जमा राशि 9 प्रतिशत ब्याज के साथ लौटाए जेआईटी – Jalandhar News
भास्कर न्यूज | जालंधर इंदिरापुरम में फ्लैट लेने वाले बुजुर्ग अलाटी के हक में जिला उपभोक्ता आयोग का फैसला आया है। जिला आयोग ने जालंधर इंप्रूवमेंट ट्रस्ट को सेवा में कोताही और लापरवाही का दोषी पाते हुए एक बुजुर्ग उपभोक्ता के हक में फैसला सुनाया है। आईटी को आदेश दिया है कि वह शिकायतकर्ता द्वारा जमा करवाई गई पूरी राशि 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ वापस करे। इसके अलावा ट्रस्ट को मानसिक प्रताड़ना के एवज में 30,000 रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। ये फ्लैट 2008 में अलॉट हुआ था। अब करीब 18 साल बीतने के बाद भी ट्रस्ट बुनियादी सुविधाएं देने में जालंधर इंप्रूवमेंट ट्रस्ट पूरी तरह नाकाम रहा। बुजुर्ग अश्वनी कुमार खुराना (60) ने फोरम के समक्ष अपनी दलीलें रखते हुए कहा कि उन्होंने साल 2008 में लकी ड्रा के जरिए इंदिरापुरम स्कीम में ग्राउंड फ्लोर पर एलआईजी फ्लैट नंबर 261-ए बुक किया था। उन्होंने किश्तों में कुल 3,91,000 रुपये की पूरी अदायगी ट्रस्ट को कर दी। जेआईटी के अधिकारियों ने अपने दफ्तर बुलाकर उनसे कब्जे के दस्तावेजों पर दस्तखत तो करवा लिए, लेकिन जब उन्होंने मौके पर जाकर देखा तो वहां केवल कागजी कब्जा था। निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल हुआ था और फ्लैट इंसानों के रहने लायक ही नहीं था। वहां न तो बिजली की सप्लाई थी, न पीने का पानी, न सीवरेज कनेक्शन था और न ही आने-जाने के लिए उचित सड़क बनी थी। बिजली के बुनियादी ढांचे के लिए भी पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन को ट्रस्ट ने तीन साल की देरी से 2012 में फंड जमा करवाया। सुविधाएं न होने के कारण वे एक दिन भी अपने फ्लैट का इस्तेमाल नहीं कर सके और सालों से मानसिक व आर्थिक परेशानी झेल रहे हैं। उपभोक्ता फोरम ने दोनों पक्षों को सुनने और सबूतों को देखने के बाद जेआईटी की दलीलों को पूरी तरह से खारिज कर दिया। फोरम ने पाया कि ट्रस्ट अदालत में ऐसा कोई ठोस सबूत या कंप्लीशन सर्टिफिकेट पेश नहीं कर सका, जिससे साबित हो कि प्रोजेक्ट पूरा हो चुका है। सुप्रीम कोर्ट और स्टेट कमीशन के फैसलों का हवाला देते हुए फोरम ने साफ किया कि बिना कंप्लीशन सर्टिफिकेट और बुनियादी सुविधाओं के कब्जा देना पूरी तरह से अवैध और अधूरा है। आदेश का निचोड़ निकालते हुए जेआईटी को निर्देश दिया है कि वह आदेश की कॉपी मिलने के 45 दिनों के भीतर उपभोक्ता की जमा राशि 9% ब्याज सहित लौटाए, साथ ही 30 हजार रुपये मुआवजा और 10 हजार अदालती खर्च दे। यदि ट्रस्ट 45 दिनों के भीतर आदेश का पालन करने में विफल रहता है, तो उसे तय राशि पर 3 प्रतिशत अतिरिक्त,यानी कुल 12 प्रतिशत वार्षिक की दर से ब्याज चुकाना होगा। दूसरी तरफ, जालंधर इंप्रूवमेंट ट्रस्ट ने अपने वकील के माध्यम से इन आरोपों को खारिज करते हुए दलील दी कि यह शिकायत इस रूप में विचारणीय (मेंटेनेबल) ही नहीं है और इसे खारिज किया जाना चाहिए। ट्रस्ट का दावा था कि फ्लैट का निर्माण कार्य पूरी तरह से मुकम्मल है। जेआईटी ने उलटा उपभोक्ता पर ही आरोप मढ़ते हुए कहा कि शिकायतकर्ता ने खुद ट्रस्ट द्वारा 18 मार्च 2015 को जारी पत्र के बावजूद बढ़ी हुई कीमत की 36,119 रुपये की राशि जमा नहीं करवाई है, इसलिए वे किसी राहत के हकदार नहीं हैं। ट्रस्ट ने यह भी कहा कि उपभोक्ता ने मामले को लेकर उन्हें कोई वैधानिक कानूनी नोटिस भी नहीं दिया था।
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