पंजाब के किसान पक्का मोर्चा क्यों नहीं लगा पाए?: हरियाणा सरकार ने 2 गलतियां नहीं दोहराईं, किसान 4 वजहों से संतुष्ट हुए; जानिए पूरी इनसाइड स्टोरी – Patiala News

पंजाब के किसान पक्का मोर्चा क्यों नहीं लगा पाए?:  हरियाणा सरकार ने 2 गलतियां नहीं दोहराईं, किसान 4 वजहों से संतुष्ट हुए; जानिए पूरी इनसाइड स्टोरी – Patiala News


भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते (FTA) के विरोध में पंजाब से दिल्ली कूच कर रहे किसानों को हरियाणा सरकार ने शंभू बॉर्डर पर बैरिकेड्स लगाकर रोक दिया। इसके बाद करीब 5 घंटे उठापटक चली। फिर किसान नेताओं ने हरियाणा सरकार और प्रशासन से बातचीत क

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लगभग पूरे दिन चले इस ड्रामे के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इस बार किसान पक्का मोर्चा लगाने में कामयाब क्यों नहीं हुए? किसानों ने पुलिस से भिड़ने की कोशिश क्यों नहीं की और पिछली बार की तरह बैरिकेड्स उखाड़कर क्यों नहीं फेंके? आइए जानते हैं कूच टलने के पीछे की कहानी…

हरियाणा सरकार ने कूच को कैसे रोका? 4 पॉइंट्स में जानिए…

  1. किसानों के दिल्ली कूच की सूचना मिलने के तुरंत बाद ही हरियाणा सरकार हरकत में आ गई। उन्होंने किसानों के अंबाला के शंभू बॉर्डर पर पहुंचने से पहले ही बॉर्डर को सील कर दिया। बैरिकेडिंग की, धारा-163 लगाई। इसके साथ ही मौके पर जेसीबी भी तैनात कीं। ये सभी कूच से पहले की तैयारी थीं।
  2. इसके बाद जब किसान बॉर्डर पर पहुंचे तो हरियाणा में अंबाला प्रशासन एक्टिव नजर आया। मामले को गंभीरता से लेते हुए अंबाला के SP अजीत शेखावत ने सबसे पहले किसान नेता सरवन सिंह पंधेर से मुलाकात की। उन्होंने किसानों की बात सुनी। इसके बाद अंबाला के DC अजय सिंह तोमर भी बिना देर किए किसानों से मिलने बॉर्डर पर पहुंचे।
  3. सूत्रों के अनुसार, हरियाणा सरकार ने पंजाब चुनावों को देखते हुए अफसरों को पहले ही सख्त हिदायतें दे दी थीं कि किसानों के साथ सॉफ्ट विहेवियर रखना है और किसानों से लगातार बातचीत करते रहें। अफसरों ने भी सरकार की रणनीति के हिसाब से काम किया और किसानों के शंभू पहुंचते ही उनके साथ बातचीत शुरू कर दी।
  4. पुलिस और प्रशासन ने किसानों की बात फौरन सरकार तक पहुंचाई तो हरियाणा सरकार ने भी फौरन पॉजिटिव एक्शन लेते हुए अपने कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा को शंभू बॉर्डर भेजा। मंत्री ने किसानों से मिलकर बात की और उनकी दो मांगें मानकर कूच समाप्त करने को राजी किया।

हरियाणा सरकार ने पिछली बार की कौन सी गलतियां नहीं दोहराईं?

