यूपी में क्या समय से पहले होंगे विधानसभा चुनाव: जनगणना में 5 लाख स्टाफ की ड्यूटी बड़ी वजह; भाजपा या सपा, किसे मिलेगा फायदा – Uttar Pradesh News

यूपी में क्या समय से पहले होंगे विधानसभा चुनाव:  जनगणना में 5 लाख स्टाफ की ड्यूटी बड़ी वजह; भाजपा या सपा, किसे मिलेगा फायदा – Uttar Pradesh News


8 जून, नई दिल्ली- INDIA ब्लॉक की दिल्ली में बैठक हुई। 25 राजनीतिक दल इसमें शामिल हुए। यूपी से सपा प्रमुख अखिलेश यादव शामिल हुए। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा- SIR और चुनाव की निष्पक्षता को लेकर CJI को लेटर लिखेंगे।

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5 जून, नई दिल्ली- राहुल गांधी के साथ यूपी के प्रमुख दलित और अति पिछड़ा वर्ग के नेताओं की बैठक हुई। विधानसभा चुनाव से पहले यह सपा के ‘PDA’ फॉर्मूले को और मजबूत करने की कोशिश थी।

4 जून, लखनऊ- भाजपा के संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा- यूपी विधानसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल चुनाव मॉडल अपनाएंगे। 1.76 लाख बूथ पालक तेजी से नियुक्त कर लीजिए। यहां भाजपा के 98 संगठनात्मक जिलों के अध्यक्ष मौजूद थे।

ये 3 संकेत इस बात को बढ़ावा दे रहे हैं कि कहीं यूपी में विधानसभा चुनाव तय समय से पहले तो नहीं होने वाले हैं। इस पर चुनाव आयोग के अधिकारी कहते हैं- वोटर लिस्ट का SIR कार्यक्रम जारी होना है। आमतौर पर फाइनल वोटर लिस्ट जनवरी के मध्य में आती है। अगर आयोग ने समय से पहले चुनाव का फैसला लिया, तो इस बार अंतिम वोटर लिस्ट नवंबर तक प्रकाशित कर दी जाएगी।

सपा और बसपा नेताओं का कहना है कि भाजपा मंदी के असर को पहले ही भांप गई है। इसलिए जल्दी चुनाव कराना चाहती है। वहीं, लखनऊ की ब्यूरोक्रेसी से जुड़े सोर्स राष्ट्रीय जनगणना में लगे कर्मचारियों को इसकी बड़ी वजह बता रहे हैं।

सीएम योगी अपनी रैलियों में सपा सरकार के दौर में कानून-व्यवस्था याद दिलाते हैं। वह हुए कहते हैं कि अब गुंडों पर कड़ी कार्रवाई होती है।

चुनाव तय समय से पहले कराने के 3 बड़े कारण

1- एक ही स्टाफ, दो बड़ी ड्यूटियां देश में जनगणना का पहला चरण चल रहा है, जो 30 सितंबर तक चलेगा। इसका दूसरा चरण 9 से 28 फरवरी 2027 के बीच होना है। इसमें लोगों की सामाजिक-आर्थिक और जातीय जानकारी जुटाई जाएगी।

यूपी में इसके लिए 5.25 लाख शिक्षकों और 600 से ज्यादा एसडीएम/डीएम की ड्यूटी लगी है। यूपी में बूथों की संख्या बढ़कर 1.77 लाख हो चुकी है। इसके लिए चुनाव ड्यूटी में 7 लाख से ज्यादा कर्मचारी चाहिए। निर्वाचन से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि जो स्टाफ जनगणना कर रहा, वही चुनाव भी कराता है। अगर दोनों काम साथ हुए, तो सचिवालय से लेकर ग्राम पंचायतों तक पूरा सिस्टम ठप हो जाएगा।

2- बोर्ड परीक्षाओं का टकराव फरवरी-मार्च के महीने में ही यूपी, सीबीएसई और आईसीएसई की बोर्ड परीक्षाएं भी होती हैं। लाखों शिक्षक परीक्षा कराने और कॉपियां जांचने में व्यस्त रहते हैं। 2022 में विधानसभा चुनाव के बाद बोर्ड परीक्षाएं करवाई गई थीं।

3- आर्थिक मंदी और महंगाई से बदलता माहौल पीएम नरेंद्र मोदी और विपक्ष के नेता राहुल गांधी भी आने वाले दिनों में आर्थिक संकट और महंगाई को लेकर चिंता जता चुके हैं। वित्तीय वर्ष की आखिरी तिमाही (जनवरी-मार्च) में मंदी और महंगाई का असर जनता पर सीधे दिख सकता है। ऐसे में लोगों की नाराजगी सत्ताधारी पार्टी से हो सकती है। भाजपा ऐसा रिस्क नहीं लेना चाहेगी।

