पुलिस SI भर्ती घोटाले के आरोपी को अग्रिम जमानत: जांच में शामिल होकर कराना होगा पासपोर्ट जमा; कंप्यूटर हैक कर पेपर सॉल्व करते – Chandigarh News
पंजाब पुलिस सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती परीक्षा में ऑनलाइन पेपर हैकिंग और सॉल्विंग रैकेट से जुड़े आरोपी विजय लाठवाल को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से राहत मिली है। हाईकोर्ट ने आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका मंजूर करते हुए उसे जांच में शामिल होने और अपना पासपोर्ट जमा कराने के निर्देश दिए हैं। मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि आरोपी को जांच एजेंसी के साथ पूरा सहयोग करना होगा और अदालत की अनुमति के बिना वह देश छोड़कर बाहर नहीं जा सकेगा। यह पूरा मामला पटियाला के अनाज मंडी थाना में 16 सितंबर 2021 को दर्ज एफआईआर नंबर-240 से जुड़ा हुआ है। पुलिस ने इस मामले में धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक साजिश और आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया था। एफआईआर में आईपीसी की धारा 420, 465, 468, 471, 120-बी और 409 के अलावा आईटी एक्ट की धारा 66 और 66-डी को शामिल किया गया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, इस भर्ती घोटाले में अब तक करीब 17 लोगों को आरोपियों को नामजद किया जा चुका है। इनमें सुखदीप सिंह उर्फ लाली, गुरप्रीत सिंह, हरदीप सिंह सहित कई अन्य नाम शामिल हैं। पंजाब पुलिस भर्ती प्रक्रिया में सामने आए इस कथित को राज्य की सबसे चर्चित भर्ती घोटोलो में से एक माना गया है और मामले की जांच अभी भी जारी है। अंबाला के कंप्यूटर सेंटर से कथित तौर पर किया गया था पेपर हैक यह मामला पंजाब पुलिस की सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा में ऑनलाइन प्रश्नपत्रों को हैक कर उन्हें हल करने से जुड़े एक बड़े रैकेट से संबंधित है। जांच के दौरान गिरफ्तार सह-आरोपी अंकित कुमार ने पुलिस को दिए बयान में खुलासा किया था कि अंबाला कैंट के इंडस्ट्रियल एरिया स्थित जैन भारती पब्लिक स्कूल कंप्यूटर सेंटर में बैठकर कंप्यूटर सिस्टम हैक किए गए थे। पुलिस जांच के अनुसार, स्क्रीन शेयरिंग तकनीक के जरिए परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों के कंप्यूटर सिस्टम तक पहुंच बनाई जाती थी और फिर बाहर बैठे लोग प्रश्नपत्र हल कर रहे थे। प्रति उम्मीदवार एक लाख रुपये लेने का आरोप पुलिस जांच में यह भी सामने आया था कि इस पूरे खेल के लिए उम्मीदवारों से भारी रकम वसूली जाती थी। सह-आरोपी अंकित कुमार ने अपने बयान में कहा था कि उसने पेपर सॉल्व करवाने के एवज में सह-आरोपी लवनिश गुप्ता को प्रति उम्मीदवार करीब एक लाख रुपये का भुगतान किया था। जांच एजेंसियों के अनुसार, भर्ती परीक्षा में शामिल कुछ अभ्यर्थियों को इस अवैध नेटवर्क के माध्यम से फायदा पहुंचाने की कोशिश की गई थी। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, 28 सितंबर 2021 को दर्ज बयानों में यह आरोप लगाया गया था कि कंप्यूटर हैक होने के बाद दीपक चौधरी, मोहित लाठवाल और विजय लाठवाल मिलकर ऑनलाइन प्रश्नों को हल करते थे और उनके उत्तर संबंधित उम्मीदवारों तक पहुंचाए जाते थे। हालांकि विजय लाठवाल की ओर से इन आरोपों से इनकार किया गया है। हाईकोर्ट में बचाव पक्ष ने रखीं ये दलीलें सुनवाई के दौरान विजय लाठवाल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आर.एस. मलिक ने अदालत में कई महत्वपूर्ण दलीलें पेश कीं। बचाव पक्ष ने कहा कि विजय लाठवाल की भूमिका केवल प्रश्नों को हल करने तक सीमित बताई गई है और उसका कंप्यूटर हैकिंग या तकनीकी छेड़छाड़ में कोई सीधे योगदान नहीं था। इसके अलावा अदालत को बताया गया कि इसी मामले में सह-आरोपी और विजय के भाई मोहित लाठवाल को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से पहले ही 24 मई 2024 को अग्रिम जमानत मिल चुकी है। ऐसे में एक जैसे आधार पर विजय लाठवाल को भी राहत मिलनी चाहिए। राज्य सरकार की ओर से पेश सरकारी वकील ने भी इन तथ्यों का विशेष विरोध नहीं किया। हाईकोर्ट ने लगाईं कई सख्त शर्तें यदि आरोपी जांच में सहयोग नहीं करता या अदालत के समक्ष दी गई जानकारी गलत पाई जाती है, तो पुलिस उसकी जमानत रद्द कराने के लिए एप्लीकेशन लगा सकती है।
Source link

