सज्जन कुमार की शोक यात्रा ने भाजपा में विवाद खड़ा किया; नितिन नबीन ने 3 दिल्ली सांसदों को फटकारा
Kamal Singh|Newsdesk7
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नई दिल्ली, 30 अगस्त 2026: पूर्व कांग्रेस नेता सज्जन कुमार के निवास पर तीन भाजपा सांसदों की शोक यात्रा ने भाजपा के भीतर एक आंतरिक विवाद को जन्म दिया है, जिसमें पार्टी अध्यक्ष नितिन नाबिन ने सांसदों को बुलाया और उनके निर्णय पर तीव्र असंतोष व्यक्त किया है।
नई दिल्ली, 30 अगस्त 2026: तीन भाजपा सांसदों द्वारा पूर्व कांग्रेस नेता सज्जन कुमार के निवास पर शोक यात्रा ने भाजपा के भीतर आंतरिक विवाद को जन्म दिया है, जिसमें पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन ने सांसदों को बुलाकर उनके निर्णय पर तीव्र असंतोष व्यक्त किया।
तीन सांसद — कमलजीत सेहरावत, रामवीर सिंह बिधुड़ी और योगेंद्र चंदोलिया — कुमार की मृत्यु के बाद उनके परिवार से मिलने और शोक व्यक्त करने के लिए उनके घर गए। पार्टी के स्रोतों के अनुसार, नबीन ने उन्हें बताया कि उन्हें यह यात्रा नहीं करनी चाहिए थी और उनके व्यवहार की व्याख्या मांगी।
**तीन भाजपा सांसद कौन हैं?**
संबंधित सांसद हैं:
- रामवीर सिंह बिधुड़ी — दक्षिण दिल्ली - कमलजीत सेहरावत — पश्चिम दिल्ली - योगेंद्र चंदोलिया — उत्तर पश्चिम दिल्ली
तीनों दिल्ली के ऐसे निर्वाचन क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं जहाँ बड़ी संख्या में सिख और ग्रामीण मूल के लोग निवास करते हैं, जिससे 1984 के सिख विरोधी दंगों की राजनीतिक विरासत के संदर्भ में यह मुद्दा विशेष रूप से संवेदनशील बन गया है।
**यात्रा ने विवाद क्यों उत्पन्न किया?**
सज्जन कुमार, पूर्व कांग्रेस सांसद, 20 अगस्त 2026 को 1984 के सिख विरोधी दंगों से उत्पन्न मामलों में आजीवन कारावास की सजा के दौरान मृत्यु हो गई। उन्हें उन मामलों में दोषी ठहराया गया था जहाँ हिंसा के दौरान सिखों की हत्या हुई थी, जो तब के प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुई थी।
भाजपा ने ऐतिहासिक रूप से 1984 के हिंसा के पीड़ितों के लिए न्याय की मांग का समर्थन किया है। इस पृष्ठभूमि में, तीन भाजपा सांसदों द्वारा कुमार के परिवार से मिलने और शोक व्यक्त करने का निर्णय पार्टी नेतृत्व द्वारा राजनीतिक और भावनात्मक रूप से संवेदनशील माना गया।
**नितिन नबीन ने सांसदों को बुलाया**
भाजपा के स्रोतों के अनुसार, नितिन नबीन ने तीनों सांसदों को बुलाया और अपना असंतोष व्यक्त किया।
पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट रूप से कहा कि सांसदों को कुमार के निवास पर नहीं जाना चाहिए था। इन तीन विधायकों को उनके व्यवहार की व्याख्या करने के लिए भी कहा गया।
यह विकास इस समय आया है जब भाजपा 1984 के दंगों और पीड़ितों के परिवारों की चिंताओं पर एकसमान रुख बनाए रखने की कोशिश कर रही है।
**भाजपा का कहना है यात्रा व्यक्तिगत थी**
भाजपा ने स्पष्ट किया कि तीनों सांसद व्यक्तिगत रूप से कुमार के निवास पर गए थे और वे पार्टी का प्रतिनिधित्व नहीं कर रहे थे।
भाजपा प्रवक्ता आर.पी. सिंह ने कहा कि यह यात्रा संगठन की ओर से नहीं की गई थी।
हालाँकि, पार्टी अध्यक्ष द्वारा बाद में उठाए गए कदमों से यह स्पष्ट होता है कि नेतृत्व ने इस यात्रा को पर्याप्त गंभीर माना और स्पष्टीकरण की माँग की।
