पंजाब भाजपा प्रधान के सामने पार्टी को मजबूत करना चुनौती: बरनाला में बैकफुट पर है BJP, रूठे हुए नेताओं को मनाना प्राथमिकता – Barnala News
पंजाब भाजपा के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों के सामने पूरे पंजाब में पार्टी को मजबूत करने की बड़ी चुनौती है, खासकर अपने गृह जिले बरनाला में, जहां भाजपा बैकफुट पर है। पंजाब विधानसभा चुनाव में अब छह महीने से भी कम का समय बचा है। ऐसे में भाजपा आलाकमान ने कैप्टन अमरिंदर सिंह, केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू और सुनील जाखड़ जैसे कांग्रेस से आए बड़े चेहरों के साथ-साथ अपने पुराने कैडर के अश्वनी शर्मा और तरुण चुघ जैसे नेताओं को दरकिनार कर केवल सिंह ढिल्लों पर भरोसा जताया है। ढिल्लों के लिए यह कार्यकाल बेहद चुनौतीपूर्ण रहने वाला है, क्योंकि उनके पास जमीनी स्तर पर काम करने के लिए बहुत कम समय है। पैतृक जिले में भाजपा को खड़ा करना परीक्षा नवनियुक्त प्रधान केवल सिंह के लिए सबसे बड़ी परीक्षा अपने पैतृक जिले बरनाला में भाजपा को फिर से खड़ा करना है। बरनाला में भाजपा इस समय भयंकर गुटबाजी का शिकार है, जिससे पार्टी की स्थिति कमजोर हुई है। पिछले कुछ समय में गुरमीत सिंह हंडियाया और धीरज दद्दाहूर जैसे कई पुराने और वफादार भाजपा नेता पार्टी छोड़कर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी में शामिल हो चुके हैं। ऐसे बिखराव के माहौल में, रूठे हुए नेताओं को मनाना और संगठन को मजबूत करना नए अध्यक्ष के लिए पहली प्राथमिकता होगी। बरनाला में भाजपा का प्रदर्शन रहा खराब राजनीतिक समीक्षकों के अनुसार, पिछले चार लोकसभा और विधानसभा चुनाव में बरनाला जिले के भीतर भाजपा का प्रदर्शन लगातार निराशाजनक रहा है। इन चार में से दो चुनाव खुद नवनियुक्त प्रधान केवल सिंह ढिल्लों हार चुके हैं, जो उनके सामने खड़ी चुनौतियों को और बढ़ा देता है। आइए नजर डालते हैं चुनावी आंकड़ों पर लोकल बॉडी चुनाव में भी नहीं मिले उम्मीदवार, 10 प्रतिशत से कम रहा वोट शेयर हाल ही में संपन्न हुए स्थानीय निकाय (लोकल बॉडी) चुनाव में भाजपा की जमीनी कमजोरी खुलकर सामने आ गई। नगर निगम बरनाला, नगर कौंसिल धनौला, तपा और भदौड़ की अधिकतर सीटों पर भाजपा अपने प्रत्याशी तक खड़े नहीं कर पाई। जिन चुनिंदा सीटों पर भाजपा ने उम्मीदवार उतारे भी, वहां पार्टी को कुल पड़े वोटों में से 10 प्रतिशत से भी कम वोट मिले। नगर निगम बरनाला की कुल 50 सीटों में से भाजपा केवल 7 सीटों पर ही लड़ सकी, जिनमें से दो सीटें तो 20 से भी कम वोटों के अंतर से ब मुश्किल जीती गईं। चंडीगढ़ से होती थी राजनीति, अब ग्राउंड कनेक्टिविटी बढ़ाना एकमात्र रास्ता राजनीतिक विशेषज्ञ सुखचरनप्रीत के विश्लेषण के अनुसार, बरनाला जिले में भाजपा की जमीनी पकड़ (ग्राउंड कनेक्टिविटी) बेहद कमजोर है। जिले में केवल सिंह ढिल्लों के अलावा कोई दूसरा बड़ा स्थापित चेहरा नहीं है। ढिल्लों अपनी प्रधानी के कार्यकाल से पहले भी ज्यादातर समय चंडीगढ़ में बैठकर ही जिले की राजनीति चलाते थे। अब अगर भाजपा को आप, कांग्रेस, अकाली दल (बादल) और मान ग्रुप जैसी मजबूत पार्टियों का मुकाबला करना है, तो नए प्रधान को चंडीगढ़ छोड़ना होगा। गुटबाजी खत्म कर सभी नेताओं को एक मंच पर लाना और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना ही एकमात्र रास्ता है।
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