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- ISRO Opens Astronaut Cadre To Public For Gaganyaan Mission | STEM Experts Join
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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी ISRO ने पहली बार अपने एस्ट्रोनॉट कैडर को आम नागरिकों के लिए खोलने का फैसला किया है। इसरो की एस्ट्रोनॉट सिलेक्शन कमेटी ने इसकी सिफारिश की है। हालांकि इसका क्राइटेरिया अभी जारी नहीं किया गया है।
कमेटी की सिफारिश में कहा गया है कि गगनयान मिशन के अंतरिक्ष यात्रियों के दूसरे बैच में वायुसेना के 6 पायलट के साथ 4 सिविलियन स्पेशलिस्ट शामिल किए जाएं। ये सिविलियन साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ (STEM) बैकग्राउंड से होंगे।
पहला बैच सिर्फ पायलटों का, दूसरे में आम लोगों के एंट्री
- पहला बैच: गगनयान मिशन की शुरुआत के लिए (सिर्फ वायुसेना के पायलट)।
- दूसरा बैच: भविष्य के मिशनों और रिसर्च के लिए (पायलट + आम नागरिक/साइंटिस्ट)।

ट्रेनिंग में साढ़े 4 साल लगेंगे, 2030 तक तैयार होगा दूसरा बैच
एक एस्ट्रोनॉट को चुनने से लेकर उसकी ट्रेनिंग और मिशन की तैयारी में करीब साढ़े 4 साल (54 महीने) का समय लगता है। कमेटी ने लक्ष्य रखा है कि दूसरे बैच को अगले 72 महीनों में और तीसरे बैच को 96 महीनों में पूरी तरह तैयार कर लिया जाए।
चौथे गगनयान मिशन से शुरू होगी सिविलियंस की उड़ान
भले ही दूसरे बैच में सिविलियंस को शामिल किया जा रहा है, लेकिन वे तुरंत अंतरिक्ष में नहीं जाएंगे। कमेटी की योजना के अनुसार, सिविलियन एस्ट्रोनॉट्स को चौथे मानव मिशन से चालक दल का हिस्सा बनाया जाएगा। दुनिया भर में यह परंपरा रही है कि तकनीक के परिपक्व होने से पहले मिलिट्री बैकग्राउंड वाले पायलटों को ही भेजा जाता है, इसके बाद ही नागरिकों की बारी आती है।
गगनयान मिशन के पहले बैच में 4 एस्ट्रोनॉट्स शामिल
मिशन गगनयान ISRO का पहला क्रू वाला स्पेस फ्लाइट प्रोग्राम है, जो 2027 तक लॉन्च होगा। ये 3 दिन का एक मिशन होगा। इसमें 3 एस्ट्रोनॉट्स 400 किमी की यात्रा कर अंतरिक्ष में जाएंगे। उन्हें सुरक्षित पृथ्वी पर वापस लाने के लिए डिजाइन किया गया है।
पहले बैच में चार एस्ट्रोनॉट्स शामिल हैं। ISRO के पहले बैच में इंडियन एयरफोर्स (IAF) के टेस्ट पायलट शामिल थे। इसमें चार एस्ट्रोनॉट्स को सिलेक्ट किया गया था। इन एस्ट्रोनॉट्स को सिलेक्ट करने का उद्देशय पहले क्रू मिशन को सुरक्षित पहुंचाना है।
पहले बैच में फाइटर प्लेन के एयर कमांडर प्रशांत बी नायर, जीपी कैप्टन शुभांशु शुक्ला, जीपी कैप्टन अजीत कृष्णन, जीपी कैप्टन अंगद प्रताप शामिल हुए थे। दूसरे बैच में इंडियन आर्मी के फाइटर जेट के लड़ाकू हेलीकॉप्टर पायलट भी शामिल हो सकते हैं।
तीसरे बैच में 12 एस्ट्रोनॉट में से 10 सिविलियन होंगे
सातवें मिशन के बाद इसरो अपने मिशन की क्षमता को बढ़ाएगा, जिससे एक साथ 3 एस्ट्रोनॉट्स अंतरिक्ष में जा सकेंगे। इसके लिए तीसरे बैच में 12 एस्ट्रोनॉट्स की जरूरत होगी। इस बैच में रेशियो पूरी तरह बदल जाएगा, जिसमें केवल 2 मिशन पायलट और 10 सिविलियन स्पेशलिस्ट शामिल किए जाएंगे।

ये विस्तार भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन की बड़ी योजनाओं से जुड़ा है।
सालाना दो मिशन और 40 एस्ट्रोनॉट्स का पूल बनाने की तैयारी
इसरो अब एक स्थायी एस्ट्रोनॉट कैडर बनाने की दिशा में काम कर रहा है। इसके तहत साल में दो मानव मिशन भेजने की योजना है। कमेटी ने अनुमान लगाया है कि लंबे समय की जरूरतों और अंतरराष्ट्रीय अवसरों को देखते हुए भारत को कुल 40 एस्ट्रोनॉट्स का एक मजबूत पूल तैयार करना चाहिए।
इन्फ्रास्ट्रक्चर और लाइफ सपोर्ट सिस्टम में देरी बड़ी चुनौती
मिशन की तैयारियों के बीच इसरो के सामने इन्फ्रास्ट्रक्चर की चुनौती भी है। फिलहाल देश में एस्ट्रोनॉट्स के लिए केवल एक अस्थायी ट्रेनिंग सेंटर है, स्थायी सुविधा बनाने की प्रक्रिया अभी शुरू होनी बाकी है।
इसके अलावा, पहले मानवरहित मिशन के लिए ‘पर्यावरण नियंत्रण और जीवन रक्षक प्रणाली’ (ECLSS) जैसी महत्वपूर्ण टेक्नोलॉजी का विकास भी अभी पीछे चल रहा है, जिसके बिना अंतरिक्ष में मानव जीवन संभव नहीं है।
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