ट ने 5 साल में राम जन्मभूमि के 500 मीटर से लेकर 3 किमी दूर तक की जमीनें सर्किल रेट से करीब 17 गुना ज्यादा कीमत देकर खरीदीं। कई जमीनें नजूल और मंदिरों के नाम थीं, जिन्हें खरीदा-बेचा नहीं जा सकता था। आरोप है कि मंदिर के लिए जमीन खरीद में चंदन राय की अहम भूमिका थी। SIT ने जमीन खरीद के सभी दस्तावेज जांच के लिए जब्त कर लिए हैं।

इन जमीनों की खरीद पर उठ रहे सवाल…

साल 2021

  • फरवरी: राम जन्मभूमि परिसर के पास 7,285 वर्गफीट जमीन 1 करोड़ में खरीदी।
  • 27 मार्च: फकीरे राम मंदिर की जमीन 4 करोड़ में खरीदी। मंदिर की जमीन की रजिस्ट्री नहीं हो सकती। कोर्ट केस चल रहा है।
  • मार्च: बाग बिजैसी में करीब 3 एकड़ जमीन 18.5 करोड़ रुपए में खरीदी। पहले कुसुम पाठक से सुल्तान अंसारी और रवि मोहन तिवारी ने 2 करोड़ रुपए में ये जमीन खरीदी। 10 मिनट बाद ट्रस्ट की तरफ से चंपत राय ने ये जमीन 18.5 करोड़ रुपए में खरीद ली। दोनों सौदों में अयोध्या के तब के मेयर ऋषिकेष उपाध्याय और ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा गवाह थे।
आरोप है कि 10 मिनट के भीतर दो बार जमीन की रजिस्ट्री हुई। ट्रस्ट के लिए चंपत राय ने कई गुना महंगी जमीन खरीदी।

आरोप है कि 10 मिनट के भीतर दो बार जमीन की रजिस्ट्री हुई। ट्रस्ट के लिए चंपत राय ने कई गुना महंगी जमीन खरीदी।

2 अप्रैल, 2024

कोट रामचंदर गांव में मुरलीदास से 6450 वर्गमीटर आवासीय प्लाट 23.61 करोड़ रुपए में खरीदा, जबकि कीमत 2.92 करोड़ रुपए थी। ये नजूल की भूमि है।

साल 2025

  • मई: हैबतपुर गांव में गुरदेयी से 7416 वर्गमीटर आवासीय जमीन 9.09 करोड़ में खरीदी, कीमत 2.96 करोड़ रुपए थी। इसी गांव में राम आधार से 6220 वर्गमीटर गैर कृषि भूमि 7.62 करोड़ में खरीदी, कीमत 2.48 करोड़ थी।
  • जुलाई: मंदिर से 500 मीटर दूर परिवहन निगम से 3540 वर्गमीटर जमीन 6.9 करोड़ रुपए में खरीदी।
  • अगस्त: हैबतपुर में शिवपूजन से 5480 वर्गमीटर कृषि भूमि 6.7 करोड़ में खरीदी, कीमत 88.7 लाख रुपए थी। बाग बिजैसी इलाके में 4080 वर्गमीटर गैर कृषि जमीन 6.45 करोड़ में खरीदी, कीमत 1.95 करोड़ थी। यह मंदिर से एक किमी दूर है।
  • नवंबर: लखनऊ रोड पर तन्वी बंसल से 7780 वर्गमीटर जमीन 29.67 करोड़ रुपए में खरीदी। इसकी कीमत 1.73 करोड़ रुपए थी। इसी महीने आलोक बंसल से 14,730 वर्गमीटर जमीन 55.47 करोड़ में खरीदी। सर्किल रेट के हिसाब से कीमत 9 करोड़ रुपए थी। जमीन मंदिर से 3 किमी दूर है। प्राण प्रतिष्ठा के दौरान यहां अस्थाई पार्किंग बनी थी।

गोपाल राव के भतीजे के पास VVIP पास जारी करने की पावर

सोमेश आनंद मंदिर की व्यवस्था देखने वाले विशेष आमंत्रित सदस्य गोपाल राव का भतीजा है। दोनों कर्नाटक के हुबली के रहने वाले हैं। सोमेश को लेकर दावा किया जा रहा है कि वह बोरे में भरकर कोई सामग्री ट्रेन से कर्नाटक ले जाता था। फिर खाली हाथ फ्लाइट से वापस आता था। पिछले तीन-चार साल में इस तरह 50 से ज्यादा यात्रा कर चुका है।

