ChatGPT से फर्जी शिकायत बनाकर STO को ब्लैकमेल किया: डीजीपी के रीडर ओपी राणा रिश्वत केस, आईफोन गायब, क्लाउड डेटा ने खोल दी पूरी साजिश – Chandigarh News
पंजाब विजिलेंस ब्यूरो के डीजीपी के रीडर (इंस्पेक्टर) ओपी राणा और शातिर बाप-बेटे की जोड़ी ने मिलकर STO अमित कुमार से ठगी की साजिश पूरी फिल्मी स्टाइल में रची थी। उन्होंने अधिकारी को भ्रष्टाचार के झूठे केस में फंसाने और ब्लैकमेल करने के लिए जो शिकायत तैयार की थी, वह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल ‘ChatGPT’ का इस्तेमाल कर तैयार की गई थी। हालांकि आरोपी ने बाद में अपना आईफोन तक नष्ट कर दिया, लेकिन क्लाउड डेटा ने पूरी साजिश उजागर कर दी। यह खुलासा सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में किया है। सीबीआई ने बताया कि मलोट से मोहाली और चंडीगढ़ तक ठगी का पूरा नेटवर्क कैसे संचालित किया गया।सीबीआई की जांच और चार्जशीट के अनुसार, यह पूरी कहानी एक “सुनियोजित आपराधिक साजिश” थी, जिसका एकमात्र उद्देश्य सरकारी मशीनरी और विजिलेंस विभाग के नाम का दुरुपयोग करके लोक सेवकों को “तंग करना” और उनसे अवैध रूप से पैसा ऐंठना था। अब तीन प्वाइंट में जानिए कैसे तैयार की थी फर्जी शिकायत AI से ड्राफ्ट की विजिलेंस कंप्लेंट साजिश के मुख्य आरोपी राघव गोयल ने शिकायतकर्ता अधिकारी को चंगुल में फंसाने के लिए एक बेहद शातिर और आधुनिक तरीका अपनाया। उसने अपने मोबाइल फोन में मौजूद ‘ChatGPT’ (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल) का इस्तेमाल किया। राघव ने इस एआई ऐप को विशेष कमांड (प्रॉम्प्ट) दी, जिसके बाद चैटजीपीटी ने हूबहू पंजाब विजिलेंस ब्यूरो के आधिकारिक पैटर्न पर एक कानूनी ड्राफ्ट तैयार कर दिया। इस झूठी शिकायत में स्टेट टैक्स ऑफिसर (STO) अमित कुमार पर बेहद गंभीर आरोप लगाए गए, जिनमें उनके कार्यकाल के दौरान कथित भ्रष्टाचार, अवैध रूप से पैसे के लेन-देन और करोड़ों रुपये की आय से अधिक संपत्ति बनाने की फर्जी कहानियां बुनी गई थीं, ताकि देखने वाले को यह किसी असली विसलब्लोअर की शिकायत लगे। फर्जी नाम और अधूरी पहचान शिकायत का कानूनी खाका तैयार होने के बाद, राघव गोयल ने इसे पूरी तरह अचूक और असली रूप देने के लिए चैटजीपीटी को दोबारा कस्टमाइज्ड निर्देश दिए। उसने शुरुआत में जनरेट हुए “अशोक कुमार बत्रा” नाम को बदलकर उसकी जगह “रोहित देवगन” नाम का एक पूरी तरह से काल्पनिक (फर्जी) शिकायतकर्ता खड़ा किया। साक्ष्यों को उलझाने के लिए इस शिकायत में एक ऐसा मोबाइल नंबर डाला गया, जिसका इस पूरे मामले से जुड़े किसी भी व्यक्ति से कोई दूर-दूर तक संबंध नहीं था। इतना ही नहीं, जांच एजेंसी को भटकाने के लिए उसमें मलोट, पंजाब का एक अधूरा और अस्पष्ट पता “हरजिंदर सिंह नगर, हरजिंदर नगर” दर्ज किया गया। व्हाट्सएप पर फैलाया जाल 28 