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ED ने I-PAC डायरेक्टर विनेश चंदेल को गिरफ्तार किया: बंगाल चुनाव से 10 दिन पहले कोयला घोटाले में कार्रवाई; TMC का एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप

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ED ने I-PAC डायरेक्टर विनेश चंदेल को गिरफ्तार किया:  बंगाल चुनाव से 10 दिन पहले कोयला घोटाले में कार्रवाई; TMC का एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप


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नई दिल्ली/कोलकाता3 मिनट पहले

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ED ने गिरफ्तारी के बाद विनेश चंदेल को दिल्ली में जज के सामने पेश कर कस्टडी मांगी।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से 10 दिन पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने I-PAC के डायरेक्टर और को-फाउंडर विनेश चंदेल को गिरफ्तार किया है। उन्हें कोयला घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में सोमवार शाम दिल्ली में पकड़ा गया।

ED की यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में विधानसभा चुनाव होने हैं। राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म I-PAC ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लिए चुनावी रणनीति बनाती है।

पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने सोशल मीडिया पर कहा कि चुनाव से 10 दिन पहले हुई यह कार्रवाई निष्पक्ष चुनाव पर सवाल उठाती है। उनका आरोप है कि ED, CBI और दूसरी एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने के लिए हो रहा है।

बनर्जी ने कहा- अमित शाह और BJP, ज्ञानेश कुमार और अपनी हर एजेंसी के साथ 4-5 मई को बंगाल आएं। बंगाल न डरेगा, न चुप रहेगा और न झुकेगा। यहां दबाव का जवाब विरोध से दिया जाता है।

2 अप्रैल: ED ने चंदेल के ठिकानों पर छापेमारी की

जांच एजेंसी ने दिल्ली में विनेश चंदेल के ठिकानों के अलावा बेंगलुरु में I-PAC के दूसरे को-फाउंडर और डायरेक्टर ऋषि राज सिंह, मुंबई में आम आदमी पार्टी के पूर्व कम्युनिकेशन इंचार्ज विजय नायर के ठिकानों पर भी छापे मारे गए थे।

विनेश चंदेल I-PAC के प्रमुख चेहरों में से एक हैं और इस राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म के संस्थापकों में शामिल हैं। उन्होंने प्रशांत किशोर, प्रतीक जैन और ऋषिराज सिंह के साथ मिलकर इस कंपनी की नींव रखी थी।

अब पूरे मामले को समझिए

8 जनवरी को ED की टीम ने प्रतीक जैन के कोलकाता के गुलाउडन स्ट्रीट स्थित घर और दूसरी टीम सॉल्टलेक स्थित दफ्तर पर छापा मारा था। प्रतीक जैन ही ममता बनर्जी के लिए पॉलिटिकल स्ट्रैटजी तैयार करते हैं।

कार्रवाई सुबह 6 बजे से शुरू हुई थी, लेकिन करीब 11:30 बजे के बाद मामला बढ़ा। सबसे पहले कोलकाता पुलिस कमिश्नर, प्रतीक के आवास पर पहुंचे। कुछ समय बाद सीएम ममता बनर्जी खुद लाउडन स्ट्रीट स्थित उनके घर पहुंच गईं।

ममता वहां कुछ देर रुकीं। जब बाहर निकलीं, तो उनके हाथ में एक हरी फाइल दिखाई दी। इसके बाद वे I-PAC के ऑफिस भी गईं। उन्होंने कहा था- गृहमंत्री मेरी पार्टी के दस्तावेज उठवा रहे हैं। ED ने कहा कि पश्चिम बंगाल में 6 और दिल्ली में 4 ठिकानों पर छापेमारी की गई।

ममता 8 जनवरी की दोपहर 12 बजे I-PAC के डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर पहुंची थीं।

ममता 8 जनवरी की दोपहर 12 बजे I-PAC के डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर पहुंची थीं।

रेड के दौरान फाइलें लेकर चली गईं थी CM ममता

सर्च ऑपरेशन के दौरान, CM ममता बनर्जी अन्य TMC नेताओं के साथ I-PAC ऑफिस पहुंचीं। इसके बाद काफी हंगामा हुआ। ममता ऑफिस से कई फाइलें लेकर बाहर निकलीं और मीडिया से बात की। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय एजेंसी पर हद से ज्यादा दखलंदाजी का आरोप लगाया।

पार्टी ने यह भी आरोप लगाया है कि I-PAC पार्टी के चुनाव रणनीतिकार के रूप में काम करता है और विधानसभा चुनाव से ठीक पहले ED ने गोपनीय चुनाव रणनीति से जुड़ी जानकारी हासिल करने के लिए रेड डाली।

तस्वीर 8 जनवरी की है, जब बंगाल CM ममता ने कोलकाता में ED की छापेमारी के बीच मीडिया को संबोधित किया था।

तस्वीर 8 जनवरी की है, जब बंगाल CM ममता ने कोलकाता में ED की छापेमारी के बीच मीडिया को संबोधित किया था।

I-PAC रेड मामला : 2,742 करोड़ का मनी लॉन्ड्रिंग केस

I-PAC यानी इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी एक पॉलिटिकल कंसल्टेंसी कंपनी है। यह राजनीतिक दलों के लिए बड़े स्तर पर चुनावी अभियानों का काम करती है। कंपनी और उसके डायरेक्टर प्रतीक जैन पर करोड़ों रुपए के कोयला चोरी घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है। CBI ने इस मामले में 27 नवंबर 2020 को FIR दर्ज की थी।

पूरा मामला ₹2,742 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है। आरोप है कि ₹20 करोड़ हवाला के जरिए I-PAC तक ट्रांसफर हुए। ED ने 28 नवंबर 2020 को इसकी जांच शुरू की थी। 8 जनवरी 2026 को ED ने कोलकाता में I-PAC और उसके डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर और ऑफिस पर छापा मारा था।

ED के अफसरों ने प्रतीक के घर और ऑफिस से कई डॉक्यूमेंट्स जब्त किए।

ED के अफसरों ने प्रतीक के घर और ऑफिस से कई डॉक्यूमेंट्स जब्त किए।

ED ने शक्ति के दुरुपयोग की CBI जांच की मांग की

ED ने इस मामले को सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचाते हुए मुख्यमंत्री द्वारा कथित शक्ति के दुरुपयोग की CBI जांच की मांग भी की है। यह मामला फिलहाल अदालत में विचाराधीन है। ED ने आरोप लगाया था कि जांच से जुड़े दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण राज्य प्रशासन की मौजूदगी में वहां से ले जाए गए, जिससे एजेंसी की कार्रवाई में बाधा पहुंची।

वहीं TMC और राज्य सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि ED चुनाव से पहले I-PAC की चुनावी रणनीति से जुड़े दस्तावेज हासिल करने की कोशिश कर रही थी।

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