जालंधर कैंट विधायक परगट सिंह का सीएम पर आरोप: कहा- अकाल तख्त से टकराव छोड़ें, विधानसभा जैसी हरकतें बंद कर मर्यादा रखें – Jalandhar News
पंजाब की सियासत में एक बार फिर मुख्यमंत्री भगवंत मान के एक कथित वीडियो को लेकर विवाद गहरा गया है। श्री अकाल तख्त साहिब की सर्वोच्चता और मर्यादा पर बात करते हुए एक कांग्रेसी विधायक परगट सिंह ने मुख्यमंत्री को नसीहत दी है। विधायक ने कहा कि फॉरेंसिक जांच में वीडियो के सही (ओरिजिनल) पाए जाने के बाद भी मुख्यमंत्री अपनी गलती मानने के बजाय मुकर रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री पर अकाल तख्त साहिब के साथ सीधा टकराव पैदा करने का आरोप लगाया और कहा कि इस संवेदनशील धार्मिक मुद्दे पर राजनीति करने के बजाय मुख्यमंत्री को विनम्रता दिखाते हुए मर्यादा का पालन करना चाहिए। श्री अकाल तख्त साहिब की सर्वोच्चता विवादित वीडियो के मामले पर बोलते हुए विधायक ने साफ किया कि सिख कौम में श्री अकाल तख्त साहिब की अपनी एक अलग और सर्वोच्च अहमियत है। मुख्यमंत्री ने पहले यह बयान दिया था कि यह वीडियो उनका नहीं है और इसकी चाहे फॉरेंसिक जांच करवा ली जाए। लेकिन, अब जब फॉरेंसिक जांच की रिपोर्ट में यह सामने आ चुका है कि वीडियो के साथ कोई छेड़छाड़ (डॉक्टर या एआई का इस्तेमाल) नहीं की गई है और वह बिल्कुल ओरिजिनल है, तो मुख्यमंत्री अपने बयान से पलट रहे हैं। अब वह कह रहे हैं कि वह उस वीडियो में हैं ही नहीं। इस रवैये को लेकर अब अकाल तख्त साहिब को इस फैसले पर दोबारा नजरसानी (समीक्षा) करने की जरूरत है। मर्यादा का उल्लंघन और विधानसभा का पुराना विवाद विधायक परगट सिंह ने ने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर मर्यादा न रखने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने याद दिलाया कि पंजाब विधानसभा के भीतर भी ऐसा ही वाकया हुआ था, जब कांग्रेस पार्टी ने इस बात पर कड़ा विरोध (प्रोटेस्ट) जताया था कि मुख्यमंत्री कथित तौर पर शराब पीकर सदन में आए थे। कांग्रेस विधायक ने कहा की मुख्यमंत्री को अपनी इस मर्यादा को बनाए रखना चाहिए। अगर हम इस तरह मर्यादा को नीचे गिराते रहेंगे, तो धीरे-धीरे व्यवस्था और धार्मिक संस्थाओं से लोगों का विश्वास पूरी तरह उठ जाएगा। 29 जून को विधायकों को तलब किए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि अगर उन्हें श्री अकाल तख्त साहिब या संबंधित संस्था से कोई बुलावा आता है, तो वे निश्चित रूप से वहां जाएंगे। उन्होंने पहले भी यह स्पष्ट किया था कि इस संवेदनशील मामले में सिख बुद्धिजीवियों (इंटेलेक्चुअल्स) और सिख संस्थाओं से राय ली जानी चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि जिस विषय का हमें पूरा ज्ञान न हो, उस पर धार्मिक विशेषज्ञों से मार्गदर्शन ले लेना ही सही कदम है। ऐसा इसलिए जरूरी है ताकि हमारी किसी गलती की वजह से सिखी की मर्यादा को कोई नुकसान न पहुंचे।
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