जालंधर में बकरीद पर लोगों ने की नवाज अदा: नेताओं ने नीट परीक्षा विवाद, बढ़ती महंगाई और धर्म की राजनीति पर उठाए तीखे सवाल – Jalandhar News
देशभर के साथ-साथ पंजाब के जालंधर में भी आज बकरीद (ईद-उल-अजहा) का त्योहार पूरे अकीदत और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस खास मौके पर जालंधर के गुलाब देवी रोड स्थित ईदगाह में मुस्लिम समाज के लोगों ने इकट्ठा होकर नमाज अदा की और देश की तरक्की व आपसी भाईचारे की दुआ मांगी। पूर्व सांसद सुशील रिंकू भी इस दौरान मुस्लिम समुदाय को मुबारकबाद देने पहुंचे। त्योहार की इस रौनक के बीच नेताओं ने देश के समसामयिक मुद्दों पर भी अपनी बात रखी। इस दौरान नीट (NEET) परीक्षा विवाद, बढ़ती महंगाई, गैस सिलेंडर के दाम और छोटे व्यापारियों की बदहाली का मुद्दा जोर-शोर से उठा। नेताओं ने आरोप लगाया कि राजनीतिक पार्टियां जनता का ध्यान असल मुद्दों से भटकाकर धर्म की ओर डाइवर्ट कर रही हैं। साथ ही, बकरीद के पवित्र संदेश को याद दिलाते हुए नफरत को मोहब्बत से खत्म करने और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की अपील की गई। जालंधर में ईदगाहों में उमड़ी भीड़ आज देशभर में बकरीद का त्योहार पारंपरिक श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। इसी कड़ी में जालंधर के गुलाब देवी रोड पर स्थित ईदगाह में सुबह से ही रौनक देखने को मिली। मुस्लिम समाज के हजारों लोग सुबह-सुबह नमाज अदा करने के लिए एकत्रित हुए। नमाज के बाद लोगों ने एक-दूसरे के गले मिलकर ईद की बधाई दी और देश की खुशहाली की कामना की। इस पवित्र मौके पर मुस्लिम भाईचारे का हौसला बढ़ाने और उन्हें बधाई देने के लिए राजनेता सुशील रिंकू विशेष रूप से पहुंचे। उन्होंने भारी संख्या में पहुंचे नमाजियों को ईद की शुभकामनाएं दीं। ईदगाह पहुंचे मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधियों ने कहा कि आज की नमाज में विशेष रूप से देश की तरक्की और अमन-चैन के लिए दुआ मांगी गई है। उन्होंने संकल्प लिया कि हमारा देश दिन दोगुनी और रात चौगुनी तरक्की करे। समुदाय के लोगों का कहना था कि जब हम सभी धर्मों के लोग आपस में भाईचारक सांझ को बढ़ाएंगे और मिलजुल कर रहेंगे, तभी देश आगे बढ़ेगा। जब हर नागरिक एकजुट होकर देश के विकास में अपना योगदान देगा, तभी भारत सच्चे अर्थों में ‘विश्व गुरु’ बन सकेगा। नीट परीक्षा विवाद और महंगाई पर बरसे नेता एक तरफ जहां त्योहार की खुशियां थीं, वहीं दूसरी तरफ देश के मौजूदा हालात और राजनीति पर भी गंभीर चर्चा हुई। नेताओं ने तीखे तेवर अपनाते हुए कहा कि आज देश में धर्म के नाम पर नफरत पैदा करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि आज कोई भी रोजगार (इम्प्लॉयमेंट) की बात नहीं कर रहा है। नीट (NEET) के एग्जाम को लेकर करीब 22 लाख बच्चों के भविष्य के साथ जो खिलवाड़ हुआ है, उस पर राजनीतिक पार्टियां चुप्पी साधे हुए हैं। इसके अलावा देश में बढ़ती महंगाई और एक झटके में रसोई गैस सिलेंडर के बढ़े दामों पर कोई खुलकर बात करने को तैयार नहीं है। नेताओं ने आर्थिक मोर्चे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि देश के छोटे व्यापारी और रेहड़ी-पटरी वाले (स्ट्रीट वेंडर्स) आर्थिक तंगी के कारण धीरे-धीरे खत्म हो रहे हैं। लेकिन बड़े अफसोस की बात है कि उन पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसका एकमात्र कारण यह है कि राजनीतिक पार्टियां बड़ी चतुराई से जनता को इन बुनियादी और जरूरी मुद्दों से भटकाकर धर्म की राजनीति की तरफ डाइवर्ट कर रही हैं, ताकि लोग असल सवाल न पूछ सकें। नफरत का जवाब सिर्फ मोहब्बत बकरीद के इस मौके पर नेताओं ने समाज से अपील की कि वे फिर से अपनी भाईचारक सांझ को मजबूत करें। उन्होंने कहा कि समाज में फैली नफरत को केवल मोहब्बत से ही खत्म किया जा सकता है। हम सभी को प्यार का पैगाम लेकर आगे बढ़ना होगा। प्रशासन पर निशाना साधते हुए कहा गया कि अधिकारी यह तो कह रहे हैं कि नमाज नहीं पढ़ी जाएगी, लेकिन वे यह गारंटी नहीं दे रहे कि भविष्य में नीट जैसी बड़ी परीक्षाएं लीक नहीं होंगी। इसके साथ ही मांग की गई कि देश में प्राइवेट और सरकारी एजुकेशन पॉलिसी को एक समान किया जाए, ताकि किसी गरीब का बच्चा भी पढ़-लिखकर आईएएस (IAS) अधिकारी बन सके। जानिए क्या है बकरीद मेें कुर्बानी का महत्व बता दें कि इस्लामिक मान्यता के अनुसार, नमाज के बाद बकरे या अन्य तय जानवरों की कुर्बानी देने की पुरानी परंपरा है। बकरीद को ‘ईद-उल-अजहा’ या ‘कुर्बानी वाली ईद’ के नाम से भी जाना जाता है। यह मीठी ईद (ईद-उल-फितर) के बाद मुस्लिम समाज का दूसरा सबसे बड़ा त्योहार है। इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक, यह पर्व जुल-हिज्जा महीने के 10वें दिन मनाया जाता है, जो कि मक्का की पवित्र हज यात्रा के समापन का प्रतीक भी है। इस साल 28 मई को बकरीद की मुख्य नमाज अदा की गई है, जबकि कुर्बानी का यह सिलसिला 28, 29 और 30 मई तक यानी तीन दिनों तक चलेगा। इस त्योहार का असली संदेश यह है कि इंसान अपनी सबसे प्यारी चीज को खुदा की राह में कुर्बान करे। बकरीद में कुर्बानी का सच्चा आध्यात्मिक अर्थ पशुओं की बलि देने के साथ-साथ अपने भीतर के स्वार्थ, अहंकार, लालच और बुरी आदतों को छोड़कर एक नेक और सच्चा इंसान बनना है।
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