तरनतारन में ग्रंथी का 8 दिन बाद मिला शव: आर्थिक तंगी के चलते नहर में लगाई छलांग, 6000 रुपए की नौकरी छोड़ी, बाहर भी काम नहीं मिला – tarn-taran News
तरनतारन में पट्टी के वार्ड नंबर 12 के रहने वाले ग्रंथी सलविंदर सिंह का शव हरिके नहर में कूदने के आठ दिन बाद हरियाणा के मसीता बॉर्डर के पास से बरामद हुआ है। बताया जा रहा है कि चरम आर्थिक तंगी और मानसिक तनाव के कारण उन्होंने यह आत्मघाती कदम उठाया। शुक्रवार को शिवाला रोड स्थित श्मशान घाट में गमगीन माहौल में उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। महज 6,000 रुपये की सैलरी और काम की कमी ने तोड़ा हौसला मृतक की पत्नी सुखविंदर कौर ने बताया कि सलविंदर सिंह पाठ की सेवा करके परिवार का गुजारा चलाते थे। पहले वे एक गुरुद्वारा साहिब में ग्रंथी के रूप में सेवा निभाते थे, जहां उन्हें प्रति माह केवल 6,000 रुपये मिलते थे। इतनी कम आय में घर का खर्च न चलने के कारण उन्होंने वह नौकरी छोड़ दी थी। नौकरी छोड़ने के बाद वे स्वतंत्र रूप से पाठ की सेवा करने लगे, लेकिन वहां भी उन्हें पर्याप्त काम नहीं मिल रहा था। काम न मिलने के कारण वे लंबे समय से गहरे आर्थिक और मानसिक तनाव से जूझ रहे थे। 4 जुलाई को घर से लापता हुए थे सलविंदर सिंह परिजनों के अनुसार, सलविंदर सिंह 4 जुलाई की सुबह करीब 8:30 बजे घर से निकले थे, जिसके बाद वह वापस नहीं लौटे। बाद में हरिके हेड से सूचना मिली कि उन्होंने नहर में छलांग लगा दी है। इसके बाद स्थानीय लोगों और गोताखोरों की मदद से हरिके हेड से लेकर हरियाणा तक लगातार तलाश अभियान चलाया गया। आखिरकार 10 जुलाई को हरियाणा के मसीता बॉर्डर के पास से उनका शव बरामद हुआ। पीड़ित परिवार ने लगाई आर्थिक मदद की गुहार अंतिम संस्कार के मौके पर मृतक की पत्नी सुखविंदर कौर, बहू सुखप्रीत कौर और बेटे ने सिख संगठनों व समाजसेवी संस्थाओं से मदद की भावुक अपील की है। उन्होंने कहा कि घर कमाने वाले मुखिया के चले जाने के बाद अब परिवार की आर्थिक स्थिति अत्यंत दयनीय हो गई है और उनके लिए गुजारा करना बेहद मुश्किल हो रहा है। इस दुखद घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए एक स्थानीय समाजसेवी ने कहा कि आर्थिक तंगी के कारण आम लोगों को ऐसे खौफनाक कदम उठाने पड़ रहे हैं, जो बेहद चिंताजनक है। उन्होंने समूह सिख जत्थेबंदियों और समाजसेवी संस्थाओं से अपील की है कि वे आगे आएं और इस पीड़ित परिवार को हर संभव आर्थिक सहायता प्रदान करें।
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