चंडीगढ़ में ओला टैक्सी-बाइक बैन: प्रशासन ने कंपनी का लाइसेंस 6 महीने के लिए सस्पेंड किया, नियमों का पालन न करने पर कार्रवाई – Chandigarh News
ट्राईसिटी में ओला की टैक्सी, ऑटो और बाइक बैन किए गए हैं। – फाइल फोटो
चंडीगढ़ प्रशासन ने नियमों के उल्लंघन और लोकल ऑफिस बंद होने के कारण ओला (ANI टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड) का एग्रीगेटर लाइसेंस 6 महीने के लिए तुरंत प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है।
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यह कार्रवाई ड्राइवर कल्याण नियमों का पालन न करने और चंडीगढ़ एडमिनिस्ट्रेशन मोटर व्हीकल्स एग्रीगेटर्स रूल्स, 2025 के तहत नोटिस का जवाब न देने के कारण की गई है।
ट्राईसिटी में अब ओला की टैक्सी, ऑटो और बाइकों की सेवाएं प्रतिबंधित हैं और नियमों का उल्लंघन करने पर वाहनों को जब्त किया जा सकता है।
प्रशासन की ओर से पब्लिक नोटिस जारी, इसकी 4 बातें…
- इसे लेकर प्रशासन ने पब्लिक नोटिस भी जारी किया है। इसमें लिखा है- आम जनता को सूचित किया जाता है कि ओला कैब्स के नाम से पहचाने जाने वाले मैसर्स ANI टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड का एग्रीगेटर लाइसेंस तत्काल प्रभाव से यानी 17 जून 2026 से 6 महीने की अवधि के लिए सस्पेंड कर दिया गया है।
- यह केंद्र शासित प्रदेश (UT) चंडीगढ़ में कैब सेवाओं/बाइक टैक्सी सेवा के संचालन का एक प्लेटफॉर्म है। जिन कैब मालिकों ने अपनी कैब ओला कंपनी के साथ जोड़ी हुई हैं, उन्हें सलाह दी जाती है कि वे ओला के तहत अपनी कैब/बाइक टैक्सी को न जोड़ें और न ही चलाएं।
- साथ ही, चंडीगढ़ में ओला एप्लीकेशन के जरिए राइड्स की बुकिंग न लें। ऐसा न करने पर उल्लंघन करने वाले ऑपरेटरों के खिलाफ कानून के मुताबिक सख्त कार्रवाई की जाएगी। उल्लंघन की स्थिति में वाहनों के चालान किए जाएंगे और उन्हें जब्त कर लिया जाएगा।
- आम जनता को भी सलाह दी जाती है कि वे किसी भी असुविधा से बचने के लिए ओला एप्लीकेशन पर चलने वाली कैब की राइड बुक न करें। उनसे अनुरोध है कि वे अपनी आवश्यकताओं के लिए रजिस्टर्ड अन्य ऐप्स का उपयोग करें।
चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से जारी पब्लिक नोटिस…
STA की ओर से जारी किया गया आदेश
स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (STA) ने कंपनी पर बार-बार नोटिस और निर्देशों के बावजूद नियमों का पालन न करने, ड्राइवरों से जुड़ी शिकायतों को नजरअंदाज करने और प्रशासन को जरूरी जवाब न देने के आरोप लगाए हैं।
STA की ओर से जारी आदेश के अनुसार, कंपनी को जनवरी 2024 में एग्रीगेटर लाइसेंस दिया गया था। बाद में चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से लागू किए गए ‘चंडीगढ़ एडमिनिस्ट्रेशन मोटर व्हीकल एग्रीगेटर्स रूल्स-2025’ के तहत सभी एग्रीगेटर कंपनियों को नियमों का पालन करना अनिवार्य किया गया था।
प्रशासन को कैब ड्राइवरों और अन्य स्रोतों से शिकायतें मिली थीं कि कंपनी ड्राइवरों के स्वास्थ्य बीमा, टर्म इंश्योरेंस और प्रशिक्षण जैसी अनिवार्य शर्तों का पालन नहीं कर रही है। आदेश में कहा गया है कि कंपनी को कई बार पत्र और ई-मेल भेजकर नियमों के अनुपालन की रिपोर्ट मांगी गई।
