मिड-डे मील योजना पर फंड का संकट: मई से पैसा नहीं मिला, उधार लेकर बच्चों का भोजन चला रहे सरकारी स्कूल – Ludhiana News
लुधियाना सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील योजना के लिए मई महीने से फंड जारी नहीं होने के कारण स्कूल प्रशासन को योजना चलाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के लगभग एक महीने बाद भी स्कूलों को योजना के संचालन के लिए आवश्यक राशि नहीं मिली है। ऐसे में कई स्कूल बच्चों का भोजन बाधित न हो, इसके लिए स्थानीय दुकानदारों से उधार पर राशन और अन्य जरूरी सामग्री लेकर मिड-डे मील तैयार करवा रहे हैं। शिक्षकों के अनुसार, स्कूल खुलने के बाद से अब तक न तो मिड-डे मील का फंड जारी हुआ है और न ही कई जगहों पर समय पर खाद्यान्न उपलब्ध कराया गया। इसके बावजूद बच्चों के हित को देखते हुए किसी भी स्कूल ने भोजन वितरण नहीं रोका है। सरकारी प्राइमरी स्कूल, मोती नगर के मुख्य अध्यापक सुखधीर सिंह सेखों ने मीडिया को बताया कि मई से अब तक न तो मिड-डे मील का फंड मिला है और न ही खाद्यान्न की नियमित आपूर्ति हुई है। उन्होंने कहा कि बच्चों का भोजन बंद न हो, इसलिए आवश्यक सामग्री उधार लेकर योजना को जारी रखा जा रहा है। मिड-डे मील योजना का उद्देश्य सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को पौष्टिक पका हुआ भोजन उपलब्ध कराना है, ताकि उनका पोषण स्तर बेहतर हो और स्कूलों में उपस्थिति भी बढ़े। लेक्चरर कैडर यूनियन के जिला प्रधान धरमजीत सिंह ढिल्लों ने कहा कि जिले के अधिकांश सरकारी स्कूल इसी समस्या का सामना कर रहे हैं। फंड जारी न होने से स्कूलों के लिए योजना चलाना मुश्किल हो गया है। इसके बावजूद सभी संस्थान किसी तरह व्यवस्था कर बच्चों को भोजन उपलब्ध करा रहे हैं। एक अन्य सरकारी शिक्षक ने बताया कि मिड-डे मील के फंड में देरी अब आम समस्या बन गई है। कुछ समय तक राशि समय पर मिल रही थी, लेकिन अब फिर भुगतान में देरी शुरू हो गई है। उन्होंने कहा कि छात्र इस योजना पर निर्भर हैं, इसलिए स्कूल भोजन बंद नहीं कर सकते। मजबूरी में या तो उधार लेना पड़ रहा है या फिर शिक्षक अपनी जेब से खर्च कर रहे हैं। इस मामले में डिप्टी डिस्ट्रिक्ट एजुकेशन ऑफिसर (एलिमेंट्री) मनोज कुमार ने माना कि फंड जारी होने में देरी हुई है। उन्होंने बताया कि खाद्यान्न की व्यवस्था कर दी गई है और लंबित राशि अगले सप्ताह जारी होने की उम्मीद है। उनके अनुसार, सिंगल नोडल एजेंसी (SNA) अकाउंट सिस्टम लागू होने के कारण फंड जारी करने की प्रक्रिया में देरी हुई।
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