**एच.एस. फूलका ने सांसदों की आलोचना की**
इस यात्रा की तीखी आलोचना भाजपा नेता और प्रमुख वकील एच.एस. फूलका ने भी की, जो 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों के कानूनी संघर्ष से लंबे समय से जुड़े रहे हैं।
फूलका ने सांसदों की यात्रा की निंदा की और कहा कि सहानुभूति केवल पीड़ितों और उनके परिवारों के लिए ही रखी जानी चाहिए। उन्होंने तीनों सांसदों के बहिष्कार की भी अपील की।
**पंजाब भाजपा ने भी यात्रा की निंदा की**
यह विवाद पंजाब में विशेष महत्व रखता है, जहाँ 1984 के दंगों की यादें अभी भी गहरी संवेदनशीलता रखती हैं।
पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवाल सिंह धिल्लों ने सांसदों की यात्रा को “दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण” कहा और कहा कि पंजाब भाजपा का इस मामले में कोई संबंध नहीं है।
धिल्लों ने कहा कि कुमार के प्रति सहानुभूति दिखाना उन परिवारों के लिए कष्टदायक है जिन्होंने 1984 की हिंसा में अपने रिश्तेदार खोए।
**2027 के पंजाब चुनावों से पहले राजनीतिक महत्व**
यह विवाद एक राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण समय में आया है, क्योंकि 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव निकट आ रहे हैं।
1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़ी मुद्दे पंजाब में अभी भी महत्वपूर्ण राजनीतिक वजन रखते हैं। इसलिए भाजपा की इस यात्रा पर प्रतिक्रिया को निकटता से देखा जा रहा है, विशेषकर जब पार्टी राज्य में अपनी राजनीतिक उपस्थिति बढ़ाने की कोशिश कर रही है।
यह घटना 1984 की हिंसा से जुड़े व्यक्तियों के प्रति सार्वजनिक इशारों की संवेदनशीलता को भी उजागर करती है।
**सज्जन कुमार की कानूनी विरासत**
सज्जन कुमार दो समवर्ती आजीवन कारावास की सजा का निर्वाह कर रहे थे, जो 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े मामलों से संबंधित थी, जब वह मृत्यु को प्राप्त हुए।
उनकी मृत्यु और इसके बाद हुई शोक यात्राओं ने फिर से इन मामलों, पीड़ितों और न्याय की लंबी माँग को राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में लाया है।
**मुख्य बिंदु**
- तीन दिल्ली भाजपा सांसदों ने सज्जन कुमार के परिवार से उनकी मृत्यु के बाद मुलाकात की। - सांसद थे कमलजीत सेहरावत, रामवीर सिंह बिधुड़ी और योगेंद्र चंदोलिया। - भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन ने उन्हें बुलाकर डाँटा। - पार्टी ने सांसदों से उनके व्यवहार के स्पष्टीकरण की माँग की। - भाजपा ने कहा कि यात्रा व्यक्तिगत तौर पर की गई थी। - एच.एस. फूलका ने इस यात्रा की कड़ी आलोचना की। - पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवाल सिंह धिल्लों ने भी इस कदम की निंदा की। - सज्जन कुमार का निधन 20 अगस्त को हुआ, जब वे 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़ी आजीवन सजा का निर्वाह कर रहे थे।
**निष्कर्ष**
सज्जन कुमार की शोक यात्रा को लेकर उत्पन्न विवाद ने तीन दिल्ली भाजपा सांसदों को प्रकाश में ला दिया है और पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन की कड़ी प्रतिक्रिया को उत्पन्न किया है। भाजपा का सार्वजनिक रूप से इस कदम से दूरी बनाना उसके भविष्य के राजनीतिक रणनीतियों में एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।