सितंबर 2025 में परिवहन सचिव की अध्यक्षता में बैठक भी हुई, जिसमें कंपनी को नियमों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद कंपनी की ओर से अपेक्षित अनुपालन रिपोर्ट जमा नहीं कराई गई।
बिना बताए एक साल पहले अपने दफ्तर तक किए बंद
नियमों की जांच के लिए गठित समिति ने निरीक्षण के दौरान पाया कि कंपनी करीब एक साल पहले ही अपने स्थानीय कार्यालय को बिना सूचना दिए बंद कर चुकी है। समिति ने मई 2026 में 3 बार कंपनी के स्थानीय पते का दौरा किया, लेकिन कार्यालय संचालित नहीं मिला।
समिति ने इसे नियमों का गंभीर उल्लंघन मानते हुए कड़ी कार्रवाई की सिफारिश की। प्रशासन ने यह भी कहा कि कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, लेकिन निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब नहीं मिला। मई 2026 में आयोजित बैठक में भी कंपनी का कोई प्रतिनिधि शामिल नहीं हुआ।
प्रशासन ने जो रेट तय किया, वह कभी लागू ही नहीं किया
प्रशासन की तरफ से तय किराया दरों और सब्सक्रिप्शन मॉडल को लेकर भी कंपनी से स्पष्टीकरण मांगा गया था, लेकिन जवाब नहीं दिया गया। एक मामले में कंपनी की ओर से ड्राइवर से रिचार्ज करवाने की शिकायत को भी नियमों का उल्लंघन माना गया।
इन सभी तथ्यों को देखते हुए STA के सचिव नितिश सिंगला ने एग्रीगेटर नियम-2025 के तहत प्राप्त अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए कंपनी का लाइसेंस तत्काल प्रभाव से 6 महीने के लिए निलंबित करने के आदेश जारी किए हैं।

कैब कंपनियों की मनमानी के खिलाफ इसी महीने ड्राइवरों ने प्रदर्शन भी किया। – फाइल फोटो
कैब कंपनियों के खिलाफ हुआ था प्रदर्शन
चंडीगढ़ ट्राईसिटी कैब ड्राइवर वेलफेयर एसोसिएशन और अन्य ड्राइवर यूनियनों ने 16 जून तक हड़ताल की। ड्राइवरों ने सेक्टर-25 रैली ग्राउंड और सेक्टर-18 स्थित स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (STA) कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया।
- किराए में बढ़ोतरी की मांग: ड्राइवरों का कहना था कि प्रशासन ने 2025 में कैब किराया ₹25 प्रति किलोमीटर तय किया था। एक साल में CNG के दाम करीब ₹9.50/किलो और पेट्रोल-डीजल के दाम ₹7/लीटर तक बढ़ चुके हैं, जिससे इस पुराने किराए पर गाड़ी चलाना घाटे का सौदा बन गया है। वे किराए को बढ़ाकर ₹35 प्रति किलोमीटर करने की मांग कर रहे थे।
- एग्रीगेटर पॉलिसी 2025 को लागू कराना: ड्राइवरों का आरोप था कि प्रशासन ने ‘एग्रीगेटर पॉलिसी’ तो बना दी, लेकिन इसे जमीन पर पूरी तरह लागू नहीं किया, जिससे ओला-उबर जैसी कंपनियां मनमानी कर रही हैं और भारी कमीशन वसूल रही हैं।
- अवैध बाइक टैक्सी और ‘सफेद नंबर प्लेट’ पर रोक: व्यावसायिक ड्राइवरों की बड़ी शिकायत थी कि ऐप कंपनियां नियमों का उल्लंघन कर निजी (सफेद नंबर प्लेट) कारों और अनाधिकृत बाइक टैक्सियों को व्यावसायिक रूप से चलवा रही हैं, जिससे टैक्स भरने वाले कानूनी ड्राइवरों की रोजी-रोटी प्रभावित हो रही है।
इस हड़ताल के कारण चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला में करीब 50,000 दैनिक यात्री प्रभावित हुए और उन्हें भीषण गर्मी में बसों या ऑटो का सहारा लेना पड़ा। आंदोलन के अंतिम दिन (16 जून) को जब ड्राइवरों ने STA दफ्तर घेरने की कोशिश की, तो पुलिस ने यूनियन प्रधान विक्रम पुंडीर सहित कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया था।
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