फाजिल्का में डिफेंस बांध के विरोध का मामला दिल्ली पहुंचा: 40 से ज्यादा गांव प्रभावित होने का दावा, किसान कमेटी ने राज्यपाल से की मुलाकात – Fazilka News
फाजिल्का के सरहदी क्षेत्र में प्रस्तावित डिफेंस बांध के विरोध में किसानों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। पिछले 23 दिनों से किसानों द्वारा लगाए गए ‘पक्का मोर्चा’ का मामला अब दिल्ली तक पहुंच गया है। समाजसेवी एवं उद्योगपति करण गिलहोत्रा ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाते हुए किसानों की 11 सदस्यीय कमेटी की मुलाकात पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से करवाई है। राज्यपाल ने किसानों की चिंताओं को देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के समक्ष रखने का आश्वासन दिया है। करण गिलहोत्रा बोले- 10 दिन पहले पता चला करण गिलहोत्रा ने बताया कि करीब दस दिन पहले उन्हें स्थानीय किसानों और विभिन्न नेताओं से जानकारी मिली थी कि फाजिल्का के सरहदी इलाके में डिफेंस बांध का निर्माण किया जा रहा है। किसानों का कहना है कि इस बांध के बनने से क्षेत्र के लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसी कारण किसान लगातार धरना देकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। किसानों की मांग को देखते हुए उन्होंने राज्यपाल से संपर्क कर किसानों की प्रतिनिधि कमेटी की बैठक करवाई। गिलहोत्रा के अनुसार, चर्चा के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि यह मामला केंद्र सरकार और रक्षा मंत्रालय से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसका अंतिम समाधान दिल्ली स्तर पर ही संभव है। उन्होंने बताया कि राज्यपाल 6 जुलाई को दिल्ली जा रहे हैं और उन्होंने यह मुद्दा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के समक्ष रखने का भरोसा दिया है। साथ ही किसानों की ओर से राज्यपाल को फाजिल्का आकर जमीनी स्थिति देखने का निमंत्रण भी दिया गया है। धरने का नेतृत्व कर रहे फाजिल्का मार्केट कमेटी के चेयरमैन धरने का नेतृत्व कर रहे फाजिल्का मार्केट कमेटी के चेयरमैन एवं किसान नेता परमजीत सिंह नूरशाह ने बताया कि प्रस्तावित डिफेंस बांध करीब 245 फुट चौड़ा, 35 फुट ऊंचा और लगभग 90 किलोमीटर लंबा बनाया जा रहा है, जो फिरोजपुर तक जाएगा। उनका दावा है कि इस बांध के निर्माण से करीब 40 से 42 गांव प्रभावित होंगे। किसानों का कहना है कि भविष्य में बाढ़ की स्थिति बनने पर इस क्षेत्र को भारी नुकसान हो सकता है और कई छोटे किसानों की जमीन भी बांध निर्माण की जद में आ जाएगी। किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के नेता कुलविंदर सिंह ने कहा कि कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी किसानों से मिल चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। किसानों को उम्मीद है कि राज्यपाल के माध्यम से मामला दिल्ली पहुंचने के बाद उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार होगा। फिलहाल सरहदी क्षेत्र में किसानों का पक्का मोर्चा लगातार जारी है और सभी की नजरें अब केंद्र सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।
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