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तमिल पार्टी VKC ऑफिस पर वेलुपिल्लई प्रभाकरण की तस्वीर: अलग तमिल राष्ट्र के लिए LTTE बनाया था, राजीव गांधी हत्याकांड के बाद से भारत में बैन

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तमिल पार्टी VKC ऑफिस पर वेलुपिल्लई प्रभाकरण की तस्वीर:  अलग तमिल राष्ट्र के लिए LTTE बनाया था, राजीव गांधी हत्याकांड के बाद से भारत में बैन


17 मिनट पहले

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चेन्नई में शनिवार को VKC ऑफिस के बाहर कापी भीड़ थी, इसी दौरान कैप्चर हुई प्रभाकरण की फोटो।

तमिलनाडु में नई सरकार को लेकर बने सस्पेंस के बीच वेलुपिल्लई प्रभाकरण की तस्वीरें एक बार फिर चर्चा में हैं।

तमिलनाडु की राजनीति में प्रभाकरण और LTTE का मुद्दा नया नहीं है। श्रीलंकाई तमिलों के समर्थन और ‘तमिल पहचान’ की राजनीति की वजह से चुनावों में प्रभाकरण के पोस्टर और कटआउट पहले भी दिखाई देते रहे हैं।

इस बाक 2 सीटें जीतने वाली पार्टी VCK के दफ्तर पर प्रभाकरण की तस्वीरें लगी दिखी है। इसी साल वैको की MDMK ने चुनावी पदयात्रा के उद्घाटन कार्यक्रम में प्रभाकरण की तस्वीर का इस्तेमाल किया था। तब कांग्रेस ने वैचारिक मतभेदों का हवाला देकर दूरी बना ली थी।

1991 में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के बाद LTTE पर भारत में प्रतिबंध लगा दिया गया था। इसके बावजूद तमिलनाडु की कुछ क्षेत्रीय पार्टियां प्रभाकरण को श्रीलंकाई तमिलों के अधिकारों की आवाज के तौर पर पेश करती रही हैं।

आखिर क्या था LTTE?

LTTE यानी लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम श्रीलंका का उग्रवादी संगठन था। यह संगठन श्रीलंका में तमिलों के लिए अलग राष्ट्र ‘तमिल ईलम’ की मांग कर रहा था।

1970 और 80 के दशक में LTTE तेजी से मजबूत हुआ। संगठन ने कई हिंसक हमलों और हत्याओं को अंजाम दिया। 1983 में श्रीलंका में तमिल विरोधी दंगे हुए, जिन्हें ‘ब्लैक जुलाई’ कहा जाता है। इन दंगों के बाद LTTE और ज्यादा मजबूत हुआ और श्रीलंका में गृह युद्ध शुरू हो गया।

1985 में श्रीलंका सरकार और तमिल विद्रोही संगठनों के बीच शांति वार्ता की कोशिश हुई, लेकिन बातचीत सफल नहीं हो सकी।

राजीव गांधी की हत्या का जिम्मेदार था LTTE

29 जुलाई 1987 को भारत और श्रीलंका के बीच शांति समझौता हुआ। इसके बाद भारत ने इंडियन पीस कीपिंग फोर्स (IPKF) को श्रीलंका भेजा। शुरुआत में LTTE ने समझौते का समर्थन किया, लेकिन बाद में भारतीय सेना और LTTE के बीच संघर्ष शुरू हो गया। इसके बाद LTTE भारत के खिलाफ हो गया।

29 जुलाई 1987 को भारत के प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने श्रीलंका के साथ शांति समझौते पर साइन किए थे।

29 जुलाई 1987 को भारत के प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने श्रीलंका के साथ शांति समझौते पर साइन किए थे।

1991 में जब लोकसभा चुनावों के लिए प्रचार करने राजीव गांधी चेन्नई के पास श्रीपेरंबुदूर गए तो वहां LTTE ने राजीव पर आत्मघाती हमला करवाया।

LTTE को दुनिया के सबसे खतरनाक उग्रवादी संगठनों में गिना जाता था। आत्मघाती हमलों के लिए उसने ‘ब्लैक टाइगर्स’ नाम का अलग दस्ता बनाया था। कई रिपोर्ट्स में LTTE को बड़े स्तर पर आत्मघाती हमलों की रणनीति अपनाने वाले शुरुआती संगठनों में भी माना गया है।

चुनावी रैली में हुई थी राजीव गांधी की हत्या

यह तस्वीर राजीव गांधी की हत्या के बाद अगले दिन की है। उनका शव तमिलनाडु से दिल्ली लाया गया था, जहां उनका अंतिम संस्कार हुआ था।

यह तस्वीर राजीव गांधी की हत्या के बाद अगले दिन की है। उनका शव तमिलनाडु से दिल्ली लाया गया था, जहां उनका अंतिम संस्कार हुआ था।

21 मई 1991 को पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी तमिलनाडु के श्रीपेरंबुदूर में चुनाव प्रचार के लिए पहुंचे थे। इसी दौरान LTTE की आत्मघाती हमलावर धनु ने उन्हें माला पहनाई और पैर छूने के दौरान कमर पर बंधे विस्फोटकों में ब्लास्ट कर दिया।

धमाके में राजीव गांधी समेत 16 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 45 लोग घायल हुए थे। जांच में LTTE की भूमिका सामने आने के बाद भारत सरकार ने संगठन पर प्रतिबंध लगा दिया था।

श्रीलंका में मारा गया था प्रभाकरण

श्रीलंका की सरकार के मुताबिक, LTTE चीफ प्रभाकरन 17 मई, 2009 को श्रीलंकाई सेना के एक ऑपरेशन में मारा गया था। उस समय श्रीलंका के सैनिक उसे पकड़ने की कोशिश कर रहे थे। अगले दिन उसका शव मीडिया को दिखाया गया था

प्रभाकरन की मौत के एक हफ्ते बाद LTTE के प्रवक्ता सेल्वारासा पथ्मनाथान ने उसके मारे जाने की बात मानी थी। दो हफ्ते बाद DNA टेस्ट के हवाले से प्रभाकरन के शव की पहचान पुख्ता की गई थी। श्रीलंका की सेना के ऑपरेशन के दौरान ही प्रभाकरन के बेटे एंथनी चार्ल्स की भी मौत हुई थी।

18 मई 2009 को LTTE चीफ प्रभाकरन की मौत के साथ ही श्रीलंका सरकार ने LTTE के खात्मे की घोषणा की थी।

18 मई 2009 को LTTE चीफ प्रभाकरन की मौत के साथ ही श्रीलंका सरकार ने LTTE के खात्मे की घोषणा की थी।

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