किसानों को उग्र नहीं होने दिया

हरियाणा सरकार ने 2024 में शंभू बॉर्डर पर पहुंचे किसानों को रोकने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया था। पुलिस ने किसानों को आगे बढ़ने से रोका। शंभू बॉर्डर पर अलग-अलग लेयर की बैरिकेडिंग की। पुलिस लाउडस्पीकर से किसानों को चेतावनी भी दे रही थी। इससे किसान भड़क गए और उन्होंने बैरिकेडिंग उखाड़ने शुरू कर दिए।

किसानों को रोकने के लिए पुलिस ने भी भारी मात्रा में आंसू गैस के गोले, वॉटर कैनन और रबड़ की गोलियों का इस्तेमाल किया था। इससे दर्जनों किसान घायल हुए थे, माहौल बिगड़ा था और किसान वहीं पक्का मोर्चा लगाकर बैठ गए। इस बार हरियाणा पुलिस ने किसानों को भड़काया नहीं, सीधे टेबल टॉक शुरू कर दी। सरकार ने अफसरों को निर्देश दिए कि किसानों से वार्ता करते रहें। इस प्रशासनिक संवेदनशीलता से किसानों को लगा कि उनकी बात सुनी जा रही है।

किसान नेताओं से मिलने शंभू बॉर्डर पहुंचे हरियाणा के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा।

किसान नेताओं से मिलने शंभू बॉर्डर पहुंचे हरियाणा के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा।

मांगों पर तुरंत एक्शन लिया, केंद्रीय मंत्री से मीटिंग की बात भी मानी पिछली बार किसानों की मांगों पर केंद्र और राज्य सरकार के बीच तालमेल की कमी दिखी थी। हरियाणा सरकार ने साफ कर दिया था कि किसानों को किसी भी हाल में आगे बढ़ने नहीं देना है। किसानों की जो डिमांड थी, उन पर सरकार के साथ बहुत देरी से बैठकें हुईं।

इस बार हरियाणा सरकार ने मंत्री को भेजकर किसानों से बातचीत की। किसानों ने अपने नेता गुरनाम सिंह चढूनी को रिहा करने और केंद्रीय मंत्री से मीटिंग करने की डिमांड रखी। राज्य प्रशासन ने केंद्र से तुरंत संपर्क साधा। दिल्ली से केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू का तत्काल सकारात्मक बयान आया और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से 8-10 दिनों के भीतर बैठक कराने का लिखित वादा दे दिया गया।

मामला निपट गया, तब पंजाब पुलिस हरकत में आई हरियाणा सरकार किसानों के आने से पहले ही एक्टिव हो चुकी थी। जैसे ही किसान नेता सरवण पंधेर शंभू बॉर्डर पहुंचे तो अंबाला के SP अजीत सिंह शेखावत ने उनसे मीटिंग कर ली। उन्हें भरोसा भी दे दिया कि हरियाणा के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा और अंबाला के DC अजय तोमर उनसे मिलने शंभू बॉर्डर पर ही आएंगे। मंत्री के आने के कुछ समय पहले ही पटियाला के SSP वरूण शर्मा शंभू बॉर्डर पहुंचे लेकिन तब तक हरियाणा सरकार किसानों से बातचीत का पहला दौरा कंप्लीट कर चुकी थी।

किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने मंत्री के साथ हुई बातचीत की जानकारी दी।

किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने मंत्री के साथ हुई बातचीत की जानकारी दी।

किसानों के इस बार पक्का मोर्चा न लगाने का कारण क्या रहा?