अप्रैल 2026 की सुबह इस पूरे डिजिटल षड्यंत्र को अंजाम दिया जा रहा था। सुबह 11:34 बजे चैटजीपीटी पर पहली कमांड देने के बाद, ठीक 11:37 बजे इसकी फाइनल कॉपी तैयार हुई और महज दो मिनट के भीतर 11:38 बजे इस पूरी स्क्रिप्ट को एक आधिकारिक पीडीएफ फाइल में बदल दिया गया, जिसे “eto_gst_complaint.pdf” नाम दिया गया। पीडीएफ तैयार होते ही बिना एक मिनट गंवाए, राघव गोयल ने अपने पर्सनल व्हाट्सएप नंबर से इसे सीधे पंजाब विजिलेंस ब्यूरो के डीजीपी के रीडर इंस्पेक्टर ओपी राणा के आधिकारिक व्हाट्सएप नंबर पर फॉरवर्ड कर दिया। इसी डिजिटल डिलीवरी के साथ ही पीड़ित अधिकारी को ब्लैकमेल करने और करोड़ों रुपये ऐंठने के इस बड़े सिंडिकेट का ऑन-कागज खेल शुरू हो गया। अब ठगी के लिए कैसे बनाई थी स्ट्रेटजी 1. फर्जी शिकायत को बनाया हथियार, डीजीपी दफ्तर में फंसाया जाल चैटजीपीटी से तैयार की गई उस फर्जी शिकायत का इस्तेमाल आरोपियों ने अमित कुमार (STO) को बुरी तरह डराने और मानसिक दबाव में लाने के लिए किया। 29 अप्रैल 2026 को आरोपी विक्की गोयल और राघव गोयल पीड़ित अधिकारी अमित कुमार को अपनी इनोवा गाड़ी में बैठाकर सीधे मोहाली स्थित पंजाब विजिलेंस ब्यूरो के मुख्यालय (विजिलेंस भवन) ले गए। वहां डीजीपी (विजिलेंस) के रीडर इंस्पेक्टर ओ.पी. राणा पहले से इस स्क्रिप्ट का हिस्सा थे। राणा ने अपने रसूख का इस्तेमाल करते हुए STO अमित कुमार को उस फर्जी शिकायत की बस एक छोटी सी झलक दिखाई, ताकि पीड़ित को यकीन हो जाए कि मामला बेहद गंभीर है। इसके बाद राणा ने अमित कुमार से कहा कि “अभी इस पर कोई आधिकारिक कार्रवाई शुरू नहीं हुई है”, और चलते-चलते इशारा कर दिया कि आगे इस शिकायत को कैसे रफा-दफा करना है, यह विक्की और राघव गोयल तुम्हें समझा देंगे। 2. 20 लाख की भारी-भरकम डिमांड और डीजीपी का खौफ विजिलेंस दफ्तर से निकलने के तुरंत बाद राघव और विक्की गोयल पीड़ित STO को लेकर चंडीगढ़ के सेक्टर-30 स्थित सीएसआईआर गेस्ट हाउस पहुंचे। वहां बंद कमरे में दोनों ने अमित कुमार के सामने ₹20 लाख की रिश्वत की बड़ी मांग रख दी। आरोपियों ने दावा किया कि यह मोटी रकम सीधे विजिलेंस के सीनियर अधिकारी को देनी है, तभी यह फाइल बंद होगी। पीड़ित अधिकारी पर रौब जमाने के लिए राघव गोयल ने अपने मोबाइल में डीजीपी के परिवार के साथ अपनी तस्वीरें और सामाजिक मुलाकातों के सबूत भी दिखाए। उन्होंने STO को साफ धमकी दी कि अगर रकम नहीं मिली, तो इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। पीड़ित अधिकारी ने डर और भारी दबाव में आकर ₹5 लाख का इंतजाम करने की बेबसी जताई, लेकिन आरोपी टस से मस नहीं हुए। 3. रिकॉर्डेड बातचीत में खुला राज इस दौरान पीड़ित अधिकारी ने अपनी सूझबूझ से आरोपियों की पूरी बातचीत चुपके से रिकॉर्ड कर ली। 