निर्जला एकादशी व्रत: मानव का अन्न-जल त्यागकर 24 घंटे का महातप, खुद प्यासे रहकर दूसरे प्राणियों की प्यास बुझाने का पर्व – Ludhiana News

निर्जला एकादशी व्रत: मानव का अन्न-जल त्यागकर 24 घंटे का महातप, खुद प्यासे रहकर दूसरे प्राणियों की प्यास बुझाने का पर्व – Ludhiana News



भास्कर न्यूज | लुधियाना सनातन परंपरा में सबसे कठिन माना जाने वाला निर्जला एकादशी का महाव्रत इस साल 25 जून को रखा जाएगा। ज्येष्ठ महीने की भीषण गर्मी के बीच बिना कुछ खाए और पानी की एक बूंद पिए 24 घंटे का यह कड़ा तप होता है। पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि 24 जून की शाम 06:13 बजे शुरू होगी जो 25 जून की रात 08:10 बजे तक रहेगी। उदय तिथि के चलते मुख्य व्रत 25 जून को ही रखा जाएगा। श्रद्धालु व्रत का पारण अगले दिन 26 जून को सुबह 05:25 से 08:13 बजे के बीच करेंगे। ज्योतिषाचार्या डॉ. पुनीत गुप्ता ने बताया कि एकादशी का नियम दशमी की रात से ही शुरू हो जाता है इसलिए व्रती को सूर्योदय से लेकर अगले दिन के सूर्योदय तक पूरी तरह निराहार और निर्जल रहना होता है। ‌‌ इस दिन श्रीहरि का श्रृंगार विशेष रूप से पीले फूलों से करने और भोग में मौसमी फल आम चढ़ाने का विधान है। इसके बाद विष्णुसहस्त्रनाम का पाठ किया जाता है। पौराणिक मान्यता है कि जो श्रद्धालु सालभर की सभी 24 एकादशियां नहीं रख पाते वे यदि इस एक व्रत को पूर्ण निष्ठा से कर लें, तो उन्हें समस्त एकादशियों के बराबर पुण्य फल मिल जाता है। महाभारत काल में भीमसेन अपनी तीव्र जठराग्नि के कारण भूख सहन नहीं कर सकते थे तब महर्षि वेदव्यास ने उन्हें इसी एक महाव्रत को करने की युक्ति सुझाई थी जिसके बाद से इसे भीमसेनी एकादशी या पांडव एकादशी भी कहा जाने लगा।



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