ED ने नितिन गोहिल के खिलाफ FIR दर्ज करने के लिए पंजाब पुलिस पर दबाव डाला, नई इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य भेजे
Kamal Singh|Newsdesk7
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चंडीगढ़, 2 सितंबर, 2026: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने तीसरी बार पंजाब पुलिस को नितिन गोहिल और अन्य के खिलाफ एक अनुमानित मनी‑लॉन्ड्रिंग संबंधी मामले में एफआईआर दर्ज करने का अनुरोध किया है, जिससे पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में इस मामले की अगली सुनवाई से पहले दबाव बढ़ रहा है।
चंडीगढ़, 2 सितंबर, 2026: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने तीसरी बार पंजाब पुलिस को नितिन गोहिल और अन्य लोगों के खिलाफ एक कथित मनी लॉन्ड्रिंग संबंधी मामले में एफआईआर दर्ज करने को कहा है, जिससे पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में इस मामले की अगली सुनवाई से पहले दबाव बढ़ रहा है।
अपनी नवीनतम पत्राचार में, 31 अगस्त को तिथि वाली, ED ने अतिरिक्त इलेक्ट्रॉनिक सामग्री भी प्रदान की, जिसमें चैट्स और स्क्रीनशॉट्स की स्पष्ट प्रतियां, प्रमाणित इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और अपनी जांच के दौरान दर्ज किया गया एक बयान शामिल है।
**तीसरा पत्र पंजाब पुलिस को**
ED का नवीनतम पत्र AIG (जांच), पंजाब ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन को संबोधित था, जो 28 अगस्त को तिथि वाले पंजाब पुलिस के संचार के जवाब में भेजा गया था।
एजेंसी ने पहले 30 जुलाई और 7 अगस्त को पंजाब डीजीपी को पत्र लिखा था, जिसमें प्रीवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) की धारा 66(2) के तहत साझा की गई जानकारी के आधार पर FIR दर्ज करने का अनुरोध किया गया था।
**ED ने आगे की प्री‑FIR सत्यापन की आवश्यकता को खारिज किया**
पंजाब पुलिस ने ED से पूर्ण रिकॉर्ड, मूल इलेक्ट्रॉनिक डेटा, चेन‑ऑफ़‑कस्टडी दस्तावेज़ और बयानों सहित सभी सामग्री प्रदान करने को कहा था, और एक अधिकृत ED अधिकारी की डिप्यूटेशन की भी मांग की थी।
ED ने तर्क दिया कि उसने जो सामग्री साझा की थी, वह पहले ही जांची, मूल्यांकित और पंजाब पुलिस को भेजी जा चुकी है, और अतिरिक्त प्रमाणन को FIR दर्ज करने की शर्त नहीं बनाना चाहिए जहाँ जानकारी एक काबिल-परिचय अपराध का संकेत देती है।
**अतिरिक्त चैट्स, स्क्रीनशॉट्स और प्रमाणित रिकॉर्ड**
नवीनतम संचार पहले के पत्राचार से आगे बढ़ता है।
ED ने अपनी सामग्री में स्पष्ट प्रतियां, चैट्स, स्क्रीनशॉट्स और अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, साथ ही भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 की धारा 63 के तहत आवश्यक प्रमाणपत्र जोड़े हैं।
इसने गोहिल से संबंधित अपनी PMLA जांच के दौरान दर्ज किए गए एक बयान को भी अग्रेषित किया है।
**ED ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला दिया**
एजेंसी ने अपने पक्ष में दो प्रमुख सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों का हवाला दिया।
