सीडीएस अनिल चौहान पौड़ी गढ़वाल में अपने पैतृक गांव पहुंचे।
सीडीएस बनने के बाद पहली बार अनिल चौहान आज सुबह पौड़ी गढ़वाल में अपने पैतृक गांव गवाणा पहुंचे। यहां उन्होंने रास्ते में देवलगढ़ स्थित प्रसिद्ध सिद्धपीठ राजराजेश्वरी मंदिर में पूजा-अर्चना की। वे यहां अपने परिवार के साथ गांव में चल रही पूजा में शामिल हु
जानकारी के मुताबिक, CDS का हेलिकॉप्टर सुबह करीब 10 बजे श्रीनगर में उतरा। वे गढ़वाल विश्वविद्यालय के चौरास परिसर स्थित हेलीपैड पर उतरे, जहां स्थानीय लोगों ने उनका माला पहनाकर स्वागत किया।
CDS ने ग्रामीणों के साथ चाय पी और अपने पुराने दोस्ते से मुलाकात की। इस दौरान वे करीब दो घंटे तक गांव में ही रहे। इस दौरे पर उनकी पत्नी अनुपमा चौहान भी साथ मौजूद रहीं। इसके बाद CDS वापस लौट गए।
अनिल चौहान की PHOTOS…
राजराजेश्वरी मंदिर में पूजा करते सीडीएस अनिल चौहान।

गांव गवाणा में फोटो खिंचवाते सीडीएस।

गांव से लौटते समय अनिल चौहान।
एक दिन पहले बद्रीनाथ गए
इससे पहले यानी गुरुवार को वे बद्रीनाथ पहुंचे। यहां उन्होंने चारधाम यात्रा की तैयारियों की ग्राउंड रियलिटी जांची। इस दौरान मंदिर परिसर का निरीक्षण किया और सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इसके बाद हाई लेवल मीटिंग की।
मीटिंग में CDS ने कहा कि यात्रा में आने वाले किसी भी श्रद्धालुओं को परेशानी नहीं आनी चाहिए। सभी तैयारियां समय रहते पूरी कर ली जाएं।

गुरुवार को CDS चौहान बद्रीनाथ पहुंचे थे।
‘बॉर्डर के गांवों का विकास राष्ट्रीय सुरक्षा से सीधा जुड़ा’
इसके बाद CDS ने उत्तराखंड के सीमावर्ती क्षेत्रों चमोली के माणा और हर्षिल का दौरा किया। हर्षिल में उन्होंने हेरिटेज एवं सांस्कृतिक केंद्र की आधारशिला रखी, जिसका उद्देश्य क्षेत्रीय परंपराओं और इतिहास को संरक्षित करना व पर्यटन को बढ़ावा देना है।
चीन सीमा के पास स्थित इन दुर्गम गांवों में तैनात सैनिकों और स्थानीय लोगों से मुलाकात के दौरान जनरल चौहान ने कहा

सीमावर्ती गांव केवल भौगोलिक इकाई नहीं हैं, बल्कि देश की सुरक्षा और सांस्कृतिक पहचान के मजबूत स्तंभ हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि इन गांवों का विकास राष्ट्रीय सुरक्षा से सीधा जुड़ा हुआ है। हर्षिल पहुंचने पर डीएम प्रशांत आर्य ने सीडीएस का स्वागत किया। उन्होंने क्षेत्र में चल रहे सड़क, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं सहित विभिन्न विकास कार्यों की जानकारी दी।

हर्षिल में हेरिटेज एवं सांस्कृतिक केंद्र की आधारशिला रखते CDS।
‘सीमावर्ती गांवों में रहने वाले लोग देश के पहले नागरिक’
चौहान ने केंद्र सरकार की वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत स्थानीय लोगों से संवाद किया और उनकी समस्याएं व सुझाव सुनें। जनरल चौहान ने कहा कि सीमावर्ती गांवों में रहने वाले लोग देश के पहले नागरिक हैं। उनकी भूमिका सुरक्षा के साथ-साथ सांस्कृतिक धरोहर को जीवित रखने में भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने चेतावनी दी

यदि ये गांव खाली होते हैं, तो यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक गंभीर चुनौती बन सकता है।

अपने दौरे के दौरान जनरल चौहान ने बागोरी और मुखवा गांव का भी भ्रमण किया। मुखवा स्थित प्रसिद्ध मंदिर में उन्होंने विशेष पूजा-अर्चना की और क्षेत्र की समृद्ध परंपराओं के संरक्षण की सराहना की। उन्होंने स्थानीय लोगों के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि सीमाओं पर बसने वाले ये गांव देश की आत्मा और शक्ति दोनों का प्रतीक हैं।
अभी तक बने दोनों CDS उत्तराखंड से
भारत के अब तक के दोनों चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले से हैं। देश के पहले CDS जनरल बिपिन रावत पौड़ी के ग्राम सैंज के निवासी थे। उन्होंने 1 जनवरी 2020 को पदभार संभाला और तीनों सेनाओं के एकीकरण की शुरुआत की।
8 दिसंबर 2021 को तमिलनाडु के कुन्नूर में वायुसेना का Mi-17V5 हेलिकॉप्टर क्रैश होने से उनका निधन हो गया। इस हादसे में उनकी पत्नी और 11 अन्य सैन्य अधिकारी भी शहीद हुए थे। मरणोपरांत उन्हें पद्म विभूषण से नवाजा गया।
देश के दूसरे और वर्तमान CDS जनरल अनिल चौहान पौड़ी के ग्राम गवाणा के रहने वाले हैं। उन्होंने 30 सितंबर 2022 को यह जिम्मेदारी संभाली। जनरल चौहान सैन्य अभियानों के विशेषज्ञ माने जाते हैं और वे भी जनरल रावत की तरह ही 11 गोरखा राइफल्स रेजिमेंट से हैं।
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चारधाम यात्रा के शुरू होने से तीन दिन पहले सीडीएस अनिल चौहान आज चमोली स्थित बद्रीनाथ धाम पहुंचे। यहां उन्होंने मंदिर परिसर का निरीक्षण किया और सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लिया। (पढे़ें पूरी खबर)








