सिर्फ 1% लागत का स्क्रू, पर इसके बिना रुक जाएगा देश का 100% काम – Amritsar News
एसोसिएशन के वरिष्ठ पदाधिकारियों रंजन अग्रवाल, सुभाष अरोड़ा, महेश भाटिया, संदीप अग्रवाल और नवल गुप्ता ने सरकार से पुरजोर मांग की है कि फैक्ट्रियों और बाजारों में क्वालिटी कंट्रोल के नाम पर हो रही प्रशासनिक सख्ती को तुरंत रोका जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि क्यूसीओ की अनिवार्यता को तब तक के लिए टाला जाए जब तक कि हमारा घरेलू उद्योग पूरी तरह से सक्षम न हो जाए। भास्कर न्यूज | अमृतसर केंद्र सरकार द्वारा स्क्रू और फास्टनर के आयात पर अचानक लागू किए गए क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर के चलते देश और गुरुनगरी के स्क्रू उद्योग पर संकट के बादल गहराने लगे हैं। इस नई नीति के कारण व्यापार और विनिर्माण क्षेत्र में भारी चिंता का माहौल है। इस गंभीर मुद्दे को लेकर नार्थ इंडिया स्क्रू मैन्युफैक्चरर एंड ट्रेडर एसोसिएशन की बैठक अध्यक्ष रंजन अग्रवाल की अध्यक्षता में हुई। बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर सरकार के इस अचानक उठाए गए कदम पर गहरी चिंता व्यक्त की गई। एसोसिएशन के अध्यक्ष रंजन अग्रवाल ने कहा कि देश के उद्योगपति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मेक इन इंडिया, वोकल फॉर लोकल और आत्मनिर्भर भारत के विजन को सफल बनाने के लिए पूरी तरह से वचनबद्ध हैं। कारोबारी गुणवत्ता में सुधार के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन घरेलू विनिर्माण को बचाने के लिए नीति में समय और राहत मिलना बेहद जरूरी है। उन्होंने चेतावनी दी कि स्क्रू और फास्टनर किसी भी बड़े प्रोजेक्ट की कुल लागत का मात्र 1% होते हैं, लेकिन इनके बिना डिफेंस (रक्षा), रेलवे, सोलर पावर, ऑटोमोटिव और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे देश के अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्रों का 100% काम रुकने की कगार पर पहुंच जाएगा। उन्होंने कहा कि वैश्विक बदलावों के कारण अमृतसर का करीब एक सदी पुराना ऐतिहासिक स्क्रू क्लस्टर पहले ही सिमट चुका है, जिससे कभी 600 इकाइयों का यह उद्योग अब कुछ गिनी-चुनी इकाइयों तक सिमट गया है और उनमें चल रहा आधुनिकीकरण रातों-रात पूरा होना मुमकिन नहीं है। इसके साथ ही देश में हाई-टेक्नोलॉजी और हाई-प्रिसिजन स्क्रू का घरेलू उत्पादन राष्ट्रीय मांग के मुकाबले 95 प्रतिशत से भी ज्यादा कम है और भारत की वर्तमान क्षमता कुल मांग का 10 प्रतिशत भी पूरी नहीं कर पाती है।
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