चंडीगढ़ ओला से कैब बुक की तो 10 हजार चालान: 6 माह के लिए लाइसेंस निलंबित, कैब चालकों के समर्थन में पहुंचे राजा वड़िंग – Chandigarh News
चंडीगढ़ में ओला कैब को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। चंडीगढ़ एसटीए (स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी) की ओर से स्पष्ट किया गया है कि ओला एप्लीकेशन के माध्यम से कैब बुक करने और संचालित करने पर कार्रवाई की जाएगी।प्रशासन के अधिकारियों ने कहा है कि लोग कैब बुक करने के लिए दूसरी अधिकृत कंपनियों की ऐप का इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन ओला ऐप से कैब बुक नहीं कर सकते। अधिकारियों ने कहा कि यदि कोई कैब चालक ओला एप्लीकेशन के माध्यम से सवारी उठाते हुए पाया गया तो उसके खिलाफ मोटर वाहन नियमों के तहत 10 हजार रुपए का चालान किया जाएगा। प्रशासन ने ओला का लाइसेंस छह माह के लिए निलंबित कर दिया है और इसी के तहत यह कार्रवाई की जा रही है। परिवहन विभाग की टीमें विभिन्न स्थानों पर निगरानी कर रही हैं और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई की जा रही है। इधर, ट्राईसिटी में अपनी मांगों को लेकर पिछले 15 दिनों से आंदोलन कर रहे कैब चालकों के समर्थन में अब अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग भी खुलकर सामने आ गए हैं। उन्होंने एक दिन पहले धरना स्थल पर पहुंचकर प्रदर्शनकारी चालकों से मुलाकात की और उनकी समस्याओं को सुना। इसके बाद केंद्र सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन से ड्राइवरों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की। ड्राइवरों का आरोप- कमीशन में जा रही कमाई प्रदर्शन कर रहे कैब चालकों का कहना है कि एग्रीगेटर कंपनियां किराए का बड़ा हिस्सा कमीशन के रूप में काट रही हैं। उनका आरोप है कि कई मामलों में कुल किराए का 30 से 40 प्रतिशत तक हिस्सा कंपनियों के पास चला जाता है। दूसरी ओर डीजल-पेट्रोल और सीएनजी की बढ़ती कीमतें, वाहन की ईएमआई, बीमा, टैक्स और रखरखाव का खर्च लगातार बढ़ रहा है। चालकों का कहना है कि उन्हें प्रतिदिन 14 से 16 घंटे तक वाहन चलाना पड़ता है, लेकिन इसके बावजूद पर्याप्त आय नहीं हो पाती। इससे उनके परिवारों का खर्च चलाना मुश्किल होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि आर्थिक दबाव के कारण कई ड्राइवर मानसिक और शारीरिक तनाव का भी सामना कर रहे हैं। राजा वड़िंग ने उठाई ड्राइवरों की आवाज धरना स्थल पर पहुंचे राजा वड़िंग ने कहा कि हजारों कैब चालक कंपनियों की नीतियों के कारण आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से इस मुद्दे पर हस्तक्षेप करने की मांग करते हुए कहा कि ड्राइवरों के हितों की रक्षा के लिए ठोस नीति बनाई जानी चाहिए। उन्होंने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गड़करी और गुलाब चंद कटारिया से भी मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की। वड़िंग ने कहा कि सरकार को ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए, जिसमें ड्राइवरों का शोषण न हो और कंपनियों की कार्यप्रणाली पूरी तरह पारदर्शी रहे। 16 दिन से जारी है आंदोलन कैब चालक पिछले 16 दिनों से अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी प्रमुख मांगों में एग्रीगेटर कंपनियों की कमीशन दरों में कमी, उचित किराया नीति लागू करना और कैब सेवाओं के लिए स्पष्ट सरकारी नियम तय करना शामिल है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
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