  • प्रशासन ने सकारात्मक रवैया दिखाया: किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि इस बार पुलिस और प्रशासन का रुख टकराव वाला नहीं, बल्कि बेहद सहयोगात्मक और शांतिपूर्ण रहा, जिससे माहौल में तनाव नहीं बढ़ा। उनका कहना है कि प्रशासनिक अधिकारी लगातार उनके संपर्क में रहे और हर अपडेट पर उनके साथ चर्चा करते रहे। पुलिस ने एक बार भी धमकी नहीं दी और न ही ऊंचे स्वर में किसानों के साथ बात की। किसानों ने भी उनके साथ उसी लहजे में बातचीत की।
  • किसान नेताओं की प्रमुख मांगें मानी गईं: पंधेर का कहना है कि किसानों की 2 मुख्य शर्तें थीं- हिरासत में लिए गए किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी व बीएम सिंह की रिहाई और केंद्रीय कृषि मंत्री से बैठक। सरकार ने दोनों मांगें तुरंत स्वीकार कर लीं। पंधेर ने कहा कि हरियाणा सरकार ने 8 से 10 दिनों के भीतर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से किसानों की सीधी वार्ता तय कराने का आधिकारिक आश्वासन दिया है।
  • तैयारी से नहीं गए थे किसान: इसके अलावा किसानों की तैयारी भी पक्का मोर्चा लगाने की नहीं थी। पॉलिटिकल एक्सपर्ट मानते हैं कि पिछली बार के विपरीत इस बार किसान मुख्य रूप से बसों और छोटे वाहनों में सवार होकर आए थे। पिछली बार किसान ट्रैक्टर ट्रालियां लेकर गए थे। उनके पास पूरा सामान था और वे पक्का मोर्चा लगाने के लिए ही निकले थे। इस बार किसानों के पास लंबे समय तक रुकने के लिए राशन, खाना बनाने के बर्तन, टेंट या रात बिताने का सामान मौजूद नहीं था, जिससे तुरंत पक्का मोर्चा लगाना संभव नहीं था।
  • रणनीतिक जीत का एहसास: केंद्रीय मंत्री से सीधी वार्ता का समय मिलने और साथियों की रिहाई के बाद किसान नेताओं ने इसे अपनी पहली रणनीतिक जीत माना और सहमति बनने के बाद शाम साढ़े 4 बजे शांतिपूर्ण ढंग से लौटने का फैसला किया।

दिल्ली कूच और शंभू बॉर्डर पर घटनाओं की टाइम लाइन

  • शंभू बॉर्डर सील (सुबह 5 से साढ़े 5 बजे तक): श्री फतेहगढ़ साहिब और पंजाब के विभिन्न हिस्सों से किसानों का बड़ा काफिला दिल्ली में आयोजित होने वाली किसान महापंचायत में शामिल होने के लिए शंभू बॉर्डर की ओर बढ़ा। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हरियाणा पुलिस ने सुबह करीब साढ़े 5 बजे शंभू बॉर्डर को मल्टी-लेयर बैरिकेडिंग और घग्गर नदी पर तारबंदी कर सील कर दिया। आम जनता की सुविधा के लिए ट्रैफिक एडवाइजरी जारी कर रास्तों को डायवर्ट कर दिया गया।
  • किसानों का जमावड़ा और बयानबाजी (सुबह 10 से साढ़े 11 बजे तक): शंभू बॉर्डर पर सैकड़ों किसान जुटे। किसान नेता सरवन सिंह पंढेर ने कहा कि किसान शांतिपूर्ण ढंग से दिल्ली जाना चाहते हैं और वे प्रशासन से वार्ता के लिए तैयार हैं। उन्होंने किसी भी प्रकार के टकराव से इनकार किया। इसी दौरान सूचना मिली कि किसान नेता चढूनी व अन्य को गिरफ्तार कर लिया है।
  • मंत्री मिलने आए (दोपहर 12 से डेढ़ बजे तक): 12 बजे DC अंबाला ने SSP पटियाला को मैसेज किया कि हरियाणा सरकार के मंत्री किसानों को मिलने आ रहे हैं। पटियाला के SSP ने किसान नेताओं को सूचना दी। 12.45 बजे मंत्री श्याम सिंह राणा आए और उन्होंने किसान नेताओं से बात की। किसानों की मांगें मानी।
  • किसान नेताओं की रिहाई, धरना खत्म (दोपहर 2 से 3 बजे): मंत्री से मीटिंग के बाद किसानों ने अपनी मीटिंग शुरू की। किसान नेताओं ने कहा कि अगर सरकार ने किसानों को रिहा कर दिया तो धरना खत्म कर देंगे। इसी दौरान 2.15 बजे किसान नेता चढूनी व अन्य को रिहा किया और उनकी किसानों से वीडियो कॉल पर बात करवाई। उसके बाद किसानों ने धरना खत्म करने का ऐलान किया।

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