सूत्रों के मुताबिक, SIT को जांच में पता चला है कि बिना सोमेश के कहे बिना मंदिर निर्माण में लगे किसी भी ठेकेदार का भुगतान नहीं होता था। यहां तक कि निर्माण सामग्री की खरीद का भुगतान भी सोमेश के जरिए ही होता था। उसे VVIP पास जारी कराने तक का अधिकार था। वह चढ़ावा गिनने वाले कमरे में भी आ-जा सकता था। जबकि, उसकी जिम्मेदारी सिर्फ मंदिर परिसर में व्हीलचेयर व्यवस्था की थी।

टिन्नू यादव के भतीजे से रिकवर हुए 36 लाख रुपए

मनीष, चंपत राय के सबसे खास सहयोगी और चढ़ावा चोरी मामले में घिरे रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव का भतीजा है। इसकी ड्यूटी चढ़ावा राशि की गिनती करने वाले कमरे में लगती थी। SIT को बताया गया कि इसकी निशानदेही पर टिन्नू के पुश्तैनी घर (मोहल्ला स्वर्गद्वार) से 36 लाख रुपए बरामद हुए हैं।

भतीजे मनीष को चढ़ावे की गिनती के काम में इंट्री दिलाकर टिन्नू ने वहां अपने भरोसेमंद लोगों की टीम खड़ी कर ली थी। आरोप है कि ये सभी मिलकर चढ़ावा राशि को गायब कर देते थे। फिर आपस में बांट लेते थे। सूत्रों के मुताबिक, SIT की पूछताछ के बाद (13 जून) मनीष के मंदिर कैंपस से बाहर जाने पर रोक लगा दी गई है।

अनिल मिश्रा के रिश्तेदारों पर चढ़ावा चोरी का आरोप

अनुकल्प और लवकुश मिश्रा, डॉ. अनिल मिश्रा के रिश्तेदार हैं। अनुकल्प और लवकुश आपस में जीजा-साला हैं। डॉ. अनिल मिश्रा के कहने पर ही अनुकल्प की ड्यूटी चढ़ावे की रकम गिनने में लगी थी। 5 महीने पहले उसने बहनोई लवकुश मिश्रा की भी वहां नौकरी लगवा दी थी।

चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद ट्रस्ट के लोगों ने लवकुश मिश्रा के घर से उपले के ढेर में छिपाए गए 12 लाख रुपए बरामद किए थे। अयोध्या में उसका एक मकान भी बन रहा है। वहीं, अनुकल्प मिश्रा ने कुछ समय पहले अयोध्या के कौशलपुरी कॉलोनी में 65 लाख रुपए का मकान खरीदा है।

चंपत राय की सिफारिश से रत्नेश-गगनदीप काउंटिंग में लगे

रत्नेश चतुर्वेदी और गगनदीप सिंह ट्रस्ट के किसी सदस्य के रिश्तेदार नहीं हैं। हालांकि, सूत्र बताते हैं कि दोनों चंपत राय के खास लोगों में शामिल हैं। दोनों बैंक की ओर से चढ़ावा की गिनती करने वाली टीम में शामिल हैं। बताया जाता है कि उनकी नियुक्तियां चंपत राय के कहने पर की गई थीं।

राम मंदिर परिसर से चढ़ावे की रकम बैंक तक यही दोनों लेकर जाते थे। उनके साथ टिन्नू भी होता था। बैंक में पैसे जमा कराने के बाद तीनों मंदिर न लौटकर किसी खास जगह जाते थे। वहां चढ़ावे से निकाली गई रकम का बंटवारा होता था। SIT ने इनसे भी पूछताछ की है और दोनों को संदिग्ध माना है।

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अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी में सवाल उठ रहे हैं कि दानपेटियों में आने वाले चढ़ावे की चोरी को रोकने की जिम्मेदारी किसकी थी? इसमें ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा और परिसर व्यवस्थापक गोपाल राव के नाम सबसे ज्यादा लिए जा रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें…



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