4 मई 2026 की एक रिकॉर्डेड कॉल में, जब अमित कुमार ने केस दर्ज होने का डर जताया, तो राघव गोयल ने बेहद बेबाकी से कहा, “कोई बात नहीं… उन लोगों को मैंने रोक के रखा है, फाइल आगे नहीं बढ़ने दी।” इसके तुरंत बाद राघव ने पीड़ित को भरोसा देने के लिए विजिलेंस के रीडर को व्हाट्सएप पर संदेश भेजा, “सर, जीएसटी वाले का फोन आया था, आपको शाम को मिलकर बताता हूं, फाइल रोक कर रखना।” यह सबूत साफ करता है कि सरकारी तंत्र के भीतर बैठा रीडर ओ.पी. राणा इस ब्लैकमेलिंग सिंडिकेट में पूरी तरह सक्रिय था। 4.13 लाख नकद और फोन में हुई सौदा लगातार दबाव और सीबीआई की बैकएंड वेरिफिकेशन के बीच, 8 मई 2026 को रिश्वत की रकम को लेकर दोबारा मोलभाव हुआ। आखिर में सौदा ₹13 लाख नकद पर तय हुआ। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई; नकदी के साथ-साथ एक बेहद महंगे और प्रीमियम मोबाइल फोन की डिमांड जोड़ दी गई। विजिलेंस के रीडर ओ.पी. राणा ने अपनी पसंद खुद तय की और बाकायदा व्हाट्सएप पर राघव को टेक्स्ट मैसेज भेजा, “Samsung Fold-7, 512 GB”। राघव ने यही मैसेज आगे STO अमित कुमार को फॉरवर्ड कर फोन खरीदने का निर्देश दिया। पीड़ित अधिकारी ने मजबूरी में ₹1,61,000 का सिल्वर कलर का यह फोन खरीदा और उसकी फोटो राघव को भेजी, जिसे रीडर ओ.पी. राणा ने अपने व्हाट्सएप पर अंगूठे का निशान भेजकर हरी झंडी दी थी। चंडीगढ़ के होटल में CBI का जाल, रंगे हाथों दबोचा शिकायतकर्ता अधिकारी ने पूरे मामले की जानकारी सीबीआई को दे दी। इसके बाद 11 मई 2026 को चंडीगढ़ के लग्जरी होटल जेडब्ल्यू मैरियट (JW Marriott) की पार्किंग में सीबीआई ने ट्रैप ऑपरेशन बिछाया। रिश्वत की रकम और मोबाइल फोन लेने के लिए राघव गोयल और विकास गोयल ने अपने ड्राइवर अंकित वाधवा को भेजा। जैसे ही गाड़ी के भीतर ₹13 लाख नकद और Samsung Fold-7 फोन लिया गया, सीबीआई टीम ने अंकित को मौके पर ही रंगे हाथों पकड़ लिया। गिरफ्तारी के तुरंत बाद अंकित ने फोन का स्पीकर ऑन कर राघव गोयल को पुष्टि की और कहा, “सामान ले लिया मैंने… तेरह लाख पूरे हैं।” यह बातचीत भी सीबीआई के सामने हुई। ट्रैप की खबर मिलते ही पूरे गैंग में हड़कंप मच गया। मुख्य आरोपी राघव गोयल और विकास गोयल इनोवा गाड़ी में भागने लगे, लेकिन उन्हें घग्गर टोल प्लाजा के पास पकड़ लिया गया। वहीं, विजिलेंस का रीडर ओ.पी. राणा करीब 20 दिनों तक फरार रहा। जांच के दौरान सामने आया कि राणा ने साजिश में इस्तेमाल अपना iPhone 17 Pro Max जानबूझकर गायब कर दिया और सीबीआई को कई झूठी लोकेशन बताकर गुमराह करने की कोशिश की। हालांकि, सीबीआई की टेक्निकल विंग ने उसका क्लाउड डेटा रिकवर कर लिया। जांच एजेंसी के अनुसार, इसी डेटा से चैटजीपीटी से तैयार की गई फर्जी शिकायत, Samsung Fold-7 की मांग और रिश्वत से जुड़ी पूरी व्हाट्सएप चैट हूबहू बरामद हुई।
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