इसने ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार का उल्लेख किया, जिसने काबिल-परिचय अपराध की जानकारी मिलने पर FIR दर्ज करने के सिद्धांत स्थापित किए।
ED ने विजय मदनलाल चौधरी और अन्य बनाम केस का भी उल्लेख किया, यह तर्क देते हुए कि PMLA की धारा 66(2) एक एजेंसी से दूसरी एजेंसी को आवश्यक कार्रवाई के लिए जानकारी साझा करने का तंत्र है।
**उच्च न्यायालय की सुनवाई 3 सितंबर**
यह मुद्दा पहले ही पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में CWP‑PIL‑238‑2026 के तहत जांचा जा रहा है, जिसमें भ्रष्टाचार के आरोप और स्वतंत्र जांच की मांग शामिल है।
अदालत ने ED के संचार प्राप्त करने के बाद उठाए गए कदमों पर पंजाब सरकार की प्रतिक्रिया मांगी है। यह मामला 3 सितंबर, 2026 को अपनी अगली सुनवाई के लिए निर्धारित है।
ED ने विशेष रूप से पंजाब पुलिस से अगली सुनवाई से पहले FIR दर्ज करने का आग्रह किया है।
**क्या आरोप हैं?**
अभियोजन में एक कथित नेटवर्क शामिल है जो सरकारी ट्रांसफर, पोस्टिंग और संबंधित आधिकारिक मामलों पर प्रभाव डालता है।
ये आरोप अभी तक सिद्ध नहीं हुए हैं, और कोई भी आपराधिक दायित्व जांच और बाद की न्यायिक कार्यवाही पर निर्भर करेगा।
**तीसरे पत्र का महत्व क्यों है**
नवीनतम विकास ने पंजाब पुलिस पर दबाव बढ़ा दिया है क्योंकि ED ने अब:
1. 30 जुलाई को अपनी जानकारी भेजी। 2. 7 अगस्त को फॉलो‑अप किया। 3. 31 अगस्त को अतिरिक्त इलेक्ट्रॉनिक सामग्री प्रस्तुत की और फिर से तुरंत FIR दर्ज करने की मांग की।
ED ने यह भी चेतावनी दी है कि देरी से साक्ष्य नष्ट या छेड़छाड़ का जोखिम बढ़ सकता है, जिससे त्वरित कार्रवाई आवश्यक हो जाती है।
**राजनीतिक प्रतिक्रिया**
विवाद पंजाब में एक राजनीतिक मुद्दा भी बन चुका है।
SAD के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बड़ाल ने सवाल उठाया है कि ED के तीन संचार और अतिरिक्त साक्ष्य प्रस्तुत करने के बावजूद अभी तक FIR क्यों नहीं दर्ज किया गया।
राजनीतिक आरोप, हालांकि, आपराधिक जांच से अलग हैं, और मामले में नामित व्यक्तियों के खिलाफ दावे अभी तक अदालत द्वारा स्थापित नहीं हुए हैं।
**आगे क्या होगा?**
तत्काल फोकस अब पंजाब पुलिस की प्रतिक्रिया और 3 सितंबर को पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में राज्य सरकार की स्थिति पर है।
ED बिना किसी और देरी के FIR दर्ज करना चाहता है, जबकि पंजाब पुलिस ने आगे बढ़ने से पहले अतिरिक्त रिकॉर्ड मांगे थे।
उच्च न्यायालय की सुनवाई राज्य प्राधिकारियों द्वारा उठाए गए कदमों और जांच के अगले चरण पर अधिक स्पष्टता प्रदान कर सकती है।
**मुख्य बिंदु**
- ED ने नितिन गोहिल और अन्य लोगों के खिलाफ FIR की मांग करते हुए पंजाब पुलिस को अपना तीसरा पत्र भेजा। - पहले के संचार 30 जुलाई और 7 अगस्त को भेजे गए थे। - नवीनतम पत्र 31 अगस्त, 2026 को तिथि वाला है। - ED ने अतिरिक्त चैट्स, स्क्रीनशॉट्स और प्रमाणित इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड प्रदान किए। - पंजाब पुलिस ने मूल इलेक्ट्रॉनिक डेटा, चेन‑ऑफ़‑कस्टडी रिकॉर्ड और…