यूपी के राजनीतिक दलों की तैयारियां

चुनावी आहट मिलते ही यूपी के सभी राजनीतिक दल ‘इलेक्शन मोड’ में आ गए हैं। 2022 की बात करें, तो बसपा ने अपने कोऑर्डिनेटर और प्रभारी पहले तय कर दिए थे। पहली सूची 15 जनवरी को जारी हुई थी। सपा ने आचार संहिता लगने के बाद 13 जनवरी 2022 को अपनी पहली सूची जारी की थी। भाजपा की 15 जनवरी, 2022 को पहली सूची सार्वजनिक की थी। इस बार कैसी तैयारी है, दैनिक भास्कर ने भाजपा, सपा और बसपा के पदाधिकारियों से बात करके समझा…

भाजपा ने प्रभारी मंत्रियों को जिलों में भेजा

  • सीएम योगी ने ताबड़तोड़ जिलों के दौरे शुरू कर दिए हैं। हर जिले में करोड़ों की परियोजनाओं के शिलान्यास हो रहे हैं।
  • ‘बूथ जीता, चुनाव जीता’ मंत्र के साथ भाजपा संगठन को मजबूत कर रही है। पार्टी की 11 सदस्यीय बूथ कमेटियों का फिजिकल वेरिफिकेशन किया जा रहा है।
  • सभी जिलों के प्रभारी मंत्रियों को तत्काल अपने प्रभार वाले क्षेत्रों में जाने और वहां की कोर कमेटी के साथ बैठकें करके स्थानीय मुद्दों को हल करने के कहा गया है।

सपा ने 200 कैंडिडेट तय किए, समय से पहले नाम घोषित होंगे

  • इस बार अखिलेश यादव ने 200 उम्मीदवारों के नाम तय कर लिए। इनमें ज्यादातर मौजूदा विधायक हैं।
  • दिल्ली में सपा प्रमुख अखिलेश यादव INDIA ब्लॉक की बैठक में शामिल हुए। इसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, ममता बनर्जी समेत 25 दलों के नेता शामिल हुए।
  • अखिलेश ने पार्टी पदाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि चुनाव चाहे फरवरी 2027 में हों या इसी साल नवंबर में, बूथ स्तर की कमेटियों को हर वक्त तैयार रहना होगा।

सुभासपा और बसपा कैंडिडेट फाइनल कर चुकी ओम प्रकाश राजभर की सुभासपा ने 44 सीटों पर प्रभारी तैनात कर दिए हैं। चुनाव में यही कैंडिडेट होंगे। बसपा प्रमुख मायावती ने भी अंदरखाने करीब 50 सीटों पर अपने प्रभारियों के नाम फाइनल कर दिए हैं। इनमें 5 नाम सार्वजनिक किए हैं। मायावती ने जिलों के प्रभारियों के साथ बैठक करके उन्हें क्षेत्र में चुनावी माहौल बनाने के लिए कहा है।

जल्द चुनाव से किसे फायदा, एक्सपर्ट से समझिए

वरिष्ठ पत्रकार योगेश मिश्रा कहते हैं- सरकार विपक्ष को तैयारी का मौका नहीं देना चाहती। चुनाव के समय ही जनगणना का दूसरा चरण रखना साफ इशारा है कि सरकार वक्त से पहले चुनाव चाहती है। भाजपा का मानना है कि अचानक चुनाव कराने से विपक्षी दलों को तैयारी का पूरा मौका नहीं मिलेगा। इसके अलावा, मंदी का असर ग्राउंड पर दिखने से पहले चुनाव कराना सरकार के लिए सुरक्षित रहेगा।

वरिष्ठ पत्रकार वीरेंद्रनाथ भट्ट कहते हैं- जनगणना और चुनाव एक साथ कराना प्रशासनिक मशीनरी के लिए बेहद मुश्किल है। जहां तक महंगाई का सवाल है, यह सरकार की नाकामी नहीं, बल्कि ईरान-अमेरिका युद्ध की वजह से है। हालांकि, इसका चुनाव पर असर पड़ता है। इसलिए सरकार इसके प्रभाव से बचने के लिए चुनाव पहले करा सकती है। देखना होगा कि क्या सपा इसे कितना भुना पाती है?

चुनाव की तस्वीर वोटर लिस्ट प्रकाशन से सामने आएगी मुख्य निर्वाचन अधिकारी दफ्तर के एक अधिकारी कहते हैं- अगर जनवरी से पहले चुनाव कराए जाते हैं, तो एसआईआर 2025-26 की मतदाता सूची को आधार बनाया जा सकता है। पहले चुनाव होते हैं, तब भी आयोग के पास तैयारियों के लिए पर्याप्त समय है।

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